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कुत्ते के मांस का अवैध कारोबार से भी कोरोना वायरस का खतरा

  • नगालैंड में कुत्ते का मांस लोकप्रिय भोजन

  • असम से जा रहा ट्रक पकड़ाया तो पता चला

  • आस-पास के राज्यों से हो रही है इसकी तस्करी

  • यहां हर साल मारे जाते हैं करीब बीस लाख कुत्ते

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः कुत्ते के मांस का कारोबार भी इस इलाके में कोरोना वायरस प्रसार का एक

जरिया बन सकता है। उत्तर पूर्व के एकमात्र राज्य नगालैंड में इसे चाव से  खाया जाता है।

वहां इसकी मांग अधिक होने की वजह से अब लोग अन्य इलाकों से कुत्तों को वहां बेचने

के लिए ले जाते हैं। असम से भी कुछ लोग इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। बोरों में भरकर

कुत्ता ले जाने की इस प्रक्रिया में अनेक कुत्ते मारे जाते हैं। बस्तों में भरने जाने से उनकी

मौत दम घुटने से होती है।

गोलाघाट जिले के बरपथार में

असम पुलिस ने नगालैंड अवैध

तरीके से ले जा रहे 130 कुत्तों को

जब्त किया। इनमें से 10 पहले ही मारे जा चुके थे। गोलाघाट के अतिरिक्त पुलिस

अधीक्षक सुरजीत सिंह पनेशर ने कहा कि दस कुत्ते इसमें मरे पाए गए। इनका

पोस्टमार्टम स्थानीय सरकारी पशु डाक्टरों ने मौत के कारणों को जानने के लिए किया है।

वहीं जिंदा 120 कुत्तों की देखभाल जिला पशुपालन विभाग कर रहा है। पनेशर ने कहा कि

इन कुत्तों को असम के देरगांव से नगालैंड के अवैध बाजार में बेचने के लिए ले जा रहा

था। हमने एक मामला धारा 379 (चोरी के जुर्म के लिए), 428(शैतानी से हत्या), पशुओं के

साथ क्रूरता की रोकथाम कानून 1960 के तहत मामला दर्ज किया है। हमने ट्रक के ड्राइवर

को गिरफ्तार करने के साथ ही माल भर्ती ट्रक को जब्त कर लिया है। जांच जारी है। लेकिन

इस एक घटना से नगालैंड में कुत्ते के मांस की मांग से चीन में फैली महामारी को भी

जोड़कर देखा जा रहा है। नगालैंड में मांस के अवैध कारोबार के लिए एक अनुमान है कि

हर साल 20 लाख कुत्तों को मारा जा रहा है।

इस किस्म के भोजन से बढ़ रहा है कोरोना फैलने का खतरा

पहली बार कुत्ते की तस्करी और मांस के अवैध कारोबार का मसला सामने आने के बाद

आगे की जांच में यह खुलासा हुआ है कि नगालैंड में ऐसे एक किलो की कीमत 800 रुपये

से ज्यादा है। वहां इसी वजह से सड़कों पर कुत्ते नजर नहीं आते।

कुत्ते के मांस का आहार दूसरे राज्यों में भी फैला

वैसे जानकार बताते हैं कि नगालैंड के अलावा अरुणाचल प्रदेश से लेकर बंगाल के

दार्जिलिंग तक भी इसे अब खाया जाता है। नगा समुदाय यह मानता है कि इस मांस को

खाने से बुद्धि तेज होती है। चीन के वूहान शहर में जंगली जानवरो से फैले कोरोना वायरस

के संक्रमण के बाद इस किस्म के जानवरों के मांस से कभी भी रोग के फैलने का खतरा भी

बढ़ा है। नगालैंड में ऐसी स्थिति तब है जबकि वहां हरी सब्जियों की कोई कमी नहीं है।

आप घर में लाकर खूब हरी सब्जियां बना सकते हैं पर रेस्टोरेंट में ऐसी हरी सब्जियों से

बने व्यंजनों का मिल जाना मुश्किल है। जब आप नगालैंड के सब्जी बाजार में जाएंगे तो

वहां कई किस्म की हरी सब्जियां देखने को मिलेंगी। वैसे यह भी बता दें, सभी नागा कुत्ते

का मांस नहीं खाते हैं। शहरी क्षेत्रों में, वे कुत्ते को पालतू जानवर के रूप में रखते हैं। उनमें

से ज्यादातर आयातित कुत्ते की नस्लें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में, जो कुत्ते को पालते थे वे

स्वदेशी नस्ल के कुत्ते पालते हैं। इसकी उत्पत्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं। वे इसे

शिकार के लिए, पालतू जानवर के रूप में और निश्चित रूप से इसके मांस के लिए रखते

हैं। अब कोरोना वायरस को लेकर दुनिया में फैले भय के माहौल में नगालैंड में कुत्ते के

मांस पर प्रतिबंध लगाने की मांग फिर से दोहरायी जा रही है।

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