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ऐतिहासिक धरोहर के प्रति जनमानस में जागरूकता पैदा करना भी संग्रहालय की जिम्मेदारी : मिश्र

बेतिया, पच: ऐतिहासिक, सामाजिक व राजनैतिक धरोहर का संकलन होता है। धरोहरों के

संरक्षण, संवर्धन, प्रदर्शन के अतिरिक्त आमजन में क्षेत्रीय धरोहर के प्रति जागरुकता का

होना आवश्यक है। सामाजिक विकास के लिए आमजन में क्षेत्रीय धरोहरों के प्रति

जागरुकता पैदा करने के उद्देश्य से वर्ष 18 मई 1977 ई से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा

गांधी ने प्रतिवर्ष राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने का निर्णय लिया। तत्पश्चात प्रतिवर्ष 18

मई को राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है। महात्मा गांधी स्मारक संग्रहालय

भितिहरवा में महात्मा गांधी के प्रिय वस्त्र खादी के प्रचार, प्रसार व उत्पादन के लिए तीन

महीने का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन वर्तमान वित्तीय वर्ष 2021-2022 में करने की

योजना है। जिसमें दो से तीन दर्जन प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। इस प्रकार

चम्पारण की प्रसिद्ध सिक्की कला का 90 दिवसीय एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

करने की योजना भी है। लॉकडाउन समाप्ति के उपरांत उसकी प्रक्रिया प्रारंभ किया

जाएगा। इसके लिए क्रमशः बिहार राज्य खादी बोर्ड एवं उपेन्द्र महारथी संस्थान का

सहयोग लिया जाएगा। चंपारण ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों की दृष्टि से जितना

समृद्ध है, उतना ही उन धरोहरों के संरक्षण एवं अनुरक्षण के प्रति उपेक्षा का भाव

प्रशासनिक, पुलिस पदाधिकारियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं में व्याप्त है। पिछले कुछ

वर्षो में विभिन्न विकासात्मक एवं निर्माण कार्यों के क्रम में जो पुरावशेष मिलते रहे हैं।

उसके संरक्षण एवं अनुरक्षण के प्रति कोई गंभीरता से प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।महात्मा

गांधी के चंपारण सत्याग्रह से संबंधित स्थलों एवं नील उत्पादन से संबंधित कोठियों का

डॉक्युमेंटेशन गांधी स्मारक संग्रहालय ने किया है।

ऐतिहासिक धरोहरों में चंपारण सत्याग्रह एवं नील आंदोलन महत्वपूर्ण

महात्मा गांधी के सहयोगियों संत राउत व राजकुमार शुक्ल की तस्वीर तथा भितिहरवा

आश्रम के संस्थापक शिक्षक शिक्षिकाओं के फोटो को प्रदर्शित किया गया है। इस

संग्रहालय की शतवार्षिकी समारोह के समय एक दुर्लभ चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। जिसका

उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। उन्होंने प्रदर्शनी की भूरि भूरि

प्रशंसा किया, क्योंकि इस आयोजन से पहले चंपारण सत्याग्रह से संबंधित एक भी चित्र

दीर्घा में प्रदर्शित नहीं रही। चंपारण के कला संस्कृति एवं पुरातत्व विषयक सेमिनार के

अलावा महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह से संबंधित विविध आयाम विषयक अनेक

सेमिनार एवं कार्यशालाओं का आयोजन प्रसिद्ध भितिहरवा आश्रम में किया जाता रहा है।

भितिहरवा आश्रम की स्थापना के उद्देश्यों की याद में स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं शिक्षा

विषयक अनेक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। देश के गांधी विषयक प्रमुख

विद्वानों में अधिकांश लोग यहां आकर अपना व्याख्यान प्रस्तुत कर चुके हैं। बेतिया

संग्रहालयाध्यक्ष एवं गांधी स्मारक संग्रहालय, भितिहरवा के प्रभारी डॉ शिव कुमार मिश्र

के अनुसार भितिहरवा आश्रम के कार्यकलाप अन्य संग्रहालय के लिए अनुकरणीय हैं।

हालाकि डॉ शिवकुमार मिश्र पर बिना अनुमति संग्रहालय में छेड़छाड़ का आरोप लगता

रहा है। डॉ शिव कुमार मिश्र ने कहा कि क्षेत्रीय पुरातात्विक धरोहरों के प्रति आमजन को

जागरुक करना संग्रहालय की जिम्मेदारी है।

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