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अलग किस्म के जासूस लगे हैं चीन के खिलाफ

  • इनकी भूमिका पुलिस या सेना जैसी नहीं

  • वायरस का स्रोत तलाश रहे हैं वैज्ञानिक

  • कहीं गुपचुप तरीके से पहले तो नहीं आया

  • वायरस की उत्पत्ति की गुत्थी सुलझाना जरूरी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अलग किस्म के जासूस हैं। ऐसे जासूसों का काम पुलिस अथवा सेना की तर्ज

पर नहीं है। दरअसल यह वैज्ञानिक हैं और कोरोना वायरस कहां और कैसे बना, इसकी

गतिविधियों को विश्लेषित कर रहे हैं। जैसे जैसे कोरोना वायरस और उसकी रोकथाम के

शोध आगे बढ़ रहे हैं वैसे वैसे यह अलग किस्म के जासूस भी नये नये आंकड़ों को जोड़ते

हुए इसके नतीजे निकाल रहे हैं। इस कार्रवाई की एकमात्र मकसद है कि उस सच को खोज

निकाला जाए जिसकी वजह से पूरी दुनिया में इतनी बड़ी तबाही आयी है और यह सारी

दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाला साबित हुआ है। इतने बड़े वैश्विक नुकसान

के मूल स्रोत को तलाशना ही इस कार्रवाई का मूल लक्ष्य हैं। घटनाक्रमों पर गौर करें तो

आठ दिसंबर 2019 को चीन ने अपने यहां नये किस्म के वायरस के संक्रमण की जानकारी

औपचारिक तौर पर दी थी। लेकिन क्या यह वायरस उसके पहले भी अस्तित्व में था, इसे

खोज निकालने में अनेक लोग जुटे हुए हैं। दुनिया भर में कोरोना के लक्षण वाले तमाम

मरीजों के मेडिकल रिकार्ड भी खंगाले जा रहे हैं। वैज्ञानिक अपनी इस कठिन प्रक्रिया के

तहत उस स्थान की पहचान करना चाहते हैं, जहां से वाकई यह वायरस पहली बार फैला

है। चीन का तर्क था कि वुहान शहर के समुद्री जीवों के बाजार से यह वायरस फैला था।

लगातार मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण इस बाजार को पहले बंद किया गया। फिर

महामारी फैल जाने की वजह से पूरे वुहान शहर को ही सील कर दिया गया था। मरीजों की

संख्या अधिक होने की वजह से चीन ने वहां आपातकाल को समझते हुए एक सप्ताह में

एक अस्पताल खड़ा किया और दस दिनों के भीतर उसे चालू कर कोरोना के मरीजों का उस

नये अस्पताल में ईलाज भी प्रारंभ कर दिया।

अलग किस्म के जासूस काम भी अलग करते हैं

वुहान शहर के बारे में मिले आंकड़ों को मिलाने के साथ साथ इसके पहले के कोरोना के

इतिहास की परख की जा रही है। दरअसल वैज्ञानिक अब तक के आंकड़ों से अलग भी कहीं

कुछ है तो उसकी भी जांच कर रहे हैं। जिसका मकसद सच्चाई की तह तक पहुंचना है।

कोरोना की महामारी ने चीन को पूरी दुनिया की नजरों में संदिग्ध बना दिया है। अमेरिका

ने साफ तौर पर यह आरोप लगाया है कि इस महामारी के बारे में चीन ने प्रारंभ में

जानकारी छिपायी थी। जिसकी वजह से पूरी दुनिया को इतना अधिक नुकसान उठाना पड़

रहा है। जापान ने चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंध तोड़ने की कड़ी में सभी जापानी

कंपनियों को चीन से अपना कारोबार समेटने के आदेश जारी कर दिये हैं। आर्थिक विशेषज्ञ

मानते हैं कि विकल्प खड़ा होते ही अन्य देश भी अपने उद्योगों के लिए कच्चा माल जुटाने

के लिए वैकल्पिक साधनों का ही इस्तेमाल करेंगे क्योंकि उन देशों में भी कोरोना वायरस

चीन के रास्ते ही पहुंचा है। अलग किस्म के जासूसों की भूमिका दुनिया भर में उपलब्ध

कोरोना संबंधी आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से किसी विज्ञान सम्मत नतीजे

तक ही पहुंचना है। शोध के आंकड़ों के विश्लेषण से ही इस सच का पता लगाया जा सकता

है। इसकी कड़ियों को एक एक कर जोड़ा जा रहा है। 

वैज्ञानिक अपने अनुसंधान के जरिए इस बात को भी समझना चाहते हैं कि क्या चीन की

औपचारिक घोषणा के पहले ही दुनिया भर में यह वायरस गुपचुप तरीके से फैल चुका था।

यह सवाल ही इन अलग किस्म के जासूसों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

जेनेटिक विज्ञान से कड़ियों को तलाशने का काम जारी

अलग किस्म के जासूसों में सभी जेनेटिक वैज्ञानिक हैं जो वायरस की जेनेटिक

गतिविधियों के जरिए इसका पता लगाने की कोशिश कर रहे है। अब तक की खोज में

फ्रांस में ऐसे कुछ मामले मिले हैं, जो जनवरी माह के अंतिम सप्ताह के हैं। जेनेटिक

वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे हैं कि अगर जनवरी के अंतिम सप्ताह में यह वायरस

नजर आया है तो यह एक महीने से इस देश में सक्रिय रहा होगा। दरअसल लोगों को सर्दी,

खांसी और आम सर्दी और बुखार जैसी परेशानियां होने की वजह से लोगों का ध्यान इस

वायरस की तरफ पहले नहीं गया था। पेरिस के एक अस्पताल से लिये गये नमूनों में से

एक में कोविड 19 का संक्रमण पाया गया है। इस एक साक्ष्य की वजह से अलग किस्म के

जासूसों की जिम्मेदारी और बढ़ गयी है। जैसे जैसे इस महामारी के लक्षणों का पता चल

रहा है दुनिया भर से इसके लक्षण वाले मरीजों की भी जानकारी सामने आ रही है। इसी

वजह से दरअसल यह वायरस कहां से और कैसे पैदा हुआ, यह भी दुनिया के लिए एक बड़ा

सवाल बनकर उभरा है। इसी तरह इटली की प्रमुख फुटबॉल टीम इंटर मिलान के भी 23

खिलाड़ी अचानक बीमार हो गये थे। लेकिन उस वक्त हुई जांच में कोविड 19 का पता नहीं

चल पाया था।


 

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