Press "Enter" to skip to content

जेनेटिक विधि से डायबेटिक्स का बेहतर ईलाज संभव होगा




  • खून के अंदर ग्लुकोज का नियंत्रण जरूरी है
  • इसके लिए इंसुलिन का उपयोग होता आया है
  • नया हॉरमोन का असर चूहों पर सफल साबित हुआ
  • मधुमेह के ईलाज की नई पद्धति वैकल्पिक हॉरमोन से
राष्ट्रीय खबर

रांचीः जेनेटिक विधि में हर दिन नये नये खोज हो रहे हैं। इसी क्रम में मधुमेह के ईलाज की एक नई विधि भी सामने आयी है। साल्ट इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक नया तरीका खोजा है। इससे खून में ग्लुकोज को नियंत्रित करने का नया उपाय सामने आता नजर आ रहा है।




हम जानते हैं कि मधुमेह यानी डायबेटिक्स में शरीर के अंदर के ग्लुकोज की मात्रा नियंत्रित नहीं रह पाती है क्योंकि शरीर अपने तौर पर उन्हें विखंडित करना छोड़ देता है। इस गड़बड़ी की वजह से लोगों दो दवा के सहारे इसे नियंत्रण में रखना पड़ता है। अधिक परेशानी की स्थिति में मरीजों को नियमित तौर पर इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं।

अब वैज्ञानिकों ने इंसुलिन पर आधारित इसी चिकित्सा पद्धति का जेनेटिक विधि से विकल्प तलाशा है। इसमें इंसुलिन के बदले दूसरे हॉरमोन का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ अरसा पहले ही साल्क इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक नये मॉलिक्यूल एफजीएफ1 की तलाश की थी। यह आकार प्रकार में इंसुलिन के जैसा ही है।

जेनेटिक विधि से हॉरमोन के बेहतर परिणाम

यह परीक्षण में इंसुलिन के जैसा काम करने वाला भी पाया गया था। यानी जब इस हॉरमोन का इंजेक्शन लगाया गया तो वह ग्लुकोज के नियंत्रित करने में कामयाब हुआ। चूहे पर हुए परीक्षण में इसका एक इंजेक्शन दो दिनो तक कारगर होने की जानकारी मिली थी।




बाद में इसी शोध पर आगे बढ़ते हुए शोधकर्ताओं ने पाया कि दिमाग में इसकी सूई से कई सप्ताह या महीनों तक ग्लुकोज की यह परेशानी दूर की जा सकती है। ऐसा क्यों होता है, इसकी भी वैज्ञानिकों ने परख की है। जेनेटिक विधि में यह पाया गया है कि यह दरअसल पूरी तरह इंसुलिन की तरह काम नहीं करता है।

इसका काम लीवर के अंदर ग्लुकोज का विखंडन करना नहीं है। शोघ की गाड़ी आगे बढ़ी तो इसके काम करने का तरीका देखकर वैज्ञानिक हैरान रह गये।

नये एंजाइम के साथ मिलकर करता है काम

इंसुलिन अपने काम करने के लिए पीडीई3बी नाम का एक एंजाइम का इस्तेमाल करता है। इसके जरिए वह अंदर में लिपोलाइसिस को रोकता है। दूसरी तरफ इस एंजाइम का परीक्षण एफजीएफ1 से किया गया, जो बेकार रहा। बाद में एक अन्य इंजाइम पीडीई4 के साथ जब उसके असर की जांच की गयी तो नई विधि का रास्ता खुल गया।

इस एंजाइम के रास्ते से यह नया हॉरमोन ग्लुकोज को नियंत्रित करने में सफल रहा। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि इस जेनेटिक विधि से शरीर में मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए नई ईलाज पद्धति भी सामने आ सकती है। चूहों पर हुए परीक्षण सफल होने के बाद अब शोधकर्ता उससे आगे की जांच कर रहे हैं।



More from HomeMore posts in Home »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

Be First to Comment

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.
%d bloggers like this: