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विस्थापितों के नियोजन व मुआवजे की मांग लेकर महाकुकूर कुंडौली आंदोलन

बोकारो: विस्थापितों के नियोजन एवं जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर

विस्थापित संयुक्त मोर्चा ने बीएसएल प्रबंधन के खिलाफ तीन दिवसीय महाकुकूर कुंडौली

आंदोलन की शुरूआत किया गया। इससे पूर्व ही प्रबंधन को आंदोलन का अल्टीमेटम दिया

था। आंदोलन का नेतृत्व केंदीय अध्यक्ष निवारण दिगार की। आंदोलन में बड़ी संख्या में

विस्थापित महिला, पुरुष एवं नौजवान शामिल हुए। विस्थापितों ने सर्वप्रथम बिरसा चौक

स्थित भगवान बिरसा मुंडा प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कारवां एडीएम की तरफ निकल

पड़ा। इस दौरान नया मोड़ के पास सुरक्षाबलों के काफी प्रयासों के बाद भी विस्थापित रुके

नहीं। मगर उन्हें एडीएम से पहले ही रोक दिया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय

अध्यक्ष श्री दिगार ने कहा कि बोकारो प्रबंधन एवं जिला प्रशासन के विस्थापित विरोधी

रवैया से विस्थापितों में काफी आक्रोश है, हमें और हमारे नौजवान बच्चों को नौकरी से

वंचित किया जा रहा है। विस्थापित संयुक्त मोर्चा लंबे अरसो से बीएसएल के प्रबंधन के

विरोध में जनतांत्रिक आंदोलन करते आया है। अपने मांगों को सेल इकाई के सभी

पदाधिकारियों तथा जिला प्रशासन के सभी इकाई के पदाधिकारियों को विस्थापित की

विभिन्न मांगों से अवगत कराते रहे। परंतु बीएसएल एवं जिला प्रशासन ने विस्थापितों के

ज्वलंत समस्या के समाधान पर रूचि नहीं लिया। और विस्थापित आंदोलन को झूठा

वार्ता एवं आश्वासन के नाम पर आंदोलन को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा

कि इस पूर्व 26 फरवरी 2020 को विस्थापित संयुक्त मोर्चा सह झारखंड बेरोजगार विकास

मंच के द्वारा एक दिवसीय तालाबंदी आंदोलन पूर्व में किया जा चुका है और विस्थापितों

को लिखित रूप से आश्वासन दिया गया था कि 12 मार्च को त्रिपक्षीय वार्ता किया जाएगा,

लेकिन अब तक वार्ता नहीं किया गया। इसलिए विस्थापित आक्रोशित होकर पुनः तीन

दिवसीय महाकुकूर कुंडौली जन आक्रोश तालाबंद आंदोलन करने को विवश है।

विस्थापितों के नियोजन पर प्रबंधन का रवैया टालने वाला

उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो तीन दिन के बाद बोकारो

प्लांट के मुख्य एवं सीजेड द्वार पर अनिश्चितकाल धरना पर बैठ जांएगे। साथ प्लांग का

चक्का भी जाम करेंगे।

नया मोड़ पर हुई विस्थापितों एवं सुरक्षाकर्मी में झड़प

विस्थापित संयुक्त मोर्चा द्वारा बीएसएल प्रबंधन एवं जिला प्रशासन को कार्यक्रम की

सूचना दी गई थी। जिसको लेकर नया मोड़ पर सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। विस्थापित अपने

कारवां के साथ नया मोड़ होते हुए बीएसएल एडीएम बिल्डिंग के तरफ जा रहे थे, वहीं

सुरक्षाकर्मी के जवानों ने उनको रोकने की कोशिश की, लेकिन विस्थापित माने को तैयारी

नही थे। विस्थापितों द्वारा धक्का मुक्की साथ आगे बढ़े और एडीएम बिल्डिंग पहुंचे। जहां

पुलिस प्रशासन एवं होमगार्ड के जवान ने बेंरिग गेट लगा रखी थी। मौके पर पहुंचे सिटी

डीएसपी ज्ञान रंजन एवं सिटी थाना प्रभारी ने विस्थापितों से बात कर उनको समझाने की

कोशिश की। तब जाकर विस्थापित एडीएम बिल्डिंग के समक्ष लगे बैरियर के पास ही

रूककर धरना पे बैठ गये।

14 सूत्री मांगों को लेकर है आंदोलन

विस्थापितों की नौकरी का प्रक्रिया शीघ्र चालू करे, जमीन के बदले जयघोष राशि का

भुगतान अविलंब करवाया जाय, जिन विस्थापित को पुनर्वास नहीं मिला है वैसे

विस्थापितों को पुनर्वास जमीन मुहैया करवाया जाए, बोकारो स्टील सिटी के अंतर्गत

विस्थापित स्टेडियम बनाया जाए, विस्थापित के लिए कला केंद्र भवन का निर्माण

करवाया जाए, विस्थापित के नाम पर सर्किट हाउस का निर्माण करवाया जाए, बीजीएच

नगर सेवा भवन एवं पर्सनल डिपार्टमेंट में कांटेक्ट बेसिस पर किये जा रहे बहाली को बंद

कर के विस्थापितों को बहाल चालू करे, विस्थापित महिलाओं एवं छात्राओं को नौकरी में

बहाल किया जाय, 1992 में 1270 विस्थापितों को बीएसएल द्वारा साक्षात्कार पत्र दिया है

इसका अविलंब चालू किया जाय, नन मैट्रिक विस्थापितों को 30 वर्षाें तक कंपनी में बहाल

करे, सेल द्वारा अप्रेंटिस करवाया गया सभी अभ्यर्थियों को सेल में नौकरी दिया जाये,

विस्थापित बेरोजगारों के लिए स्लैग डंप को कंपनी द्वारा टेंडर करवाया जाय, दस हजार

विस्थापितों को स्लैग डंप के जरिए से विस्थापित एवं प्रवासी मजदूरों का पलायन रोका

जाय, विस्थापितों के पुनर्वास गावों में चिकित्सा, सड़क एवं शिक्षा का समुचित व्यवस्था

किया जाये।


 

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