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दिल्ली के मोर्चे पर पहली बार अस्थायी युद्धविराम जैसे बन रहे हैं आसार

  • सरकारी प्रस्ताव को विचार के लिए स्वीकारा किसानों ने

  • आपसी चर्चा के साथ साथ परेड की तैयारियां

  • किसान नेता अब दिल्ली पुलिस से मिलेंगे

  • एक हजार ट्रैक्टर दिल्ली के बाहर आयेंगे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली के मोर्चे पर पिछले साठ दिनों से जारी वैचारिक युद्ध पर विराम लगने के

आसार नजर आने लगे हैं। पहली बार केंद्र सरकार की तरफ से जो प्रस्ताव दिया गया है,

उसे किसान संगठनों ने तुरंत ही नामंजूर नहीं किया है। किसान संगठनों ने इस प्रस्ताव

पर आपस में चर्चा कर लेने के बाद अपनी राय देने की बात कही है। इस सरकारी प्रस्ताव

में तीनों कृषि कानूनों को अगले डेढ़ वर्षों तक स्थगित रखने की बात कही गयी है। वैसे

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पहले

ही इन कानूनों को अंतिम आदेश जारी होने तक स्थगित कर दिया है। सरकार अपने इस

प्रस्ताव की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को भी देने वाली है। दसवें दौर की बैठक में बुधवार को

देर शाम तक बात चीत हुई। इस प्रस्ताव को दिये जाने के बाद किसान संगठनों से सरकार

से कहा कि इस नये प्रस्ताव पर वे आपस में चर्चा के बाद ही कोई फैसला लेंगे। इसके पूर्व

हर बार सरकार की तरफ से जो प्रस्ताव दिये गये थे, उन्हें बैठक में भी किसान संगठनों ने

खारिज कर दिया था। किसान दिल्ली की सीमा पर करीब दो महीने से आंदोलन कर रहे हैं

और उनकी मांग है कि इन तीनों किसान विरोधी कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार से

विचार विमर्श के लिए समय लेने के बाद भी कई संगठनों के नेता यह मान रहे हैं कि जैसे

जैसे 26 जनवरी के ट्रैक्टर परेड की तिथि करीब आ रही है, सरकार के हाथ पांव फूल रहे हैं।

सरकार को भी अपने माध्यम से यह पता चल रहा है कि कितनी अधिक संख्या में किसान

इस ट्रैक्टर परेड में भाग लेने के लिए पहुंच रहे हैं।

दिल्ली के मोर्चे पर बैठक के बाद किसानों का विचार विमर्श

कल की बैठक के बाद किसान नेता बलकिशन सिंह ब्रार ने आज कहा कि सरकार की तरफ

से दसवें दौर की वार्ता में यह कहा गया है कि सरकार एक विशेष कमेटी का गठन कर सभी

मांगों पर विचार के लिए सहमत है। इस विशेष कमेटी के साथ बात चीत होकर किसी

निष्कर्ष पर पहुंचने के पूर्व तीनों कृषि कानूनों पर अगले डेढ़ वर्षों तक के लिए रोक लगा दी

जाएगी। वैसे इन कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पहले से ही कमसे कम दो महीने

का स्थगन पहले से ही लगा हुआ है। इस बीच किसान नेताओं ने आज स्पष्ट किया है कि

वे 26 जनवरी की अपनी प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड के लिए दिल्ली पुलिस से मिलने वाले हैं।

किसानों का अनुमान है कि कमसे कम एक हजार ट्रैक्टर इस रैली में भाग लेने वाले हैं। वे

दिल्ली के चारों तरफ बाहरी इलाके में यह परेड करेंगे और परेड में भाग लेने के बाद अपने

अपने इलाके तक लौट जाएंगे। कई अन्य राज्यों के किसान भी इसमें भाग लेने के लिए

अपने अपने राज्यों से निकल चुके हैं।

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