fbpx Press "Enter" to skip to content

ऑक्सीजन की घटिया राजनीति का खुलासा होने के बाद मोदी सतर्क

ऑक्सीजन की घटिया राजनीति का न सिर्फ खुलासा हो गया बल्कि ऐसा क्यों और कौन

कर रहे है, यह भी जनता की नजरों में स्पष्ट हो गया है। अब इस पर सफाई और लीपापोती

का दौर भले जारी रहे लेकिन जनता की उखड़ती सांसों के बीच जिनलोगों ने ऐसा किया है,

उन्हें जनादेश का सजा मिलना भी लगभग तय हो गया है क्योंकि जो लोग इस कष्ट को

भोग रहे हैं, उन्हें पता है कि कौन इसके लिए जिम्मेदार है। कहां सड़कों पर ऑक्सीजन के

टैंकरों को बेवजह रोका जा रहा है। सीधी सड़क से दिल्ली तक ऑक्सीजन पहुंचाने के बदले

किसान आंदोलन वाले रास्तों पर इन ऑक्सीजन के टैंकरों को कौन मोड़ रहा है। इस पर

कोई कुछ भी सफाई दे जनता सब कुछ देख समझ रही है। अब मामला अधिक चर्चित होने

के अलावा विदेशी मीडिया की तीखी आलोचना से भी केंद्र सरकार को यह बात समझ में

आयी है कि सिर्फ जुमलेबाजी और नये नये भाषणों से देश की जनता को न तो राहत

दिलायी जा सकती है और न ही हर बार श्रेय लूटने की बीमारी से संकट का समाधान हो

सकता है। जो काम अभी से एक माह पूर्व प्रारंभ हो जाना चाहिए था, वह अब हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बड़े ऑक्सीजन विनिर्माताओं और उद्योगों के साथ बैठक

की और आगामी दिनों में चिकित्सा ऑक्सीजन की मांग पूरी करने के लिए उद्योग की

पूर्ण संभावनाओं के इस्तेमाल पर चर्चा की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई इस बैठक में

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी, जेएसडब्ल्यू समूह के

चेयरमैन सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी टी वी

नरेंद्रन, जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल शामिल हुए।

देश के उद्योगपतियों ने संकट दूर करने में पहल की है

अन्य उद्योगपतियों में दिलीप उम्मेन, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की

चेयरमैन सोमा मंडल, लिंडे की एम बनर्जी, आइनोक्स के सिद्धार्थ जैन, एयर वाटर

जमशेदपुर के नोरिया शिभुया, नैशनल ऑक्सीजन लिमिटेड के राजेश कुमार सराफ और

ऑल इंडिया इंडस्ट्रीयल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साकेत टिकू

शामिल थे। प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ दिनों में ऑक्सीजन उत्पादन बढ़ाने के लिए

ऑक्सीजन उत्पादकों की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी माना कि तरल ऑक्सीजन का

उत्पादन बढ़ाने के लिए पिछले कुछ दिनों के दौरान बहुत से कदम उठाए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने देश की चिकित्सा जरूरत के लिए औद्योगिक ऑक्सीजन मुहैया कराने के

लिए उद्योग को धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थितियों में और सुधार लाने के

लिए उद्योग की पूर्ण संभावनाओं का इस्तेमाल किया जाए ताकि आगामी दिनों में

ऑक्सीजन की मांग पूरी की जा सके। सभी बड़े इस्पात उत्पादकों समेत बड़े विनिर्माता

बहुत से राज्यों को तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं। ऑक्सीजन उत्पादन

में जुटे उद्योगपतियों ने साफ कर दिया कि उनके लिए लोगों की जिंदगी बचाना ज्यादा

महत्त्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता बढ़ाने

और ऑक्सीजन के परिवहन के लिए लॉजिस्टिक सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।

उन्होंने उद्योग से आग्रह किया कि अन्य गैसों के परिवहन के लिए इस्तेमाल हो रहे टैंकरों

का ऑक्सीजन आपूर्ति में उपयोग किया जाए। सरकार पहले ही रेलवे और वायु सेना के

इस्तेमाल पर काम कर रही है ताकि टैंकर उत्पादन केंद्रों पर जल्द से जल्द पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बैठक के दौरान कहा कि राज्यों, उद्योग, ट्रांसपोर्टरों और अस्पतालों

को मिलकर काम करना चाहिए।

ऑक्सीजन की घटिया राजनीति का खुलासा होने के बाद अब सफाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले दिन में कोविड की चुनौती से निपटने के मुद्दे पर

राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी एक बैठक की। इस बैठक में उन्होंने एकजुट प्रयास और

एकजुट रणनीति का मंत्र दिया। इस बैठक में उन 11 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के

मुख्यमंत्री शामिल थे। लेकिन इसके बाद भी प्रधानमंत्री मोदी के पीछे यह सवाल पीछा

करते नजर आ रहे हैं कि पीएम केयर्स फंड के ऑक्सीजन केंद्र समय पर क्यों नहीं बन

पाये। इस काम को पूरा करन की जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार की थी। दिल्ली की आम

आदमी पार्टी ने अपनी तरफ से इस पूरी योजना के घोटाले को जनता के सामने रख दिया

है। चुनावी व्यस्तताओं के बीच जनहित का जो काम उपेक्षित हुआ और सिर्फ ऑक्सीजन

की कमी से जिनलोगों की जान गयी, उसकी जिम्मेदारी भी तय करने का यह समय है।

अभ सरकार विदेशों से पोर्टेबल ऑक्सीजन प्लांट मंगा रही है। विशेष रेलगाड़ियां का

परिचालन किया जा रहा है। लेकिन सवाल यथावत है कि यह सारे काम पहले क्यों नहीं

किये जा सके। इस विलंब की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। अगर ऑक्सीजन प्लांट

लगाने का पैसा लेकर ठेकेदार भाग गया तो केंद्र सरकार इससे अपना मुंह कैसे मोड़ सकती

है। संकट का दौर अभी घटता हुआ भी नजर नहीं आ रहा। ऐसे में केंद्र सरकार को अब

सस्ती लोकप्रियता के झांसे से बाहर आकर जनता के हित में सही काम करना होगा।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दिल्लीMore posts in दिल्ली »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

Be First to Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: