मुख्य प्रशिक्षक हरेंद्र सिंह को हटाने के फैसले के कई पूर्व खिलाड़ियों ने किया विरोध

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नईदिल्लीः मुख्य प्रशिक्षक पद से हरेंन्द्र सिंह को हटाए जाने पर बवाल खड़ा हो गया है।

पूर्व दिग्गज खिलाड़ियों ने सिंह के समर्थन में अपनी बात रखते हुए हॉकी इंडिया को लताड़ लगाई है।

इन पूर्व खिलाड़ियों ने अपने समय में भारत के लिए हॉकी खेलते हुए शानदार रिकार्ड बनाये हैं।

इस लिहाज से हॉकी के बारे में उनकी बातों को अब भी गंभीरता से लिया जाता है।

1977 हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम के हीरो रहे अशोक कुमार सिंह ने कहा कि

‘हरेन्द्र सिंह को भारत की सीनियर पुरुष हॉकी टीम के चीफ कोच के पद से हटाने का हॉकी इंडिया का फैसला एकदम गलत है।

उन्हें इस पद से हटाकर भारत के लड़कों की जूनियर टीम को संभालने का समझ से एकदम परे है।

किसी भी कोच को टीम को अपने मुताबिक ढालने के लिए वक्त दिया जाना चाहिए।’

तीन बार ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले परगट सिंह ने कहा है कि

‘भारत में हॉकी का न तो खिलाड़ियों के लिए कोई स्ट्रक्चर है न ही कोचों का।

हरेन्द्र सिंह को चीफ कोच के पद से हटाकर हॉकी इंडिया ने कुछ नया नहीं किया है।

भारतीय हॉकी में कोचों को बदलने का इसी तरह का लंबा इतिहास रहा है।

भारत की मौजूदा हॉकी टीम के कोर ग्रुप में आप 35-36 खिलाड़ियों को लें तो उनमें से करीब दो दर्जन पंजाब से है।

मुख्य प्रशिक्षक को जूनियर टीम में भेजने का कोई औचित्य नहीं

भारत में जब हॉकी के लिए सही ढंग का कोई स्ट्रक्चर नहीं होगा

तो फिर किसी भी बड़े टूर्नामेंट में अच्छे टूर्नामेंट की उम्मीद करना ही बेमानी है।

पहले जो रवैया सुरेश कलमाडी का था आज वही रवैया नरिंदर बत्रा का है।

जब ऐसा रवैया रहेगा तो फिर भारत की हॉकी में मौजूदा सूरते हाल में बेहतरी की आस बेमानी है।

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोल रक्षक आशीष बलाल ने कहा है कि

‘हरेन्द्र सिंह को भारत के चीफ हॉकी कोच के हटाने का फैसला उनके साथ एकदम नाइंसाफी है।

किसी भी कोच को अपने मुताबिक टीम को तैयार करने के लिए कम से दो-तीन बरस दिए ही जाने चाहिए।

किसी भी कोच को टीम को समझने और टीम को कोच को समझने में कई बरस लग जाते हैं।

हरेन्द्र लड़कों के साथ शिद्दत से जुड़े थे और उनके मार्गदर्शन में भारत की नौजवानों से सज्जित सीनियर हॉकी टीम बराबर बेहतर प्रदर्शन कर रही थी।

हॉकी इंडिया दरअसल करीब एक दशक से विदेशी कोच को आजमा रही है।

विदेशी कोच के मार्गदर्शन में भारत की सीनियर हॉकी टीम के प्रदर्शन पर हॉकी इंडिया को गौर करना चाहिए।

हरेन्द्र को चीफ कोच के पद पर मात्र आठ महीने रहने के बाद हटाने के पीछे तर्क केवल हॉकी इंडिया ही बता सकती है।’

पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और भारतीय टीम के कोच रहे जोआकिम कारवाल्हो ने कहा कि

‘मैं बराबर यह कहता रहा हूं कि किसी भी हॉकी कोच के मार्गदर्शन में अच्छे नतीजों के लिए उसे पूरा वक्त दिया जाना चाहिए।

मैं बराबर भारतीय टीम के हॉकी कोच को बदलने के खिलाफ हूं। हॉकी इंडिया को यह समझना चाहिए कि

कोच को बदलने से हॉकी टीम की तस्वीर नहीं बदलेगी।

हरेन्द्र के मार्गदर्शन में भारत की नौजवान सीनियर टीम बराबर बेहतर हो रही थी।

हरेन्द्र को टीम के साथ और वक्त मिलता तो जरूर भारतीय टीम आगे बेहतर प्रदर्शन करती।

सबसे हास्यास्पद है हॉकी इंडिया की समिति की हरेन्द्र को सीनियर हॉकी के चीफ कोच पद से हटा कर

जूनियर हॉकी टीम को कोचिंग संभालने की सलाह है।

इससे भी बड़ा सवाल है यदि हरेन्द्र को भारत की जूनियर हॉकी टीम का कोच बनाया जाता है

तो फिर जूनियर हॉकी टीम के मौजूदा कोच जूड फेलिक्स कहां जाएंगे?’

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