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क्रिसपर तकनीक पर आधारित महत्वपूर्ण जेनेटिक स्विच तैयार किया वैज्ञानिकों ने

  • अब शरीर के किसी भी जीन को चालू या बंद कर सकेंगे

  • अनेक जीनगत बीमारियों का ईलाज संभव होगा

  • पूरी प्रक्रिया को पूर्व स्थिति में लाया जा सकेगा

  • ऑन या ऑफ का काम बिजली के स्विच जैसा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः क्रिसपर तकनीक एक नई विधा है। इसे मैसाच्युट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी,

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और सान फ्रांसिसको के यूसीएसएफ ने मिलकर विकसित

किया है। इस विधि की विशेषता यह है कि शरीर के किसी भी जीन को अब चालू या बंद

किया जा सकता है। इस उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जीन

के गलत तरीके से काम करने की वजह से भी शरीर में अनेक किस्म के विकास उत्पन्न

होता है। अब अगर किसी खास जीन की पहचान कर उसके काम करने को रोक दिया जा

सका तो बीमारी स्वतः ही ठीक हो जाएगी। इस जीन एडिटिंग पद्धति को विकसित करने

का काम कई दशकों से चल रहा था। अब जाकर उसमें सफलता मिली है। अच्छी बात यह

भी है कि इस जीन एडिटिंग पद्धति को एक बार लागू करने के बाद उसे फिर से वापस पूर्व

स्थिति में भी लाया जा सकता है। इसलिए अब यह माना जा सकता है कि जीन आधारित

बीमारियों के ईलाज में यह नई पद्धति आने वाले दिनों में सबसे अधिक प्रयोग में लायी

जाने वाली है। इसके पहले इस काम को करना उतना आसान नहीं था। एक जीन को एडिट

करने की वजह से शरीर में जो अन्य किस्म के बदलाव होते थे, उन्हें नियंत्रित कर पाना

संभव नहीं होता था। इसकी वजह से एक जीन में बदलाव के प्रयासों की वजह से शरी के

डीएनए में जो अनावश्यक परिवर्तन हो जाया करते थे, वे दूसरी बीमारी के कारण बनते थे।

अब इस परेशानी से भी पूरी तरह मुक्ति मिलने जा रहा है। इस पद्धति को विकसित करने

के बाद उसके बार में एक शोध प्रबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

क्रिसपर तकनीक मानों बिजली का सामान्य स्विच हो

इस विधि की दूसरी विशेषता के बारे में यह भी बताया गया है कि भविष्य में विकसित होने

वाले कोषों में आने वाले जीन में भी यह बदलाव स्थानांतरित किया जा सकता है। इस

वजह से किसी शारीरिक कोष की संरचना को कोई नुकसान पहुंचाये बिना ही उसमें सिर्फ

एक स्विच लग जाता है, जिसे जरूरत के मुताबिक चालू अथवा बंद किया जा सकता है।

सामान्य समझ की बात करें तो यह शरीर के जीन के लिए ठीक बिजली के स्विच के जैसा

है, जिसे जब चाहा ऑन किया और जरूरत नहीं रही तो ऑफ भी कर सकते हैं। शोध दल ने

इस विधि को परिष्कृत और विकसित करने में चार वर्ष का समय लिया है। इस शोध से

जुड़े और शोध प्रबंध के सह लेखक ल्यूक गिलबर्ट कहते हैं कि यह किसी साइंस फिक्शन

फिल्म के जैसी उपलब्धि है। इसे सही तरीके से काम करते हुए देखना भी आनंद की

अनुभूति प्रदान करता है। वरना इससे पहले एक जीन में बदलाव करने की वजह से शरीर

के अन्य जीनों पर उसका अप्रत्याशित प्रभाव पड़ने लगता था। एमआईटी के बॉयोलॉजी

विभाग के प्रोफसर जोनाथन वेइसमैन कहते हैं कि अब इस विधि से हम एक साथ एक

नहीं कई जीनों को एडिट कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सभी को पूर्व स्थिति में भी ला

सकते हैं। इससे शरीर में मौजूद जीनों को नियंत्रित कर बीमारियों पर रोक लगाने में भी

सफलता मिलेगी।

इस विधि के बारे में बताया गया है कि इस दल ने एक सुक्ष्म प्रोटिन मशीन तैयार किया है।

यह सुक्ष्म प्रोटिन मशीन ही दरअसल जीन एडिटिंग का काम करता है। शरीर की प्राकृतिक

डीएनए कड़ी को समझ लेने के बाद वह उसकी नकल कर सकता है। नकल करने के बाद

वह मिले निर्देशों के अनुसार जीनों को चालू या बंद करता चला जाता है।

कई स्तरों पर इसकी जांच के बाद निष्कर्ष निकाला गया है

किसी जीन के स्विच को ऑफ कर देने के बाद आवश्यकता पड़ने पर उसे फिर से चालू भी

किया जा सकता है। इसी वजह से इसे अब जीन आधारित बीमारिओं के ईलाज की दिशा

में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अब तक के शोध में यह पाया गया ह कि यह

क्रिसपर  तकनीक इंसानी जिनोम में मौजूद सभी जीनों पर काम कर सकता है। यहां तक

कि बिना प्रोटिन कोड के भी यह अपना काम बखूबी निभा जाता है। इस विधि को विकसित

करने के बाद कई स्तरों पर उसकी जांच भी की गयी है। सबसे पहले प्लूरोपोटेंट स्टेम सेलों

पर इसे आजमाया गया था। यह वे स्टेम सेल हैं जो अन्य कोशों का निर्माण करते हैं। एक

जीन का स्विच बंद करने के बाद जब जांचा गया तो यह पाया गया कि वह आगे भी अन्य

हिस्सों में स्विट ऑफ होने की अवस्था में ही काम कर रहा है। इंसानी दिमाग में कई

बीमारी पैदा करने वाले टाउ प्रोटिन पर भी इसे आजमाया गया। वहां पूरी तरह निष्क्रिय

नहीं होने के बाद भी क्रिसपर तकनीक से यह जीन एडिटिंग उसके प्रभाव को बहुत हद तक

कम करने में कामयाब रहा।

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