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सर्वोच्च न्यायालय ने साइरस मिस्त्री के बहाली पर रोक लगायी

रासबिहारी

नईदिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय ने साइरस मिस्त्री को टाटा समूह में

फिर से कार्यकारी चेयरमैन बनाने के आदेश पर रोक लगा दी है।

साइरस मिस्त्री के पक्ष में नेशनल कंपनी लॉ बोर्ड अपीलेट ट्रिब्यूनल

(एनसीएलएटी) ने यह फैसला सुनाया था। इस फैसले को कंपनी के

साथ साथ रतन टाटा ने भी व्यक्तिगत तौर पर चुनौती दी थी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोवडे और न्यायमूर्ति बीआर गवई

एवं सूर्यकांत की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई के बाद अगली

सुनवाई अथवा आदेश तक के लिए साइरस मिस्त्री के पक्ष में दिये गये

आदेश पर रोक लगा दी है। साइरस मिस्त्री को टाटा समूह का

कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में कई खामियों पर ध्यान देते हुए यह

फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि प्राधिकरण ने जो आदेश पारित

किया है, उसमें कई खामियां हैं। इसलिए प्रारंभिक तौर पर इस आदेश

पर रोक लगायी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले का प्रारंभिक अध्ययन करने के बाद कहा कि

प्राधिकरण के पास साइरस मिस्त्री की तरफ से जो अपील की गयी थी,

उसमें उन्हें दोबारा इस पद पर बहाल करने का कोई अनुरोध भी नहीं

था। लेकिन प्राधिकरण ने अनुरोध नहीं होने के बाद भी आगे बढ़कर

ऐसा फैसला सुना दिया।

अदालत ने कहा कि साइरस काफी अरसे से इस पद से बाहर हैं इसलिए

आनन फानन में उन्हें इस पद पर बहाल करने की कोई ऐसी

जल्दबाजी भी नहीं है, जिससे कंपनी का काम काज प्रभावित होता हो।

प्राधिकरण के आदेश पर रोक लगाने के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट ने

साइरस मिस्त्री और अन्य को इस मामले में नोटिस जारी करने का

निर्देश दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने टाटा पर भी पाबंदी लगायी

इस क्रम में शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले की

सुनवाई होने तक टाटा समूह अपनी तरफ से कंपनी कानून की धारा

25 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग भी नहीं करेगी। लेकिन

अदालत ने साफ तौर पर कहा कि प्राधिकरण के इस किस्म के फैसले

से वह हैरान हैं क्योंकि जिस बात का अनुरोध तक नहीं किया गया है,

उसे प्राधिकरण ने कैसे अपने आदेश में शामिल कर लिया है। इसलिए

पूरे मामले की समग्र जांच अब जरूरी ह । एनसीएलएटी द्वारा साइरस

मिस्त्री के पक्ष में ऐसा आदेश जारी होने के तुरंत बाद टाटा संस की

तरफ से इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी।

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