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कोरोना वायरस का प्रकोप कर रहा आर्थिक व शारीरिक नुकसान

रांची : कोरोना वायरस का प्रकोप देश विदेश सहित विभीन्न हिस्सों में पूरी तरह फ़ैल चुका है.

दिन पर दिन मरीजों की संख्या में इजाफ़ा ही देखने को मिल रहा है.

इस बिमारी का अबतक न कोई हल खोजा सका है और ना ही निदान.

बस ध्यान इतने पर रखना है कि यह बिमारी न हो,

क्यूंकि इस महामारी के सफल इलाज ढूंढने में देश विदेश के डॉक्टर भी फेल हो चुके है.

हालांकि प्रक्रिया अभी भी चल ही रही है पर कोई सफल निदान देखने को नहीं मिला.

भारत में भी इस बिमारी का स्तर बढ़ता चला जा रहा है.

जो पिछले दिनों की तुलना में 125 के लगभग पहुँच चुका है.

और अबतक भारत देश के अन्दर मरने वालो की संख्या 3 हो चुकी है

जिसमे एक प्रवासी भी शामिल है जो भारत में ही कोरोना पीड़ित होकर दम तोड़ा है.

अस्पतालों में तो मरीजों की भीड़ से चिकित्सक परेशान है.

आये दिन भीड़ बढती ही चली जा रही है.

कहीं कोई छुट्टी मनाने तो कोई कहीं बाहर जाने से भी डर रहे है.

बल्कि स्थिति इस कदर खराब हो चुकी है कि अगर जरुरत न हो तो घर से भी ना निकले.

जिसके कारण आर्थिक तौर पर अर्थव्यवस्था बिलकुल सुस्त पड़ गयी है.

जो पहले से ही काफी धीमी चाल पर थी अब बिलकुल ही लड़खड़ा चुकी है.

बावजूद इसके इस बिमारी की रोकथाम जारी रखने के लिए सरकार पूरी तरह प्रयासरत है.

राज्यों की सरकारे व केंद्र उठा रहे कदम

राज्य व केंद्र भी कोविड-19 के सामने घुटने टेक चुके है.

और परीक्षाएं, ट्रेने, मॉल, सिनेमाघर सभी रद्द व बंद करने में लगे है.

कुछ राज्यों ने धारा 144 लागू कर देशवासियों को बचाने का कदम उठाया है.

एविएशन सेक्टर, प्राइवेट सेक्टर, सरकारी क्षेत्र आदि सभी जगह इसका असर देखने को मिल रहा है.

बल्कि न्यायालय भी जरूरी केसों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये निपटायेंगे.

बाकी पेंडिंग में रहेंगे जिसपर फ़िलहाल कोई सुनवाई नहीं की जायेगी.

विमानों की स्थिति

सभी देशों ने लगभग अपने बॉर्डर तक को सिल कर दिया है.

वही जो घुमने के लिए भी जाना चाहते है वो भी कोरोना की डर से भीड़ वाली जगह जाने से बच रहे है.

जहां विमान क्षेत्र मुख्य रूप से शामिल है.

जिससे विमानन क्षेत्रों में भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है.

बहुत ज्यादा जरूरत के अनुसार या सरकारी छुट्टी की घोषणा ही घर लौटने को मजबूर कर रही है.

ट्रेन बसों पर भी असर

बता दें कि कोरोना महामारी का डर तो अब ट्रेन व बसों से सफ़र करने वाले यात्रियों पर भी दिखना शुरू हो गया है.

कई यात्रियों ने अपने सारे कार्यक्रम को रद्द करते हुए टिकट कैंसिल कराये हैं.

हालांकि रेलवे ने अपने स्तर से सुरक्षा के इंतजामात कर रखे हैं पर दूसरी जगहों पर सफ़र पर जाने की हिम्मत यात्रियों की टूटने लगी है.

हटिया रेलवे के सीपीआरओ नीरज कुमार के अनुसार रेलवे की ओर से चौबीसों घंटे क्यूआरटी तैयार रखी गयी है.

एम्बुलेंस, पारा मेडिकल स्टाफ, डॉक्टरों की टीम लगातार शिफ्टवाइज काम कर रही है.

50 बेड को कोरेनटाइन करके रखा गया है.

1 आइसोलेशन वार्ड भी रेडी है जिसमें 4-4 बेड यानी कुल 8 बेड हैं.

सभी गाड़ियों को सैनीटाइज्ड किया जा रहा है.

कोरोना से बचाव के संबंध में लगातार प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है.

हर यात्री रेलवे के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में रेलवे के द्वारा हर तरह से एहतियात बरती जा रही है.

पर भी यात्री यात्रा से ज्यादा अपने जीवन को मूल्य मान कर यात्राएं ज्यादा से ज्यादा टाल रहे है

या जरूरत पड़ने पर मास्क लगाकर यात्रा कर रहे है.

बता दें कि सिर्फ झारखंड की राजधानी रांची के आंकड़ो के अनुसार पिछले छह दिनों में 4500 से अधिक यात्रियों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी है.

अभी के आंकड़ों को देखें तो प्रतिदिन औसतन 380 से भी अधिक यात्री अपना टिकट वापस करा रहे हैं

जबकि इसी समय पिछले साल प्रतिदिन 250 टिकट वापसी होती थी.

मार्च से मई-जून महीने के बीच बड़ी संख्या में लोग अपने शहरों से दूसरे शहर व राज्यों में घूमने और पढाई करने को निकलते रहे हैं.

पर अबकी कोरोना की चिंता ने अबकी पांव रोक दिये हैं.

पटना, पूने जाने से लेकर राजधानी, गरीब रथ, एलटीटी जैसी लंबी दूरी की गाड़ियों में भी लोग धड़ल्ले से टिकट वापस कराने लगे हैं.

कोरोना एक अफवाह भी

कोरोना की जहांतक जानकारी की बात है तो फ़ोन कॉल्स व सरकारी अधिसूचनाओं, पेपर, न्यूज़ चैनेल द्वारा लोगों को एहतियात बरतने की पूर्ण जानकारी दी जा रही है.

पर सोशल मिडिया में कई ऐसे भी लोग है जो विभिन्न तरह की बातों को कोरोना के लक्षण साबित कर रहे है.

कई लोगों का कहना है कि अपने साथी संगतियों पर से भी उनका भरोसा उठ गया है

और ज्यादा से ज्यादा दुरी बनाने को मजबूर कर दिया है.

कार्यालयों वगैरह में लोग साथ में काम करने, भोजन आदि करने से कतरा रहे है.

हालांकि यह कुछ हद तक सही भी है पर कुछ लोग कोरोना को लेकर ज्यादा ही गलत धारणा रखे हुए है.

जो ना सिर्फ लोगों के अन्दर के डर को बढ़ा रहा है

बल्कि बीमार ना होते हुए भी कोरोना के लक्षण समझकर डॉक्टर के पास भाग रहे है.

कोरोना से बचाव

कोरोना से बचाव का तो निष्कर्ष अबतक निकाला नहीं गया है पर माना जा रहा है

कि ज्यादा से ज्यादा हाथों की सफाई, सर्दी जुकाम व खांसी बुखार होने पर तुरंत डॉक्टरी जांच,

व पीड़ित लोगों से जितना दुरी हो सके बनाए रखना आदि कई ऐसे रोकथाम कोरोना से दुरी बनाए रखेगा.

खाने पिने में कच्चा मांस का उपयोग ना किया जाना भी एक सुरक्षित कदम साबित है.

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