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वोट विभाजन से आसान हुआ भाजपा की जीत का रास्ता




टीएमसी और माकपा के वोट बंट गये थे
राष्ट्रीय खबर

अगरतलाः वोट विभाजन की वजह से भाजपा को त्रिपुरा के नगर निकाय के चुनावों में जबर्दस्त जीत मिली है। सार्वजनिक स्तर पर इस जीत का जश्न मनाने का दौर जारी है। दूसरी तरफ भाजपा के चुनावी रणनीतिकार इस चुनाव परिणाम को आने वाले दिनों के लिए एक खतरे का संकेत मान रहे हैं।




अब भाजपा खेमा अंदर ही अंदर यह स्वीकार कर चुका है कि त्रिपुरा में अब तृणमूल कांग्रेस ने खुद को स्थापित कर लिया है और वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। मात्र तीन महीनों में यह उभार भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गया है।

दूसरी तरफ चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद जो आंकड़े सामने आये हैं, उससे साफ है कि अनेक इलाको में तृणमूल और माकपा के बीच वोटों के विभाजन की वजह से भाजपा की जीत का रास्ता बना है।

आंकड़े बताते हैं कि अगर टीएमसी और माकपा के वोटों का विभाजन नहीं होता तो चुनाव परिणाम उल्टे भी हो सकते थे। यानी टीएमसी और माकपा को मिले वोटों का प्रतिशत अगर जोड़ दें तो यह भाजपा को मिले वोटों से अधिक होता है। इसी वजह से अगल चुनाव के लिए भाजपा की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं।




वोट विभाजन नहीं हुआ तो भाजपा को संकट

चालीस ऐसी सीटों की पहचान हो चुकी हैं जहां सिर्फ टीएमसी और सीपीएम के बीच वोट बंट जाने की वजह से भाजपा के प्रत्याशी विजयी हुए हैं। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस में भगदड़ मचने के बाद अधिकांश कांग्रेसी नेता अब भाजपा के खेमे में हैं।

इस वजह से भी भाजपा के वोट का प्रतिशत बढ़ा है। अब यह माना जा रहा है कि इस चुनाव परिणाम के बाद माकपा के वोट बैंक का बड़ा हिस्सा टीएमसी की तरफ अगर चला जाता है तो यह भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगी।

दूसरी तरफ भाजपा के अंदर भी गुटबाजी चरम पर होने की वजह से इस लड़ाई का फायदा भी ममता बनर्जी की पार्टी को भाजपा के वोट विभाजन के तौर पर मिल सकता है, ऐसा भाजपा के अनुभवी लोग मानने लगे हैं।



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