रेगिस्तान हो सकते हैं हरे भरे वायु और सौर ऊर्जा से

रेगिस्तान हो सकते हैं हरे भरे वायु और सौर ऊर्जा से
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  • भारत के रेगिस्तान भी हो सकते हैं फिर से हरियाली युक्त

  • शोध के बाद निष्कर्ष हुए सार्वजनिक

  • बारिश की स्थिति सुधार देता है संयंत्र

  • सुनसान इलाके में बिजली उत्पादन भी संभव

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः रेगिस्तान में भीवायु और सौर ऊर्जा के इस्तमाल से  हरियाली लायी जा सकती है।



वैज्ञानिकों ने एक सफल प्रयोग के बाद अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान के बारे में यह जानकारी दी है।

इस शोध के आधार पर यह भी माना जा सकता है कि भारत के राजस्थान और गुजरात के

रेगिस्तानी इलाकों में भी इनका समान तरीके से उपयोग किया जा सकता है।

इनकी मदद से वहां बारिश लायी जा सकती है।

अमेरिका के इलोनियस विश्वविद्यालय के शोधकर्ता यान ली ने इस बारे में अपने शोध की जानकारी दी है।

उन्होंने कहा है कि पवन और सौर ऊर्जा के नियमित इस्तेमाल से बहुत बड़े इलाको में

मौसम में बदलाव किया जा सकता है।

यह खासतौर पर रेगिस्तानी इलाकों में बारिश के जरिए हरियाली लाने का बड़ा माध्यम बन सकता है।

साइंस जर्नल में प्रकाशित उनके आलेख में मुख्य तौर पर सहारा मरुभूमि में बारिश से

पर्यावरण बदलने की बात कही गयी है। लेकिन इस किस्म के रेगिस्तानी इलाके भारत में भी हैं।

लिहाजा भारत के रेगिस्तानी इलाकों में भी इस विधि के उपयोग से बारिश से मौसम बदला जा सकता है।

रेगिस्तानी इलाकों में लगातार बारिश की स्थिति बनी रहे तो वहां पौधे भी उग सकते है।

इस प्रक्रिया के निरंतर जारी रहने की स्थिति में इलाके में नये सिरे से हरियाली लायी जा सकती है।

रेगिस्तान में दिन रात काम करती है यह संयुक्त तकनीक

उनके शोध में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि रेगिस्तानी इलाकों में

अगर हरियाली बढ़ती है तो यह बारिश की स्थिति को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

उससे हरियाली के फैलने की गति और तेज होती चली जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका शोध मुख्य तौर पर अफ्रीका की सहारा मरुभूमि को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी मरुभूमि है और वहां की तमाम परिस्थितियों का प्रभाव दूसरे महाद्वीपों तक पहुंचता है।

रेगिस्तान होने की वजह से यहां जीवन भी बहुत कम है।

अन्य इलाकों में आबादी बढ़ने और अन्य औद्योगिक जरूरतों की वजह से जगह की कमी हो रही है।

दूसरी तरफ ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में सहारा मरुभूमि का उपयोग इस पवन और सौर ऊर्जा तकनीक के लिए किया जा सकता है।

इससे वहां का मौसम बदलेगी और ऊर्जा की अतिरिक्त जरूरतों को भी पूरा किया जा सकेगा।

वहां के नब्बे लाख वर्ग किलोमीटर में फैले रेगिस्तान में अगर सही तरीके से पवन और सौर ऊर्जा के संयंत्र स्थापित किये जाएं तो इससे 82 टेरावाट बिजली पैदा की जा सकती है।

रेगिस्तान की बिजली का उपयोग अन्यत्र किया जा सकता है

इस बिजली का उपयोग अतिरिक्त बिजली की मांग को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।

पवन चक्की के प्रयोग के बारे में उन्होंने बताया है कि इससे हवा के ऊपरी हिस्से में मौजूद गर्म हवा को नीचे खींचने का क्रम लगातार चलता रहता है।

इससे मौसम भी क्रमवार तरीक से ठंढा होने की दिशा में बढ़ने लगता है।

रेगिस्तान में रात का तापमान चूंकि बदल जाता है तब भी गर्म और ठंडी हवा का मिश्रण मौसम के सुधार में मदद करता है।

इस प्रक्रिया के लगातार चालू रहने से वहां बारिश की स्थिति भी बेहतर होती जाती है।

एक बार हरियाली फैलने की प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद यह हरियाली भी बारिश की स्थिति को और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

शोध दल ने अपने अनुसंधान के क्रम में यह पाया है कि पड़ोस के इलाके साहेर में इस विधि के बाद बारिश की स्थिति में प्रतिदिन 1।12 मिलीमीटर का सुधार हुआ।

इन इलाकों में पवन चक्कियां लगातार काम कर रही थी।

शोध के दूसरे हिस्से में सौर ऊर्जा के बारे में वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह हवा के मिश्रण में कोई भूमिका नहीं निभाता।

लेकिन मौसम से गर्मी खींचकर उसे ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया में सौर ऊर्जा संयंत्र भी बारिश बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।

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