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चीन के मौत के आंकड़े भी वैज्ञानिकों के लिए हैरान करने वाले




  • चीन के मौत के आंकड़ों का प्रतिशत अलग

  • विदेशों तक बिना चीन के भी फैला है वायरस

  • सार्स वायरस से दस प्रतिशत लोग मारे गये थे

  • आशंका से अधिक बड़ा है कोरोना वायरस का खतरा

डॉ एच के सरकार

सिंगापुरः चीन के मौत के आंकड़े ही दर्शाते हैं कि कोरोना वायरस को लेकर चिंतामुक्त

होने लायक कोई स्थिति नहीं आयी है। वायरस विज्ञान के तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि

जिस तरीके से वायरस के बारे में कल्पना की गयी थी, दरअसल चीन का यह नया वायरस

उससे अलग रुप अख्तियार करता जा रहा है। यूं तो अब वायरस पीड़ितों की संख्या में

उल्लेखनीय कमी आ रही है लेकिन दरअसल में चीन के वुहान शहर में क्या हो रहा है, यह

कह पाना कठिन है, क्योंकि चीन ने इसकी सूचनाओं के बारे में कठोर पाबंदी लगा रखी है।

विज्ञान जगत इस नई जानलेवी बीमारी के वायरस को गहराई से समझने की कोशिश कर

रहा है। दुनिया भर के वैज्ञानिक चीन सरकार के उस रवैये से भी नाखुश हैं, जिसमें चीन ने

अपने ही वैज्ञानिक डाक्टर की चेतावनी को नजरअंदाज करने के साथ साथ दबाने का काम

किया था। अब यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि चीन के 34 वर्ष के एक युवा डाक्टर ने सबसे

पहले इसकी चेतावनी दी थी। लेकिन चीन की सरकार ने इसे अनसुना कर दिया। यह

डाक्टर भी इसी बीमारी से मरने वालों की पहली कतार में रहा। इधर उधर से मिल रही

सूचनाओं के मुताबिक वहां के 80 फीसद कोरोना वायरस के मरीजों को सर्दी के साथ बुखार

हुआ है। इसमें से 13 प्रतिशत लोग गंभीर रुप से बीमार पड़े हैं।

चीन के मौत के आंकड़े सार्स की मौत से भिन्न हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मामूली तौर पर इसकी चपेट में आने वाले ईलाज के

बाद दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, ऐसी रिपोर्ट आयी है। लेकिन चिकित्सा वैज्ञानिकों और

खासकर जेनेटिक विशेषज्ञों को अभी इसमें और जानकारी हासिल करने की जरूरत

महसूस हो रही है। दुनिया भर के चिकित्सा वैज्ञानिकों के बीच इस बात को लेकर चीन के

दावों पर संदेह है। चीन के वुहान इलाके में इस वायरस से पीड़ित लोगों में से सिर्फ दो से

चार प्रतिशत लोगों की मौत होने की बात कही गयी है। दूसरी तरफ वहां से चीन के अन्य

प्रांतों में फैली इसी बीमारी से मरने वालों का आंकड़ा 0.7 प्रतिशत बताया जा रहा है।

वैज्ञानिकों की चिंता इस बात को लेकर है कि दुनिया भर में इस बीमारी का प्रसार अजीब

तरीके से हुआ है। यहां सिंगापुर आये एक व्यापारी ने यूरोप में अपने संपर्क में आने वाले

कई लोगों को इससे पीड़ित कर दिया है। लेकिन वह व्यापारी खुद चीन गया ही नहीं था।

जिस कांफ्रेंस में भाग लेने वह सिंगापुर आया था, वहां उसकी मुलाकात चीन के एक

व्यक्ति से हुई थी। अनुमान है कि चीन के उसी व्यक्ति के माध्यम से वायरस संक्रमण से

पीड़ित व्यक्ति जब लौटा तो अपने इलाके में कोरोना वायरस फैलाने का वाहन साबित

हुआ। अब सभी का ईलाज चल रहा है।

बिना चीन गये भी आ गया कोरोना की चपेट में

इसलिए दुनिया भर में कहां से कौन सा व्यक्ति इस वायरस को लेकर अपने देश लौटा है और वहां बीमारी का प्रसार किस तरीके से हो रहा है, उसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। जैसे जैसे लोगों में इस बीमारी के लक्षण

दिखेंगे, वैसे वैसे यह स्पष्ट होगा कि दरअसल इसका प्रसार कैसे और कितना हुआ है।

यह समझ लेना होगा कि चीन के बाहर अन्य देशों में भी धीरे धीरे क्रमवार तरीके से

इस  कोरोना वायरस से मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वायरस विशेषज्ञ लॉरेन सावेर ने स्पष्ट किया है कि

तमाम देशों में त्वरित कार्रवाई के तहत लौटने वाले लोगों की जांच की प्रक्रिया प्रारंभ होने

की वजह से इस बीमारी को फैलने से काफी हद तक रोका जा सका है। लेकिन विदेशों में

मौत का आंकड़ा तो यही संकेत देते हैं कि चीन में होने वाली मौत के आंकड़ों का प्रतिशत

अन्य देशों के आंकड़े से मेल नहीं खाते हैं।

यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि वर्ष 2003 में जब सार्स वायरस का आक्रमण हुआ था तो

दस प्रतिशत लोग बीमारी की चपेट में आने के बाद मर गये थे। इसलिए दरअसल कोरोना

वायरस से कितने लोग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष तौर पर प्रभावित हो चुके हैं, इसके लिए अभी

सूचना का इंतजार है


 



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