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शहर के एक गोदाम से जब्त माल छुड़ाने के लिए लंबी डील की चर्चा

  • जब्त गुटखा छोड़वाने में पांच करोड़ का सौदा ?
  • चालीस करोड़ का माल छोड़ने में पैरवी भी लगी
  • छोटे बॉक्स की कीमत तीन हजार रुपये
  • मोरहाबादी का नया नाम दावेदार बनकर आया
  • राज्य के अन्य व्यापारियों के पास भी करोड़ों का माल
संवाददाता

रांचीः शहर के एक गोदाम में छापामारी के बाद जब्त गुटखा से प्रदेश की राजनीति का वह

चेहरा भी सामने आने लगा है, जो भ्रष्टाचार के काला है। अपर बाजार के जालान रोड पर

जब इस गोदाम में छापामारी हुई थी तो इस माल का कोई मालिक सामने नहीं आया था।

उस वक्त छापामार दल को यह अनुमान था कि गोदाम में करोड़ों का माल है।

 गुटखा की कीमत के आधार पर यह अनुमान लगाया गया था

इस बीच माल को छुड़ाने के लिए राजनीतिक पैरवी का दौर चालू हो गया था। अपर बाजार

के लोग यह माल जय प्रकाश सिंघानिया का मान रहे थे। लेकिन उन्होंने पुलिस को यह

जानकारी दी थी कि यह माल उनका नहीं है। दरअसल छापामारी के वक्त इस किस्म के

तंबाखू उत्पादों को लौटाने की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। इस श्रेणी के तमाम

उत्पादनों पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद उसै 31 मई तक लौटाने का आदेश निर्गत किया

गया था। माल जब्त होने तथा गोदाम के सीलबंद होने तक कोई भी मालिक सामने नहीं

आया था। लेकिन बाद में जिस तरीके से इसके लिए पैरवी हो रही थी, उसी से अन्य लोगों

को भी कई किस्म का संदेह हो रहा था। कुछ लोगों का मानना था कि तीन अन्य गोदामों में

पड़ा माल बचाने के लिए सारी कोशिशें हो रही हैं।

अब जाकर धीरे धीरे पूरे मामले पर से पर्दा उठने लगा है। जानकार बताते हैं कि जिस

गोदाम पर पुलिस और नगर निगम ने छापा मारने के बाद कोई दावेदार नहीं होने की

वजह से सीलबंद किया था, उसमें करीब चालीस करोड़ रुपये मूल्य का माल पड़ा हुआ था।

शहर के एक गोदाम के माल की कीमत का आकलन हुआ

इसके अलावा भी शहर के कई अन्य गोदामों में करीब इतनी ही कीमत के तंबाखू उत्पादन

अब भी रखे हुए है। अब सरकार की तरफ से इन माल को लौटाने की अंतिम तिथि 10 जून

करने का आदेश जारी होते ही माल के दावेदार के तौर पर मोरहाबादी का एक व्यापारी

सामने आया है। लेकिन अपर बाजार मानता है कि दरअसल जो व्यक्ति इस माल पर

अपनी दावेदारी कर रहा है, वह उसका नहीं है।

जानकार बता रहे हैं कि इस माल को बचाने के लिए पांच करोड़ रुपये की डील हुई है। इस

डील के बाद ही माल लौटाने की अंतिम तिथि में संशोधन किया गया है। इसमें राज्य के

कई अन्य गुटखा कारोबारियों को भी लाभ पहुंचा है क्योंकि उनके गोदामों में भी करोड़ों

रुपया मूल्य के गुटखा अब भी बंद पड़े हैं।

इस बारे में एक जानकार ने बताया कि गुटखा के एक छोटे डब्बे का माल तीन हजार रुपये

में बिक रहा था। लॉक डाउन के दौरान भी दुकान का मुख्य शटर बंद कर बगल के दरवाजे

से माल बेचा जा रहा था। इस छोटे डब्बे की कीमत के आधार पर ही यह माना जा रहा है कि

वहां दरअसल चालीस करोड़ का माल पकड़ा गया था। लेकिन नये दावेदार के सामने आने

के बाद उसे भी छोड़ने की पूरी तैयारी कर ली गयी है। इस बीच सूत्र बताते हैं कि इस मामले

को निपटान में पुलिस के भी कुछ अधिकारियों की प्रमुख भूमिका रही है, जिनके साथ

कारोबारियों के मधुर रिश्ते रहे हैं।


 

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