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ढाका के रमना कालीमंदिर का जीर्णोद्धार भारत के अनुदान से

  • सौ अधिक लोगों को मार डाला गया था वहां

  • जांच आयोग ने खोजकर 62 के नाम निकाले

  • तब घायल हुए शंकर लाल दास को घटना याद है

  • इस मंदिर को उड़ा दिया था पाकिस्तानी सेना ने

अमीनूल हक

ढाकाः ढाका के रमना कालीमंदिर के साथ साथ वहां के मां आनंदमयी आश्रम की दशा

सुधरने वाली है। इस कालीमंदिर का धार्मिक महत्व होने के साथ साथ बांग्लादेश के

मुक्ति संग्राम के इतिहास में इसका ऐतिहासिक महत्व भी है।

वीडियो में समझ लीजिए घटनाक्रम लेकिन भाषा बांग्ला है

इस मंदिर में जब आप प्रवेश करते हैं तो प्रवेश द्वारा के बांयी तरफ सफेद पत्थऱ में 1971

के युद्ध के 62 शहीदों के नाम लिखे हुए हैं। इन दोनों धार्मिक स्थलों के विध्वंस के लिए

गठित आयोग ने जांच के बाद इन 62 लोगों के नाम खोजे हैं। इस मंदिर के बगल में है

पक्के घाट का एक तालाब, जिसे तालाब कम और मां की दीघी के नाम से ज्यादा जाना

जाता है।

ढाका के रमना मंदिर की भौगोलिक स्थिति को समझ लीजिए। सोहराबर्दी बाग के ठीक

दक्षिण में 2.22 एकड़ में यह मंदिर, भक्तों का निवास और अन्य कार्य अभी युद्धस्तर पर

चल रहे हैं। यहां एक हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता वाला एक ऑडियोरियम भी बनाने

की योजना है। 1971 के पाकिस्तानी सेना और उनके समर्थकों ने यहां रहने वाले एक सौ से

अधिक लोगों को मार डाला था। इतने सारे लोगों की हत्या करने के बाद बारूदी विस्फोट

और टैंक के सहारे इस मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।

उस घटना को आज भी शंकर लाल दास भूल नहीं पाये हैं। जब यह घटना घटी थी तब

उनकी उम्र महज 12 से 14 साल के बीच की थी। पाकिस्तानी हमलावरों की गोली से उनके

वायें हाथ का अंगूठा जख्म हुआ था। एक गोली पैर में लगी थी। इसी घायल हालत में

किसी तरह रात के अंधेरे में वह भाग निकले थे। उनके साथ भागने वाले सभी घायल थे,

खून से लथपथ थे। आज शंकर जी की उम्र 65 साल की है। उन्हें पता है कि उसी हमले में

उनके भाई की मौत हो गयी थी।

ढाका के रमना काली मंदिर के आस पास अनेक महत्वपूर्ण स्थान

इस मंदिर का दूसरा ऐतिहासिक महत्व यह भी है कि इसी मंदिर के बगल के रेसकोर्स

मैदान से बंगबंधु मुजीबुर्रहमान ने सात मार्च को आजादी का आह्वान कया था। आज यह

विश्व इतिहास का एक हिस्सा बनकर मौजूद है। यह दूसरे अर्थों में भी ऐतिहासिक है

क्योंकि इसी के बगल में 9 मार्च को पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण भी हुआ था। बाद

में यही बने मंच से मुजीबुर्रहमान और इंदिरा गांधी ने भी भाषण दिया था। भौगोलिक

लिहाज से इस प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर के बगल में ही ऑक्सफोर्ड ढाका विश्वविद्यालय,

पूर्व में उच्च न्यायालय, कर्जन हॉल और पश्चिम में शहीद मीनार और ढाका मेडिकल

कॉलेज है। मंदिर के ठीक उल्टी तरफ ज्ञानमंदिर बांग्ला एकाडेमी है। इन सभी प्रमुख

स्थलों के बीच अवस्थित है ढाका का रमना काली मंदिर।

इस मंदिर के अध्यक्ष उत्पल सरकार ने कहा कि इस मंदिर के फिर से बनाने के लिए भारत

सरकार से भी सात करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया है। इसी पैसे से मंदिर निर्माण का

कार्य तेज हुआ है। कोरोना की वजह से सब कुछ उथल पुथल होने के बाद फिर से गाड़ी

पटरी पर लौट रही ह । चार महीने तक काम बंद रहने के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि

दिसंबर माह तक मंदिर का काम पूरा हो जाएगा। उसके बाद परिस्थितियों का आकलन

कर आगे का फैसला लिया जाएगा। इस बीच सामान्य होते जनजीवन के बीच सिर्फ मंदिर

को स्थानीय भक्तों के लिए खोला गया है। लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी मंदिर की

वर्तमान कमेटी को लोगों को 1971 का वह हमला और निहत्थे लोगों की हत्या एवं

महिलाओं के साथ बलात्कार की सारी घटनाएं याद है।


 

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