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डोनाल्ड ट्रंप के दो बयानों से अमेरिका में नये सवाल




वाशिंगटनः डोनाल्ड ट्रंप के दो बयानों ने फिर से अमेरिका में नया वितर्क प्रारंभ कर दिया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को उन रिपोर्ट पर विश्वास नहीं है कि

जिनमें यह कहा जा रहा है कि इजरायल अमेरिका की जासूसी कर रहा है।

श्री ट्रंप ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा , ‘‘मुझे विश्वास नहीं है।

नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता कि इजरायल अमेरिका की जासूरी कर रहा है।

मेरे लिए इस पर विश्वास करना वास्तव में मुश्किल होगा।’’

उल्लेखनीय है कि बुधवार को तीन पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मीडिया में

यह खबर आयी थी कि इजरायल के एजेंटों ने श्री ट्रम्प की जासूसी करने के लिए

व्हाइट हाउस के पास और वाशिंगटन में कई अन्य स्थानों पर सेल-फोन निगरानी उपकरण लगाये हैं।

उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध हैं और उन्होंने तेल अवीव से

अमेरिकी दूतावास को यरुशलम ले जाने और पश्चिम एशिया में ईरान की गतिविधियों

को रोकने और दबाव बनाने के अपने निर्णय पर प्रकाश डाला।

मीडिया कंपनी ‘पॉलिटिको’ ने बताया कि दो वर्ष पहले भी वहां जासूसी उपकरण मिले थे

लेकिन किसी विशेष संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया था।

अमेरिका स्थित इजरायली दूतावास के प्रवक्ता एलाड स्ट्रॉहमायर ने वाशिंगटन में

जासूसी उपकरण लगाने के सभी आरोपों का खंडन किया है।

डोनाल्ड ट्रंप के दो बयानों में एक उत्तर कोरिया पर

ट्रम्प ने कहा है कि वह इस वर्ष कुछ मुद्दों पर उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात कर सकते हैं।

श्री ट्रम्प ने गुरुवार शाम यह बात कही।

संवाददाताओं ने जब श्री ट्रम्प से पूछा कि क्या वह इस वर्ष उत्तर कोरिया ने नेता किम से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने कहा, ‘‘हां कुछ मुद्दों पर…मुझे लगता है ऐसा संभव है।’’

इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस ने कहा था कि

संयुक्त राष्ट्र महासभा की आगामी 74 वें सत्र के दौरान होने वाली मुलाकात के इतर

अमेरिका तथा उत्तर कोरिया के अधिकारियों के बीच कोई बैठक निर्धारित नहीं है।

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