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आजसू से सीधे टकराव पर हलाकान हैं भाजपा प्रत्याशी

  • अनेक इलाकों में मजबूत है आजसू का सांगठिनक ढांचा

संवाददाता

रांचीः आजसू से सीधे टकराव की स्थिति में अनेक इलाकों के भाजपा प्रत्याशी परेशान हैं।

उन्हें इस बात का एहसास हो रहा है कि युवाओं के दल उनके साथ नहीं होने की वजह से

उन्हें कठिन चुनौती की आंच मिलने लगी है। दरअसल सीटों के बंटवारा पर समझौता नहीं होने की

वजह से आजसू और भाजपा के बीच का गठबंधन समाप्त हो चुका है। यह अलग बात है कि

भाजपा और एजेएसयू के नेता इस अलगाव को खुले तौर पर स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ सुदेश के संबंध बेहतर रहे हैं

समझा जाता है कि इसकी खास वजह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ सुदेश महतो का निजी संबंध है।

लेकिन चुनाव के मैदान में भाजपा ने भी औपचारिक तौर पर 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान

कर दिया है।

दूसरी तरफ इस युवाओं के दल के प्रभाव क्षेत्र में गठबंधन टूटते ही आजसू की सक्रियता दूसरे तरीके

से बढ़ गयी है।

दरअसल इस गठबंधन के टूट जाने से पार्टी के अध्यक्ष को पार्टी के अंदर भी राहत महसूस हुई है।

सुदेश महतो अपनी पार्टी के भीतर ही बगावत जैसी स्थिति का सामना कर रहे थे।

पार्टी के कई कद्दावर नेता बार बार भाजपा के सामने सुदेश के हथियार डाल देने को लेकर खिन्न थे।

स्थिति कुछ ऐसी बन चुकी थी कि अगर कुछ खास सीटों पर सुदेश अपने प्रत्याशियों के नामों की

घोषणा नहीं करती तो कई नेता दूसरे दलों में शामिल होकर उस दल के टिकट पर चुनाव मैदान

में उतर जाते।

इस लिहाज से गठबंधन टूटने का यह तात्कालिक लाभ पार्टी अध्यक्ष को मिल चुका है।

दूसरी तरफ भाजपा के प्रत्याशी यह अंतर महसूस कर रहे हैं कि बहुमत में युवाओं की पार्टी

होने की वजह से उसकी सक्रियता भाजपा के मुकाबले अधिक है।

भाजपा के जिन नेताओं का जनाधार मजबूत है अथवा जिनकी छवि बेदाग हैं, उनकी बात छोड़ दें तो शेष इलाको

में भाजपा प्रत्याशियों को आजसू के खिलाफ होने का कष्ट प्रारंभ से ही उठाना पड़ रहा है।

वैसे भाजपा के लोग भी यह जान रहे थे कि संगठन के स्तर पर लगातार कार्यक्रम आयोजित कर

यह दल अपने संगठन को लगातार मजबूत करती जा रही थी।

इस दौरान कई नेताओं को चुनाव में उतारने का आश्वासन भी दिया गया था।

आजसू अध्यक्ष सुदेश भी अंदर ही अंदर इस स्थिति से दबाव से उबरे

अब आजसू और भाजपा की चुनावी राह अलग होने के बाद भाजपा के वैसे नेताओं को जनसंपर्क में आजसू के

विरोध से तकलीफ हो रही है।

आजसू ने दूर की कौड़ी खेलते हुए टिकट से वंचित अन्य दलों के कई कद्दावर नेताओं को अपना टिकट दे दिया है।

इस चाल से आजसू ने एक तीर से कई शिकार करने का जाल भी बिछा रखा है।

अब भी भाजपा की तरफ से आजसू के इस आक्रामक तेवर की कोई काट सामने नहीं आयी है।

भाजपा प्रत्याशियों की परेशानी इसी आजसू के तेवर के साथ साथ पार्टी के अंदर के बिगड़े

समीकरणों की वजह से पेचिदा होता नजर आ रहा है।

पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेता प्रयास के बाद भी इन गड़बड़ियों को दूर नहीं कर पा रहे हैं।

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