शनि ग्रह के बारे में वैज्ञानिकों को हर रोज मिल रही नई जानकारी

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  • शनि का एक दिन पृथ्वी से बहुत छोटा होता है

  • शुक्र ग्रह पर एक दिन सबसे बड़ा

  • कैसिनी यान के आंकड़ों से पता चला

  • गुरुत्वाकर्षण से बदलते हैं शनि के वलय भी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः शनि ग्रह के बारे में खगोल वैज्ञानिकों को हर रोज नई नई जानकारी मिल रही है।

पहले भेजे गये अंतरिक्ष यान और अभी उसके करीब से अध्ययन करने रहे

अंतरिक्ष न कैसिनी के आंकड़ों से वैज्ञानिक यह निष्कर्ष निकाल पा रहे हैं।

उसके घूमने की गति के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि

उसका एक दिन पृथ्वी के हिसाब से 10 घंटे 33 मिनट और 38 सेकंड में पूरा हो जाता है।

दूसरी तरफ वृहस्पति ग्रह के बारे में अनुमान लगाया गया है कि यहां का दिन शनि के मुकाबले कम और 9.8 घंटे का होता है।

दूसरी तरफ शुक्र ग्रह में यह दिन पृथ्वी के छह माह से भी अधिक समय का होता है।

वहां के एक दिन पृथ्वी के छह महीने से भी अधिक समय का और करीब 243 दिनों का होता है।

इस लिहाज से परिहास के तौर पर कहा जा सकता है कि हिंदू पौराणिक ग्रंथ रामायण का एक चर्चित पात्र कुंभकर्ण शायद शुक्र ग्रह का निवासी था।

ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि वह भी छह माह लगातार सोता था और एक दिन जागने के बाद फिर छह माह सो जाता था।

शनि के वलयों का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने माना है कि इन वलयों के माध्यम से ही

ग्रह के अंदर घटित होने वाली अनेक घटनाओं की जानकारी मिल जाती है।

शनि के बादल वैज्ञनिकों को अंदर झांकने नहीं देते

खगोल विज्ञान में पहले से ही शनि को एक गुप्त ग्रह के तौर पर आंका गया है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि उसके बारे में सहज ही जानकारी नहीं मिल पाती है।

अब कैसिनी नामक अंतरिक्ष यान के वहां पहुंचने के बाद उसके बारे में नई नई जानकारियां सामने आ रही हैं।

अब ग्रह के वलयों का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिक इस ग्रह के अंदर के चुंबकीय तरंगों और उसके अक्ष के प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं।

उसके अपने गुरुत्वाकर्षण की वजह से उनका प्रभाव बाहरी छोर पर बने उसके वलयों तक पहुंच रहा है।

शनि के आसमान पर फैले रंग बिरंगे बादल भी वैज्ञानिकों को उसके अंदर तक झांकने नहीं देते।

इसी वजह से अब वलयों में घटित होने वाली घटनाओं के माध्यम से इस ग्रह के  अंदर चल रही गतिविधियों का आकलन किया जा रहा है।

शनि के चक्कर काटने का प्रभाव वलयों पर बदलता रहता है।

इसी आधार पर वैज्ञानिकों को शनि के अंदर घटित होने वाली घटनाओं का आकलन करने में सुविधा हो रही है।

कैसिनी नामक यान ने शनि के दूसरे हिस्से जब उसका चित्र खींचा तो वैज्ञानिकों ने उसके वलयों के बारे में बेहतर जानकारी मिल पायी।

उनमें होने वाले बदलाव को देखकर ही वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि

उसके अंदर के गुरुत्वाकर्षण के बदलाव से उसके वलयों की स्थिति भी बदलती रहती है।

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शनि के वलयों की रचना उसके काफी बाद हुई है

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