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डेनमैन ग्लेशियर अब गहरी खाई में डूबने लगा है

  • अंटार्कटिका का अन्यतम विशाल ग्लेशियर है

  • गहरी खाई की तरफ से तेजी से खिसकता हुआ

  • पिघल गया तो समुद्री जलस्तर डेढ़ मीटर बढ़ेगा

  • पृथ्वी के पर्यावरण में अजीब बदलाव नजर आने लगे

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः डेनमैन ग्लेशियर डूबने की गति अब तेज हो गयी है। अंटार्कटिका का यह

विशाल ग्लेशियर काफी समय से ही पिघल रहा था। अब उसके पिघलने की गति काफी

तेज होने बाद यह देखा गया है कि वह गहरी खाई के अंदर धीरे धीरे डूबता जा रहा है।

जाहिर है कि इसके अचानक पूरी तरह समुद्र में डूब जाते ही कई किस्म की परेशानियां पैदा

होंगी। वैज्ञानिकों ने इस निष्कर्ष के बारे में अपनी रिपोर्ट जारी करने के लिए वहां के पिछले

बीस वर्षों का आंकड़ा देखा-परखा है। डेनमैन ग्लेशियर आकारम करीब 12 मील चौड़ा है।

यह पूर्वी अंटार्कटिका के क्षेत्र में स्थित है। वर्ष 1996 से लेकर वर्ष 2018 तक के आंकड़े यह

दर्शा रहे हैं कि यह ग्लेशियर अपने मूल भूखंड से करीब तीन मील दूर हट गया है। अभी यह

ग्लेशियर जहां है, उसके नीचे समुद्र में एक बहुत गहरी खाई है। कुछ वैज्ञानिक मानते हैं

कि इसी गहरी खाई की वजह से भी ग्लेशियर के बर्फ के पिघलने की गति तेज होती चली

जा रही है क्योंकि वहां पानी का प्रवाह अपेक्षाकृत तेज है। इस तेजी की वजह से यह

आशंका बन रही है कि अब शायद इस ग्लेशियर का सकुशल बच पाना संभव नहीं होगा।

दरअसल ग्लेशियर की समुद्र के अंदर की गहाई तक फैले बर्फ के पिघलने से वह अंदर से

खोखला होता जा रहा है। किसी भी क्षण अचानक पूरी तरह इसके उलट जाने की स्थिति में

एक विशाल सूनामी जैसी परिस्थिति पैदा होगी।

डेनमैन ग्लेशियर की निगरानी का काम सैटेलाइटों से भी

लगातार इस ग्लेशियर की निगरानी करने वाले इस काम के लिए सैटेलाइटों के साथ साथ

अत्याधुनिक उपकरणों का भी सहारा ले रहे हैं। इनकी मदद से यह देखा जा सका है कि इस

ग्लेशियर के पश्चिमी छोर पर गहरी खाई है। वैज्ञानिक उपकरणों के आकलन के मुताबिक

यह खाई करीब साढ़े तीन किलोमीटर गहरी है। इसी खाई की तरफ यह ग्लेशियर

खिसकता जा रहा है। सबसे अधिक गहराई वाले इलाके में इसके पहुंचने के बाद इसके

उलट जाने की पूरी आशंका है। ऐसी आशंका इसलिए है क्योंकि यह ग्लेशियर अंदर से

खोखला है। समुद्र में पूरी तरह समा जाने के बाद उस ग्लेशियर का हल्का वाला हिस्सा

ऊपर की तरफ और भारी वाला हिस्सा समुद्र की तरफ चला जाएगा। वैसी स्थिति में ही

सूनामी जैसे हालात पैदा होंगे। दरअसल कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि इस खाई वाले इलाके

में बर्फ का विशाल पहाड़ अगर अचानक उलट जाता है तो इससे भी समुद्र में एक बड़ी

हलचल जैसी स्थिति बनेगी। ग्लेशियर के आकार और उसमें मौजूद बर्फ का आकलन

करने वाले मानते हैं कि इससे समुद्र में जल का स्तर औसतन डेढ़ मीटर तक बढ़ सकता

है। इससे भी पूरी दुनिया में समुद्री बाढ़ जैसी स्थिति बनेगी और अनेक इलाके अचानक ही

समुद्र के अंदर समा जाएंगे। समुद्र के अंदर का हाल देख रहे वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया

है कि यह समुद्र के अंदर की स्थिति ही कुछ ऐसी है कि इस ढलाने में चले जाने के बाद इस

ग्लेशियर का फिर से बन पाना शायद संभव नहीं होगा। मूल भूखंड से पूरी तरह अलग हो

जाने के बाद यह पूरा का पूरा गल जाएगा।

नासा मानती है कि अकेले ग्लेशियर समुद्र में बहुत बदलाव करेगा

नासा के जेट प्रोपल्सन लैब के शोध वैज्ञानिक वर्जिनिया ब्रानकाटो कहते हैं कि यह अकेला

ग्लेशियर ही समुद्र में बहुत बड़ी तब्दीली लाने के लिए पर्याप्त है। साथ ही इस हलचल से

अन्य ग्लेशियों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा क्योंकि समुद्र जलके भीतर उत्पन्न होने वाली

लहरें ऐसी ग्लेशियरों को अंदर से झकझोर देंगी। डेनमैन ग्लेशियर की तरह अनेक ऐसे

ग्लेशियर हैं जो मूल भूखंड से टूटे हुए हैं लेकिन आकार में बहुत विशाल होने की वजह से

वह लगभग स्थिर अवस्था में हैं लेकिन तेजी से पिघल रहे हैं। एक डेनमैन ग्लेशियर की

पूरी तरह उलटने के दौरान समुद्र में जो लहरें पैदा होंगी, उनका असर अन्य ग्लेशियरों पर

भी पड़ेगा। हो सकता है कि कुछ ऐसे ग्लेशियर इसी झटके से टूटकर कई हिस्सों में बिखर

जाएं। टूट जाने के बाद उनके भी पिघलने की गति तेज हो जाएगी।

इस बारे में जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि पिछले 22 वर्षों में यह

डेनमैन ग्लेशियर कैसे कैसे खिसका और पिघला है। इन्हीं आंकड़ों का निष्कर्ष है कि इस

अवधि में इस ग्लेशियर से करीब 268 बिलियन बर्फ गल चुका है। यह एक तरफ से

पिघलने की वजह से ही उसकी भरपायी भी नहीं हो पा रही है। जैसे जैसे यह खाई में

खिसक रहा है उसका अधिक हिस्सा गलने के प्रभाव में आता जा रहा है यानी अधिक बर्फ

पिघलना प्रारंभ हो रहा है। इसकी परिणति अंततः इस ग्लेशियर के पूरी तरह उलट जाने में

ही होगी। जो पूरी दुनिया के लिए नये खतरे पैदा करेगा।


 

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