Press "Enter" to skip to content

दलाही बुला-बुला गर्म-ठंडा कुंड को पर्यटन स्थल बनाने की मांग




  • अद्भुत एतिहासिक महत्व, साक्षात शिव गंगा का शुद्धिकरण

  • सादे बकरे और सादे मुर्गे की बलि देने की प्रथा

  • यहां पर स्नान करने से बीमारियों में लाभ

जैनामोड़: दलाही बुला-बुला गर्म-ठंडा कुंड जरीडीह प्रख़ंड अंतर्गत आरालडीह प़ंचायत के जगासूर (गझंडीह) में सदियों पुरानी दंत कथाओं पर आधारित है। इसे लेकर कई कथाएं भी प्रचलित हैं। प्रतिवर्ष 14 जनवरी को लोगो की मान्यताएं पूरी होने पर भारी संख्या में आते हैं।




स्नान, पू्जा-अर्चना करने के साथ ही इच्छा अनुसार मान्यता मांगते हैं। उनकी इच्छा पूरी होने पर इस्ट देवता को सादे बकरे, मूर्गे की बलि देकर प्रसन्न करने का काम करते हैं। झारखंड प्रदेश के सभी प्रखंडों में रहने वाले श्रद्धालु यहां आते हैं। यह क्षेत्र तीनों ओर से छोटे-छोटे पहाड़ी से घिरा हुआ है।

आदिकाल की मान्यता के अनुसार ऋषि-मुनियों का बड़ी काफिला घनघोर पहाड़ी से होकर गुजर रहा था। उसी काफिला के साथ वैधराज धनवंतरी भी थे। अचानक सभी शामिल ऋषियों के शरीर में खुजली होने के कारण बैचौनी होने से छटपटाने लगे। वैद्यराज ने बहता हुआ जलधारा में जंगल के जड़ी-बूटियों को मसलकर डाल दिया।

कुछ ही देर में सभी ऋषियों ने जलधारा में कुद-कुद कर बैचौनी के कारण नहाना आरंभ कर दिया। उनकी खुजली होने की बैचौनी से राहत मिल गई। इसके बाद से उक्त स्थल का महत्त्व बढ़ गया। इसके कुछ ही दूरी पर जगासूर और गझंडीह गांव स्थित है।




दलाही बुला-बुला गर्म-ठंडा कुंड के पास हर साल मेला होता है

बताया जाता है कि गांव के सार्वजनिक समिति के सदस्य के माध्यम से मेला का आयोजन किया जाता है। जिसमें गोपाल रजवार, किशून साव, मथूरा ठाकुर, मुरलीधर साव, पाहन फूंची मांझी, दुबराज कपरदार, किशोर साव, श्रीपद साव, धीरेंद्र नाथ कपरदार, रत्न साव, डाक्टर शंकर प्रसाद महतो, कुलदीप ठाकुर आदि सहयोग करने का काम करते हैं।

इस कुंड के संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि निरंतर बहने वाली जलधारा ठंडे के दिन में गर्म और गर्मी के मौसम में ठंडा रहता है। इसके प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कुंड में स्नान करने से खाज-खुजली, चर्म रोग, हृदयाघात, कफ-वात की बीमारी अच्छा होता है।

समिति के लोगों ने उक्त स्थल को पर्यटन स्थल बनाने के साथ-साथ गझंडीह बजरंगबली मंदिर मंदिर चौक से दलाही कुंड तक पक्की और पीसीसी पथ बनाने जल संरक्षण के लिए बड़ी जलमीनार लगाने की मांग उपायुक्त बोकारो और पर्यटन विभाग से की।



More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यटन और यात्राMore posts in पर्यटन और यात्रा »

Be First to Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: