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जानलेवा तूफान हमेशा मंडरा रहा है शुक्र ग्रह के बाहरी इलाके में

  • विशाल बादलों की गति तीन सौ किलोमीटर

  •  पहली बार जापान के अंतरिक्ष यान ने देखा था

  •  बादलों में पानी नहीं बल्कि एसिड होने का अंदेशा

  •  पांच दिन में पूरा परिक्रमा कर लेते हैं यह बादल

 

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जानलेवा तूफान की वजह से शुक्र ग्रह के अंदर जाना वर्तमान विज्ञान के लिए

संभव नहीं है। अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह के बाहरी स्थितियों का

अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। यह पाया गया है कि इस ग्रह के बाहरी

इलाके में बादलों का विशाल समूह है। बादलों का यह समूह वहां लगातार तूफान की गति

से मंडरा रहा है। सामान्य आकलन के मुताबिक इस तूफान की गति तीन सौ किलोमीटर

प्रति घंटे की है। इससे पार कर शुक्र के अंदर तक जाना वर्तमान तकनीक में संभव नहीं है।

लेकिन खगोल वैज्ञानिक इस चुनौती का भी सामना करने की तैयारियों में जुटे हैं। भारतीय

ज्योतिष गणना में भी इस ग्रह का काफी महत्व है। लेकिन अब तक इस ग्रह के बाहरी

आवरण के बारे में यह जानकारी नहीं मिल पायी थी। वहां का निरंतर अध्ययन चल रहा

था। पहले के शोध में सिर्फ वहां बादल होने भर की पुष्टि हुई थी। अब पहली बार वहां काफी

अधिक बादल होने तथा इस बादल के तूफान जैसी गति से लगातार मंडराने की जानकारी

सामने आयी है।

जानलेवा तूफान इसलिए क्योंकि गति बहुत तेज

जानलेवा तूफान के वहां होने के बारे में एक वैज्ञानिक शोध प्रबंध में जानकारी दी गयी है।

पिछले तीन दशकों के निरंतर शोध का यह नतीजा अब सामने आया है। वैज्ञानिकों ने यह

भी पाया है कि यह पृथ्वी के जैसा सामान्य बादल नहीं है बल्कि वहां के बादलों में एसिड की

प्रचुर मात्रा है। इसकी खोज बीन करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया है कि शुक्र ग्रह के ऊपर

करीब साढ़े सात हजार किलोमीटर तक यह बादल फैला हुआ है। इसकी गहराई करीब

पचास किलोमीटर है। इसलिए समझा जा सकता है कि एसिड से भरे इस विशाल और

अत्यंत तेज गति से मंडराते बादल के बीच जाने का क्या हश्र हो सकता है।

सामान्य बादल नहीं है बल्कि एसिड भरे बादल हैं

जापान के अकातुशी अंतरिक्ष यान से पहली बार वर्ष 2015 में इसके संकेत मिले थे। इस

यान ने शुक्र ग्रह के ऊपर मंडराते माहौल की जानकारी भेजी थी। विभिन्न वेधशालाओं में

बाद में जापान के अंतरिक्ष यान की सूचनाओं के आधार पर और शोध किया जाता रहा ह ।

कनारी द्वीप पर स्थापित गैलेलियो टेलीस्खोप और नासा द्वारा हवाई द्वीप पर स्थापित

इंफ्रा रेड टेलीस्कोप से भी इन तथ्यों की जांच परख की गयी। इस बादल की पुष्टि होने के

बाद पहली बार औपचारिक तौर पर इस बात का एलान किया गया कि वर्ष 1983 से

लगातार चल रहे शोध में पहली बार इतनी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी है। इस शोध

से जुड़े पुर्तगाल के इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स एंड स्पेस साइंस के वैज्ञानिक पेड्रो

माचादो ने कहा कि अब तक जो आंकड़े एकत्रित किये गये हैं, उनके विश्लेषण से और भी

कुछ नया जानने को मिल सकता है। अभी सिर्फ यह पता चल पाया है कि बादलों की एक

मजबूत दीवार ने पूरे ग्रह को घेर रखा है और यह बादल पांच दिनों में पूरे ग्रह की परिक्रमा

कर लेते हैं। इससे उनकी तेज गति और जानलेवा तूफान के होने का अंदेशा हो जाता है।

वर्तमान वैज्ञानिक उपकरण इसके करीब नहीं जा सकते

वैसे इस बादल के होने तथा उसके इतनी तेज गति से घूमने के कारणों के बारे में वैज्ञानिक

अभी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं है। हो सकता है कि शुक्र ग्रह के अपने गुरुत्वाकर्षण

बल की वजह से नीचे से ऊपर उठते हुए गर्म हवा के झोंके ही इन बादलों को गति प्रदान

करते रहते हैं। जापान के वैज्ञानिक जेवियर पेराल्टा ने कहा कि ग्रह के अंदर से ही कोई

ऊर्जा ऐसी है जो बादलों को ऊपर की तरफ धकेलने के क्रम में यह गति प्रदान कर रही है।

जिससे यह जानलेवा तूफान जैसी स्थिति पैदा होती है लेकिन इस पर अभी और शोध

करने की आवश्यकता है।


 

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