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रात के अंधेरे में भी लॉकडाउन के हर पहलु पर पुलिस की नजर

  • कई इलाकों में चुपचाप लिया गया जायजा

  • लगातार कडी परिश्रम के बाद भी चौकस है पुलिस

  • रामगढ़ से झरिया तक सड़कों पर निगरानी जारी

  • भागलपुर में असहाय महिला और भूखा बच्चा बेबस

रांचीः रात के अंधेरे में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान विधि व्यवस्था कितनी मजबूत

और कितनी ढीली रहती है, इसे जांचते रहने का एक अभियान राष्ट्रीय खबर प्रारंभ कर

रहा है। दरअसल लगातार कठिन डियूटी करने के बाद यह बड़ी स्वाभाविक बात है कि

इस काम में लगे लोगों की कार्यकुशलता कम हो जाती है। सामान्य स्थिति के विधि

व्यवस्था बहाल करने के अवसरों पर ऐसा अक्सर देखा गया है। इसी वजह से रात के

अंधेरे में यह जायजा लेने का काम जारी किया गया था।

वीडियो में देखिये झरिया, रामगढ़ और भागलपुर का हाल

बिना पूर्व तैयारी के अचानक हुई इस कोशिश में कई खामियां अवश्य रही। लेकिन

इससे यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रीय संकट की स्थिति में हमारी सारी सरकारी

एजेंसियों की कार्यकुशलता बिल्कुल दूसरे ही स्तर की बन जाती है। जिन्हें आम तौर पर

ढीला समझा जाता है, वे भी राष्ट्र के प्रति अधिक जिम्मेदार और समाज के प्रति अधिक

समर्पित नजर आने लगते हैं। इस किस्म की जिम्मेदारी निभाना कोई उनकी डियूटी

का हिस्सा नहीं है। इसके बाद भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने वाले अनेक

लोग खाकी वर्दी में अचानक ही नजर आ जाते हैं। अच्छी स्थिति यह है कि इस किस्म

की सामाजिक जिम्मेदारी निभाने वाले खुद को पर्दे के पीछे रखना ज्यादा पसंद करते

हैं।

रात के अंधेरे में व्यवस्था पर है कड़ी नजर

रात के अंधेरे में लगातार काम करने के बाद आम तौर पर हरेक के लिए थोड़ी सुस्त पड़

जाना सामान्य बात है। लेकिन आज के सर्वेक्षण का नतीजा है कि जिनके कंधों पर

फिलहाल यह गंभीर जिम्मेदारी है वे थके होने के बाद भी बिल्कुल भी असतर्क नहीं है।

अपने इलाके की हर छोटी बड़ी घटनाओं पर उनकी पैनी नजर बनी हुई है।

सुनसान सन्नाटे के चीरकर जाते वाहनों में आम जरूरतों के सामानों का जाना और

उसके बीच विधि व्यवस्था बहाल रहे, इसकी सतत निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी

है। लेकिन भागलपुर में रात के अंधेरे में असहाय बैठे गरीब लोगो के बीच जाकर भोजन

बांटना अपने आप में इंसानियत की बहुत बड़ी मिशाल है। आज के रात के अंधेरे में यह

समाज के उजाले की नई मिशाल है।

अब इससे उलट आपात कार्यों के लिए छूट पाये कुछ की कारगुजारियों की भी चर्चा कर

लें। अनेक इलाकों में एंबुलेंसों को अब काफी अधिक किराया पर यात्री ढोते देखा गया।

इसी तरह अखबार का बंडल ले जाने के लिए अनुमति पाने वाले वाहन भी यात्रियों को

अधिक कीमत पर अपने ठिकाने तक पहुंचाने का ठेका लेते पाये गये। इस किस्म का

सर्वेक्षण आगे भी जारी रहेगा।


 

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