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कैलिफोर्निया के समुद्री तट पर एंगेलर मछली का शव देखकर वैज्ञानिक हैरान

  • सर पर रोशनी लेकर गहरे पानी में शिकार करती है

  • समुद्र की गहराई से शव तट पर कैसे पहुंचा बड़ा सवाल

  • बहुत तेज और पैने दांत होते हैं इस प्रजाति की मछली के

  • उसके जीवन चक्र की गुत्थी भी अब तक नहीं सुलझी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः कैलिफोर्निया के समुद्री तट पर एंगेलर मछली का पूरा शव देखकर वैज्ञानिक हैरान

हुए हैं। अब तक इसके कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन जांच जारी है। वैसे तो

एंगेलर मछली की करीब दो सौ प्रजातियां समुद्र में पायी जाती हैं। जो मछली समुद्री तट

पर मिली है, उसे पैसेफिक फुटबॉल फिश के तौर पर माना गया है। लेकिन गहरे पानी में

रहने वाली मछलियों के शव भी आम तौर पर ऊपर नहीं आते हैं। इसलिए यह मछली पूरी

अवस्था में कैलिफोर्निया के समुद्री तट पर कैसे आयी, यही जांच का विषय है। आम तौर

पर यह मछली इंसानों को बहुत कम नजर आयी है। समुद्र में करीब एक किलोमीटर की

गहराई में रहने वाली इस मछली की विशेषता यह है कि इस गहराई में शिकार करने के

लिए वह अपने सर के ऊपर बने एक बल्ब जैसी ग्रंथी में रोशनी पैदा करती है। इस रोशनी

की तरफ आकर्षित होकर आने वाली छोटी मछलियां उसका शिकार बनती है। इसे भी

समुद्र का एक रहस्यमय प्राणी ही माना जाता है क्योंकि वह आम तौर पर समुद्र की

गहराई में जाने वाले शोध दलों की नजरों से भी छिप जाता है। बहुत कम अवसरों पर

उसके चित्र अथवा वीडियो लिये जा सके हैं। इस गहराई में रहने वाली इस मछली

कैलिफोर्निया के समुद्री तट पर वहां के मछुआरे बेन एसटेस की नजरों में आयी थी। वहां के

ऑरेंज काउंटी में क्रिस्टल कोव स्टेट पार्क के फेसबुक पेज पर इसकी रिपोर्ट दी गयी है।

पहली बार सबूत अवस्था में पायी गयी इस मछली का गहराई से अध्ययन भी किया गया

है ताकि उसके बारे में और जानकारी हासिल की जा सके।

कैलिफोर्निया के समुद्री तट समुद्री जीवन के लिए संरक्षित हैं

जांचने वालों ने यह पाया है कि इस मछली के मुंह में अनेक बहुत तेज दांत हैं। यह शिकार

करने वाले दांत ही हैं। उसके सर पर एक लटकी हुई ग्रंथी है। यह ग्रंथी ही अंधेरे में रोशनी

पैदा कर अपने शिकार को ललचाती है। रोशनी की तरफ आने वाली मछलियों को इस ग्रंथी

के नीचे छिपा शिकारी नहीं दिख पाता क्योंकि वह ठीक रोशनी के नीचे होता है। पूर्व में हुए

शोध के आधार पर यह पाया गया है कि मादा एंगेलर मछली आकार में दो फीट और नर

फुटबॉल फिश मात्र एक इंच लंबा होता है। इस बारे में कई किस्म के शोध चल रहे हैं जिसमें

यह बताया गया है कि वंश वृद्धि के लिए नर अपनी मादा के शरीर में अपनी दांत गड़ाकर

चिपक जाता है। इस प्रक्रिया में वह अंततः मादा के शरीर का ही एक हिस्सा बनकर रह

जाता है। समुद्र वैज्ञानिकों ने इस इलाके को भी काफी पहले से समुद्री जीवों के लिए

अभयारण्य जैसे घोषित कर रखा है। इसकी खास वजह समुद्र की गहराइयों में मौजूद

अलग अलग जीवों को संरक्षण प्रदान करने के साथ साथ उनके बारे में अधिक जानकारी

हासिल करना भी है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में समुद्री में 12 ऐसी नई प्रजातियों की भी

खोज हुई है, जिनके बारे में वैज्ञानिक रिकार्ड में पहले से कुछ दर्ज नहीं था। इसलिए यह भी

अनुमान व्यक्त किया गया है कि समुद्र की गहराइयों में अभी और भी अनजाना जीवन हो

सकता है क्योंकि पृथ्वी के सभी समुद्रों के अधिकांश हिस्सों के बारे में पूरी जानकारी भी

नहीं है। वैसे अभी पूरे समुद्री इलाकों का थ्री डी मैप बनाने का एक अभियान चल रहा है।

इससे सिर्फ समुद्री की गहराइयों में कहां कैसी स्थिति है, उसके बारे में जानकारी मिलेगी।

मछली की लाश मिलने से समुद्री हालत पर चिंता बढ़ी

कैलिफोर्निया के समुद्री तट पर मिली इस मछली ने वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए बढ़ा दी है

क्योंकि बार बार ऐसा देखा जा रहा है कि समुद्री जल का तापमान औसत से ऊपर जा रहा

है। प्लास्टिक और अन्य प्रदूषणों की वजह से कोरल भी समाप्त हो रहे हैं, जिसकी वजह से

अनेक प्रजातियों की मछलियों के जीवन पर भी आफत है। इसलिए यह एंगेलर मछली

किन कारणो से इस हालत में तट तक आयी इसे समझने की कोशिश हो रही है। वैसे इस

मामले और मछली को लॉस एंजिल्स के नेचुरल हिस्ट्री म्युजियम में भी भेजा जा सकता

है। ताकि इस पर विशेषज्ञ और शोध कर सकें। वर्तमान में इस मछली को कैलिफोर्निया के

मछली और वन्य प्राणी जीवन विभाग ने अपने पास सुरक्षित रखा है।

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