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कोविड वैक्सिन बनाने की दिशा में रुस की जानकारी भी सामने आयी

  • रुस के सैन्य अनुसंधान केंद्र का परीक्षण

  • पहली बार रुस की तरफ से घोषणा हुई है

  • इस किस्म के 11 परीक्षणों पर ध्यान अलग

  • रुस के वैज्ञानिकों ने 18 लोगों पर ट्रायल किया

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कोविड वैक्सिन बनाने की दिशा में पहली बार रुस से कोई सूचना बाहर आ पायी है।

इससे पहले दुनिया भर के अनेक वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में इस किस्म का काम प्रगति पर

होने की नियमित जानकारी मिलती रही है। यह पहला अवसर है जबकि रुस के वैज्ञानिकों ने

पशुओं पर हर कुछ आजमा लेने के बाद 18 स्वयंसेवकों पर अपनी वैक्सिन का परीक्षण प्रारंभ

कर दिया है। इसके पहले रुस की तरफ से इस किस्म का कोई परीक्षण जारी होने तक की

जानकारी नहीं दी गयी थी। दरअसल यह अनुसंधान रुस की रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत

एक केंद्र में चल रहा है। आम तौर पर रक्षा विभाग से जुड़े केंद्रों में होने वाली गतिविधियों के बारे

में कोई भी देश तुरंत ही कोई जानकारी नहीं देता है।

जो सूचनाएं अब दी गयी हैं उसके मुताबिक रुस के रक्षा मंत्रालय के अनुसंधान केंद्र के

वैज्ञानिकों ने मॉस्को के गामालेई इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडोमोलॉजी एंड माइक्रो बॉयोलाजी केंद्र के

साथ मिलकर यह काम किया है। दी गयी जानकारी के मुताबिक सैन्य अस्पताल में यह

परीक्षण किया जा रहा है। इसके तहत दो समूहों में बांटे गये स्वयंसेवकों को एक ही वैक्सिन के

अलग अलग डोज दिये गये हैं। वैसे यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सभी को दी गयी वैक्सिन

एक है अथवा उनमें कोई भिन्नता भी है। प्रथम समूह के 18 लोगों को यह वैक्सिन 18 जून को

दिया गया है। यह सभी लोग लगातार दो सप्ताह तक दूसरों से बिल्कुल अलग थलग रह रहे थे।

वैक्सिन दिये जाने के बाद परीक्षण की अवधि में भी यानी अगले चार सप्ताह तक इसी अवस्था

में रहेंगे ताकि कोई दूसरा उनके संपर्क में नहीं आ सके।

कोविड वैक्सिन बनाने की जानकारी अब सार्वजनिक की गयी

इस दौरान उनकी चौबीसों घंटे निगरानी की जाती रहेगी। वैक्सिन दिये जाने के बाद उनके शरीर

के अंदर हो रहे बदलावों पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि वैक्सिन के असर और

अन्य गतिविधियों के बारे में लगातार सूचना मिलती रहे। मिली जानकारी के मुताबिक पहले

दौर के इन स्वयंसेवकों पर इस वैक्सिन का परीक्षण सफल होने के बाद दूसरे दौर में अधिक

लोगों को यह वैक्सिन दिया जाएगा। इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने पहली बार यह स्पष्ट कर

दिया है कि इंसानों पर इसे आजमाने के पहले ही छोटे और बड़े जानवरों पर इसे सफलतापूर्वक

आजमाया जा चुका है। सिर्फ जारी परीक्षणों के बारे में इससे पहले कोई औपचारिक घोषणा नहीं

की गयी थी।

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में चल रहे दवा और कोविड वैक्सिन के

अनुसंधान के काम को अलग अलग तौर पर वर्गीकृत किया है। अब तक की जानकारी के

मुताबिक दर्जनों दवाइयों पर परीक्षण चल रहा है जबकि कोविड वैक्सिन बनाने में एक सौ से

अधिक केंद्रों में काम चल रहा है। उनमें से हरेक में क्लीनिकल ट्रायल का अलग अलग दौर चल

रहा है। इन सभी के बीच से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 खास क्लीनिकल ट्रायलों को अलग

तौर पर वर्गीकृत किया है। चीन की तरफ से किये गये दावों को फिलहाल स्वीकार नहीं किया

गया है क्योंकि चीन के दावों के बाद वहां बीजिंग में फिर से कोरोना वायरस का हमला हुआ है।

इन रोगियों के इलाकों में इस वैक्सिन के परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद उस पर फिर से विचार

किया जा सकता है।

क्लीनिकल ट्रायल में ऑक्सफोर्ड वि. वि. सबसे आगे

इस परीक्षणों में से सबसे आगे ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का ट्रायल है। यह अनुसंधान दवा

कंपनी एस्ट्राजेंका के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। दूसरी तरफ चीन में वहां के सैन्य

अस्पताल में वैक्सिन बनाने का दावा करने वाली कंपनी कैनसिनोबॉयो के साथ काम चल रहा

है। इसके अलावा 128 ऐसे कोविड वैक्सिन अनुसंधान हैं जो अलग अलग स्तर पर हैं। लेकिन

इंसानों पर प्रथम दौर के क्लीनिकल ट्रायल की रिपोर्ट कहीं से भी नहीं आयी है। जिन वैक्सिनों

का चूहों अथवा बंदरों पर सफल प्रयोग होने की बात कही गयी थी, उन्हें फिलहाल इंसानों पर

जांचा परखा जा रहा है। वैसे इस कोविड वैक्सिन अनुसंधान से जुड़ी सभी कंपनियों ने यह स्पष्ट

कर दिया है कि वह अनुसंधान की सफलता के बाद भी इस वैक्सिन की कीमत आम आदमी के

पहुंच के भीतर ही रखेंगे क्योंकि यह दुनिया में लाभ कमाने का नहीं जिंदगी बचाने का दौर है।


 

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