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कोविशील्ड वैक्सिन में खून का थक्का जमने का कारण का पता चला




रांचीः कोविशील्ड वैक्सिन लेने के बाद अनेक रोगियों में खून का थक्का जमने की शिकायत मिली थी। भारत में इसी परेशानी को नजरअंदाज करने की वजह से कई रोगी थ्रम्बोसिस की बीमारी से भी पीड़ित हुए थे। अत्यधिक खून जमने की वजह स कई रोगियो की जान बचाने के लिए उनके शरीर का जहरीला हिस्सा काटकर भी हटाना पड़ा था।




अब जाकर इस कोविशील्ड वैक्सिन के लगने के बाद ऐसा क्यों होता है, उसकी जानकारी मिली है। कार्डिफ एवं एरिजोआना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिको ने लगातार इसकी जांच कर इसके कारणों को खोज निकाला है।

दरअसल इस शोध का निष्कर्ष है कि वैक्सिन में मौजूद एक तत्व के प्रति खून में मौजूद एक प्रोटिन अत्यधिक आकृष्ट होकर यह परेशानी पैदा करता है। इस ब रे में बताया गया है कि कोरोना वैक्सिन के लिए कोविशील्ड का टीका लेने के बाद शरीर के अंदर एक क्रमिक प्रतिक्रिया चालू हो जाती है।

यह स्पष्ट किया गया है कि इस वैक्सिन का निर्माण एक कमजोर वायरस को आधार बनाकर ही किया गया है। जब यह टीका दिया जाता है तो उसमें मौजूद तरल शरीर के खून में मिल जाते हैं। उसके बाद से शरीर के अंदर एक नहीं कई किस्म की प्रतिक्रियाएं होती हैं।




इंसानी शरीर की मांसपेशियों में कोविशील्ड का टीका दिये जाने के बाद कई बार यह सीधे भी खून के संपर्क में आ जाता है। ऐसा होने के बाद खून के अंदर मौजूद प्लेटिलेट फैक्टर 4 इसकी तरफ आकृष्ट होता है।

कोविशील्ड की संरचना से एक प्रोटिन गड़बड़ा जाता है

दूसरी तरफ वायरस वैक्सिन भी शरीर में मौजूद इस प्लेटिलेट फैक्टर 4 को वायरस समझकर सक्रिय होने लगता है। दोनों ही तरफ से एंटीबॉडी तैयार होने की वजह से अंदर का सारा समीकरण बिगड़ जाता है।

इसी वजह से शरीर के कई हिस्सों में कोविशील्ड का टीका लगने के बाद खून के थक्के बनने लगते हैं। इस शोध में एस्ट्रोजेनेका के वैज्ञानिक भी शामिल हुए थे।

परीक्षण समाप्त होने के बाद उन्होंने कहा कि दरअसल सामान्य अवस्था में खून का थक्का नहीं जमता है बल्कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस दौरान खून का थक्का जमने की संभावना अधिक हो जाती है। अब इस कारण का पता चल जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही इसका भी निदान तैयार हो जाएगा।



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