देश में अंग प्रत्यारोपण के लिए बनेंगे विशेष ड्रोन एयर कॉरिडोर

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  • केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने दी जानकारी

  • खास हवाई मार्ग से जाएंगे इसके ड्रोन

  • अगले चरण में अगली पीढ़ी के ड्रोन आयेंगे

  • अभी नियंत्रित ड्रोन उड़ाने की अनुमति मिलेगी

नयी दिल्ली : देश में 01 दिसंबर से ड्रोन के इस्तेमाल के लिए पंजीकरण शुरू हो जायेगा।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक दिन होगा।

अन्य उद्देश्यों के साथ एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक प्रत्यारोपण के लिए

अंग ले जाने में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हालाँकि, अभी सामानों की डिलिवरी आदि के लिए इसके इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गयी है।

उन्होंने बताया कि 01 दिसंबर से पंजीकरण शुरू हो जायेगा तथा एक महीने के भीतर

वास्तविक इस्तेमाल शुरू होने की उम्मीद है।

श्री सिन्हा ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए अंग ले जाने में समय की पाबंदी होती है।

एक निश्चित समय के भीतर अंग को एक शरीर या ‘आॅर्गन बैंक’ से निकालकर

प्राप्तकर्ता मरीज के शरीर में लगाना होता है।

मार्ग की तुलना में ड्रोन से इसकी डिलिवरी जल्द और आसान होगी।

उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए अस्पतालों में ‘ड्रोन पोर्ट’ बनाये

जायेंगे जहाँ ड्रोन के उतरने और उड़ान भरने की विशेष सुविधा होगी।

इसके अलावा हवा में विशेष ‘एयर कॉरिडोर’ बनाये जायेंगे।

इस मार्ग से अंगों को कम से कम समय में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल पहुँचाया जा सकेगा।

देश में दूसरे चरण के ड्रोन 2.0 पर भी जल्द काम प्रारंभ होगा

श्री सिन्हा ने बताया कि ड्रोन का इस्तेमाल शुरू होने के बाद जल्द ही ड्रोन 2.0 पर भी काम शुरू हो जायेगा।

इसमें दृष्टि सीमा से दूर भी ड्रोन उड़ाने की अनुमति दी जायेगी।

साथ ही सामानों की डिलिवरी आदि की अनुमति भी दूसरे चरण के दिशा-निर्देशों में देने की योजना है।

उन्होंने कहा कि अभी ड्रोन का नियंत्रण दूर नियंत्रण कक्ष में बैठे पायलट द्वारा करने की

अनुमति दी गयी है, लेकिन ड्रोन 2.0 में आॅटोमेटेड ड्रोन की अनुमति भी दी जायेगी

जिसके नियंत्रण के लिए पायलट की जरूरत नहीं होगी।

सरकार ने इस साल ड्रोन के इस्तेमाल के लिए दिशा-निर्देश जारी किये थे,

लेकिन उसमें पेलोड ले जाने की अनुमति नहीं दी गयी थी

जिससे सामानों की डिलिवरी के लिए फिलहाल उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

साथ ही पहले चरण में ड्रोन सिर्फ दृष्टि सीमा के दायरे में उड़ाने की ही अनुमति है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नागर विमानन महानिदेशालय के तहत एक ड्रोन टास्क फोर्स का गठन किया गया है

जो ड्रोन 2.0 के लिए नियामक फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए

15 जनवरी 2019 तक श्वेत पत्र पेश करेगा।

इस श्वेत पत्र में की गयी सिफारिशों के आधार पर दूसरे चरण के दिशा-निर्देश तैयार किये जायेंगे।

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