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महामारी से ध्यान ना हटे चीन को सेना के जिम्मे छोड़िये

महामारी की चिंता अधिक करनी चाहिए क्योंकि यह देश को अंदर से परेशान करने वाली

बात है। जहां तक गलवान घाटी अथवा चीन के साथ सीमा विवाद की बात है तो इस मसले

को भारतीय सेना पर छोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि भारतीय सेना की क्षमता पर अगर

किसी को संदेह है तो वह निपट मूरख ही है। दूसरी तरफ गलवान घाटी पर चीन के साथ

हुई झड़प के बारे में राष्ट्रप्रेम का ज्वार जगाने की भी जरूरत नहीं है। किस देश के सैनिकों

ने कैसी बहादुरी दिखाई, इसका बखान भी अपने आप एक मजाक जैसा है क्योंकि इस बारे

में सेना की तरफ से औपचारिक बयान जो दिया गया है, उसमें इस किस्म की घटनाओं का

कोई उल्लेख नहीं है। दूसरी तरफ यह बात भी सच है कि सेना की बहादुरी के जो कसीदे पढ़े

जा रहे हैं, उन्हें पढ़ने वाले तो घटनास्थल पर कतई मौजूद नहीं थे। इसलिए देश की चर्चा

से उस कोरोना पर से ध्यान हटाना अत्यधिक नुकसान दायक स्थिति होगी। देश की

सरकारों को फिलहाल सेना को सेना की जिम्मेदारी पर छोड़कर कोरोना की जांच और

कोरोना मरीजों के ईलाज पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। सरकारी आंकड़ों के

मुताबिक 13699 लोगों की कोरोना से हुई मौत के बाद इसे हल्के में लेने की कोई भी

कोशिश राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचाने वाली बात होगी। देश के कई राज्य ऐसे हैं, जहां

कोरोना संक्रमण लगाता बढ़ता हुआ आंकड़ा ही प्रदर्शित कर रहा है। इसकी अच्छी बात यह

है कि कमसे कम देश में जांच की प्रक्रिया तेज हुई है। इसी जांच की मांग कोरोना संक्रमण

फैलने के पहले से की जा रही थी क्योंकि बिना जांच के यह पता नहीं किया जा सकता था

कि दरअसल कोरोना की महामारी कहां तक पैठ बना चुकी है।

महामारी का प्रसार तो जांच से ही स्पष्ट हो पायेगा

अब कोरोना लॉक डाउन के बाद जब मजदूर अपने गांव लौटे हैं, तो लगातार उनके संक्रमण

का पता चल रहा है। दूसरी तरफ कुछ महानगरों में कोरोना संक्रमण स्थनीय स्तर पर

लगातार फैलता जा रहा है, यह भी सरकारी आंकड़े ही स्पष्ट कर रहे हैं। इसलिए केंद्र और

राज्य सरकार का पूरा फोकस इसी कोरोना संक्रमण को और फैलने से रोकने, कोरोना

संक्रमित लोगों की तेजी से जांच करने तथा बीमार पड़ चुके लोगों के बेहतर ईलाज की

व्यवस्था करने पर केंद्रित रहना चाहिए। यह सवाल जायज है कि क्या फिर गलवान घाटी

की चर्चा को छोड़ दिया जाए। तो हर समझदार को यह तय करना चाहिए कि वह पहले

किसी समस्या का समाधान करे। अगर उसके पास में आग लगी हो और दूर कहीं डकैती हो

रही हो तो आप कौन सी समस्या का समाधान पहले करना चाहेंगे। जाहिर सी बात है कि

पड़ोस की आग को बूझाना जरूरी है क्योंकि आग आगे बढ़ने पर आपके घर को भी अपनी

चपेट में ले सकता है। जहां तक डकैतों की बात है तो पहचान होने के बाद उन डकैतों को

बाद में भी खदेड़कर पकड़ा जा सकता है। दरअसल आधुनिक संचार और अंतरिक्ष तकनीक

के युग में गावलान घाटी में क्या कुछ घटित हुआ है अथवा अभी घट रहा है, उसे दुनिया में

लोग अपने अपने सैटेलाइटों के माध्यम से पूरा देख रहे हैं। भले ही इनलोगों ने इस बारे में

कोई जानकारी नहीं दी हो लेकिन सैटेलाइट की तस्वीरों में इस पूरे घटनाक्रम को दर्ज

किया गया होगा।

गवलान में क्या घटा वह सैटेलाइटों में दर्ज हुआ होगा

हो सकता है कि कुछ वर्षों के बाद उस पूरी घटना की सैटेलाइट तस्वीरें भी हमारे बीच आ

जाए। जहां तक चीन का सवाल है तो सिर्फ बार बार 1962 को दोहराना भी जरूरी नहीं है।

1962 की हार के पांच साल बाद ही हमलोगोंने अपनी सामरिक तैयारियों को बेहतर बनाते

हुए नाथुला दर्रे के पास चीन को फिर से पीछे खदेड़ा था और उसके उन सैनिकों को अंदर

घुसकर मारा था, जो भारतीय सीमा में घुसपैठ करने आ पहुंचे थे। इसलिए गावलान में

बीस भारतीय सैनिक मारे गये हैं, इसी बात को याद रखते हुए बाकी का काम भारतीय

सेना पर छोड़ दीजिए। भारतीय सेना को इसका पर्याप्त अनुभव प्राप्त है। इसके लिए उसे

किसी खास हिदायत की भी जरूरत नहीं है। कोरोना की बीमारी एक हद से ऊपर जाने की

स्थिति में पूरी चिकित्सा व्यवस्था ही ध्वस्त हो जाएगी, इस चिंता पर ध्यान केंद्रित रखने

की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके अलावा जिन बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए

उनमें कारोबार को गति देने के लिए घोषित आर्थिक पैकजों को लागू करते हुए आम और

मध्यमवर्ग को राहत पहुंचान की कार्रवाई अधिक जरूरी है। वरना गरीबों के लिए भोजन

और मनरेगा के तहत रोजगार का इंतजाम तो किया जा रहा है। महामारी से बचाव के साथ

साथ बाजार में पैसे के प्रवाह को बढ़ाने से ही कारोबार मे गति आयेगी, जिससे देश की

अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट पायेगी।


 

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