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कोविड 19 की मजबूरी में महिलाओं की तस्करी पर गृह मंत्रालय सतर्क

  • इस दौरान दस हजार से अधिक महिलाओं की तस्करी

  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री को इत्तिला किया गया

  • दोनो देशों के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय

  • डांस बार बंद हो गये तो दलालों की चांदी हुई

  • तस्करी में झारखंड की लड़कियां भी हैं शामिल

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: कोविड 19 की मजबूरी यानी लाकडाउन के कारण पश्चिम बंगाल, असम,

बिहार, झारखंड, यूपी  और पूरे पूर्वोत्तर राज्यों से बांग्लादेश में पिछले नौ महीने में हिंदू

लड़कियों सहित 10,000 से अधिक महिलाओं की तस्करी की गई है, जो इस पूरे राज्य को

दुनिया के सबसे खराब मानव तस्करी क्षेत्र में बदल देती है। भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर

महिलाएं तस्करी दोनों देशों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन रहा है। बीएसएफ

अधिकारी ने बताया कि महिलाओं से पूछताछ में पता चला है कि कोविड-19 के दौरान

लाकडाउन के कारण डांस बार बंद हो गए और रोजगार के साधन न होने के कारण इन

महिलाओं को भारतीय दलाल बाबू की मदद से अवैध रूप से सीमा पार कराने के लिए

सीमावर्ती क्षेत्र में लाया गया। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स बीएसएफ के एक विश्वसनीय सूत्रों

ने कहा कि किशोर लड़कियों सहित, महिलाएं भूमि और नदी मार्गों के माध्यम से अपना

रास्ता तलाशती हैं, एक परिष्कृत रैकेट द्वारा समर्थित यात्रा जहां व्यवसायी बिचौलिए

गिरफ्तारी से बचने के लिए सैटेलाइट फोन का उपयोग करते हैं। सीमा सुरक्षा बल ने इस

साल अक्टूबर महीने के 15 तारीख तक दोनों देशों के बीच अवैध रूप से सीमाओं को पार

कर रहीं 1589 महिलाओं को पकड़ा है। गिरफ्तार लोगों में वे महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने

भारत में प्रवेश करने की कोशिश की और साथ ही वह महिलाएं, जिन्होंने 1 जनवरी से 15

अक्टूबर के बीच दलाल या गुप्त सूचना मुहैया कराने वालों की सहायता से सीमा पार

करने की कोशिश की थी।

कोविड 19 की मजबूरी यह थी कि आमदनी पूरी तरह बंद थी

हालांकि,बिहार, झारखंड ,उत्तर प्रदेश, और पश्चिम बंगाल से लेकर पूरे पूर्वोत्तर राज्य से

महिलाओं तस्करी हो रहा है । बांग्लादेश से यह भारतीय महिलाओं को पाकिस्तान

इसराइल स्विजरलैंड देशों तक पहुंचा जाता है । बीएसएफ के एक विश्वसनीय सूत्रों के

अनुसार जिस तरह बांग्लादेश से लाखों से लाखों लोग अवैध तरीका से भारत में प्रवेश

करता है, इसी तरह सीमा पार करके दलालों ने भारतीय महिला को बांग्लादेश बांग्लादेश

भेजते हैं।भारत से महिला लेकर बांग्लादेश में तस्करी होते रहता है । इसे लेकर भारत के

गृह मंत्रालय ने परेशान हो रहा है ।सूत्रों के अनुसार ज्यादा से ज्यादा भारतीय महिला

पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और असम के हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार

बांग्लादेश में हो रहे महिला तस्करी बंद करने के लिए गृह मंत्रालय ने इस साल अगस्त

महीने में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना को पत्र भी लिखा है। यह संख्या महत्वपूर्ण

है, क्योंकि यह 2020 के अंत तक पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ सकती है।

आशंका है कि मानव तस्करी का यह रिकार्ड तोड़ सकती है

एक अनुमान के अनुसार, अगर तस्करी के दौरान पकड़ी गई महिलाओं की संख्या साढ़े

दस महीने में ही 1500 को पार कर गई है, तो यह इस साल के अंत तक 2000 का आंकड़ा

पार कर सकती है। भारत और बांग्लादेश के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पकड़ी गई

महिलाओं की संख्या 2019 में 936, 2018 में रिकॉर्ड 1,107 और 2017 में 572 थी। इस

साल सीमाओं पर पकड़ी गई कुल 1589 महिलाओं में से सबसे अधिक 888 दक्षिण बंगाल

से पकड़ी गई हैं।इसके बाद त्रिपुरा से 14, असम में गुवाहाटी से 46, उत्तर बंगाल से 34,

मिजोरम और कछार से 42 और मेघालय से 21 महिला पकड़ी गई है। रिपोर्ट में बताया

गया है कि अधिकतम महिला तस्करी के मामले दक्षिण बंगाल से दर्ज किए गए हैं, जहां से

958 महिलाओं को बांग्लादेश में पार करते समय या भारत में प्रवेश करते समय पकड़ा

गया। यह संख्या 2018 में 620 और 2017 में 462 थी। आंकड़ों से पता चलता है कि महिला

तस्करी में 2019 में त्रिपुरा दूसरे स्थान पर रहा है, जहां तस्कीर के 52 मामले दर्ज किए

गए  हैं। वहीं 2018 में यहां 47 जबकि 2017 में 14 महिलाएं सीमा पार करते हुए पकड़ी गईं

हैं। असम में गुवाहाटी दक्षिण बंगाल के बाद 2018 में दूसरे स्थान पर रहा, जहां सीमा पार

करते समय 394 महिलाओं की गिरफ्तारी हुई. वहीं 2019 में यह आंकड़ा आठ जबकि

2017 में छह था। उत्तर बंगाल सीमा के माध्यम से महिलाओं की तस्करी के मामलों में

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

साल दर साल  बढ़ता ही जा रहा है यह आंकड़ा

2017 में यह आंकड़ा 87 था, लेकिन 2018 में 39 हो गया। वहीं 2019 में यह संख्या 12 रही

और इस साल 15 अगस्त तक केवल चार महिलाएं सीमा पार करते हुए पकड़ी गईं।

मेघालय सीमांत क्षेत्र से इस वर्ष 15 अक्टूबर तक केवल एक महिला पकड़ी गईं, जबकि

पिछले साल 11 महिलाओं को पकड़ा गया था. 2018 में यहां से छह और 2017 में तीन

महिलाओं को सीमा पार करते हुए पकड़ा गया। कोविड 19 की मजबूरी के दौरान भी

मिजोरम और असम के कछार से सबसे कम महिला तस्करी के मामले दर्ज किए गए हैं।

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