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सावन के पहले दिन पहाड़ी मंदिर पहुंचे श्रद्धालु दरवाजे पर मत्था टेका

  • रात से ही सतर्क थी पुलिस

  • लोगों को भीड़ लगाने से रोका

  • मंदिरों में अस्थायी इंतजाम बाहर

संवाददाता

रांचीः सावन के पहले दिन कोरोना प्रतिबंध के बाद भी अनेक श्रद्धालु पहाड़ी मंदिर पहुंचे।

इनमें से अधिकांश ने मंदिर के दरवाजे पर ही माथा टेककर भगवान शिव की पूजा की।

कुछ लोगों ने प्रचलित विधि विधान के तहत मंदिर के दरवाजे पर ही जल अर्पित किया।

इसी किस्म की पूजा शहर के कई अन्य मंदिरों में भी अपनायी गयी। इन मंदिरों के बाहर

चारदीवारी पर ही जल ढालने के अस्थायी प्रबंध कर दिया गया था। सभी श्रद्धालुओं मंदिर

परिसर के बाहर लगे कलश में अपना जल अर्पण करते रहे।

पहाड़ी मंदिर में सावन के पहले दिन आम तौर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आया करते

हैं। इस बार मध्यरात्रि से ही पुलिस को इसके लिए सतर्क कर दिया गया था। आम तौर पर

प्रचलित परंपरा के तहत भोले बाबा के भक्त स्वर्ण रेखा नदी के जल लेने के बाद पैदल

चलते हुए सीधे पहाड़ी मंदिर आते हैं।

लेकिन इस बार पहले से काफी प्रचार होने की वजह से ऐसा नहीं हुआ। दरअसल मनाही के

बाद भी देवघर की सीमा पर कुछ श्रद्धालुओं के पहुंच जाने और रोके जाने पर पुलिस वालों

पर पथराव करने की घटना के बाद पुलिस सतर्क थी। आज सुबह से ही पहाड़ी मंदिर के

पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। वहां अलग अलग जत्थों में तैनात पुलिस वाले

वहां की स्थिति पर नजर रखने के अलावा लोगों को भीड़ लगाने से भी लगातार रोक रहे

थे। अपने अपने इंतजाम से दिन के उजाले में वहां पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर के बंद दरवाजे

के बाहर ही अपनी श्रद्धा अर्पित की। वैसे इस दौरान प्रवेश पर पाबंदी होने के बाद भी मंदिर

के मुख्य द्वार पर आकर्षक सज्जा की गयी थी।द्वार को भी फूलों से सजाया गया था।

सावन के पहले दिन अन्य मंदिरों में भी वैकल्पिक व्यवस्था

शहर के अन्य मंदिरों में भी आज ऐसी ही प्रथा जारी रही। अधिकांश मंदिरों में श्रद्धालुओँ

की पूजा के लिए मंदिर परिसर के बाहर ही इंतजाम किये गये थे। वहां पहुंचने वालों को इस

अस्थायी व्यवस्था की जानकारी देने के बाद ऐसे लोग वहीं अपनी पूजा संपन्न कर चले

गये। इस दौरान कहीं से जबरन मंदिर में प्रवेश करने जैसी किसी घटना की शिकायत भी

नहीं मिली है।


 

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