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कोरोना वायरस ठीक करने का दूसरा दावा भी सामने आया

  • हांगकांग के बाद थाईलैंड के चिकित्सकों का दावा

  • दवा से मरीजों के ठीक होने की जानकारी

  • वैक्सिन को विकसित किया जा चुका है

  • थाईलैंड की दवा कई दवाओं का मिश्रण है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कोरोना वायरस का भय पूरी दुनिया में फैलने और  उसके उपचार

के दावे भी सामने आने लगे हैं। इस बीमारी के फैलने की प्रारंभिक सूचना

प्रसारित होने के दौरान ही हांगकांग के शोधकर्ताओं के द्वारा इसके लिए

वैक्सिन तैयार होने की जानकारी दी गयी थी। अब थाईलैंड के वैज्ञानिकों ने

दावा किया है कि उनलोगों ने कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों को ठीक

करने में सफलता पायी है। वैसे थाईलैंड के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया

है कि मरीज के ठीक होने के बाद भी इससे सारे मरीज ठीक हो सकते हैं,

उसकी जांच अभी चल रही है। अभी सिर्फ कुछेक मरीजों के स्वस्थ होने की

वजह से दवा के कारगर होन की बात बतायी गयी है।

हांगकांग विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विभाग ने इस दिशा में पहला

दावा किया है। इस विभाग में माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष यूइन

क्वोक यूंग ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सिन

उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। हांगकांग के क्वीन मेरी अस्पताल में यह

प्रेस कांफ्रेंस आयोजित किया गया था। चिकित्सकों ने अस्पताल में बाहर से

आये एक पीडित मरीज को ठीक करने की बात कही थी। लेकिन वैक्सिन को

अभी अन्य परीक्षणों से गुजारने के बाद ही उसे इंसानी इस्तेमाल के लिए

लाया जा सकता है। इसके लिए अभी काफी समय लगेगा।

उल्लेखनीय है कि बिना क्लीनिकल ट्रायल के इस किस्म की नई दवाइयों

का इंसानों पर प्रयोग करने पर वैश्विक प्रतिबंध है।

कोरोना वायरस के मरीज अब पूरी दुनिया में फैले हैं

इस दवा के बारे में सिर्फ यह बताया गया है कि यह दरअसल नाक के अंदर

लिया जाने वाला स्प्रे है। इसे खुद यूइन यूंग ने ही तैयार किया है। इसे सार्स

महामारी के फैलने के दौरान उनके दल के लोगों द्वारा तैयार किया गया था।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस वायरस का डीएनए हासिल करने में 15 से

18 माह का समय लगा है। इस डीएनए के हासिल होने के बाद उसे नियंत्रित

करने में सक्षम आइएनडी तैयार किया गया है। लेकिन चूंकि इस विधि से

इंसानी शरीर के अंदर जेनेटिक परिवर्तन होते हैं। इसी वजह से बिना अधिक

परीक्षण के इसे सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किया जा सकता है।

लेकिन यह माना जाना चाहिए कि कुछ मरीजों को दवा से फायदा हुआ है।

इसे फिलहाल पहले जानवरों और बाद में इंसानों पर आजमाया जाना शेष है।

लेकिन शोधकर्ता इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। चूंकि कोरोना वायरस

का डीएनए गत 29 जनवरी को हासिल हो चुका है इसलिए उसके आगे का

काम अब तेज किया जा सकेगा।

थाईलैंड का दावा उसके पास भी है इसकी दवा

दूसरी तरफ डाक्टरों ने भी कोरोना वायरस से मुक्ति का मार्ग खोजने

का दावा किया है। इसमें एंटी वायरस, फ्लू और एचआइवी की दवाइयों

के मिश्रण से मरीज को फायदा हुआ है। आने वाले कई मरीजों की स्थिति

गंभीर होने के बाद उन्हें दवाइयों का यह मिश्रण दिया गया था। जिससे उन

मरीजों को फायदा हुआ है। जिन मरीजों पर दवा के मिश्रण का प्रयोग किया

गया था वह वूहान से आयी एक महिला था। अब उसकी स्थिति सुधरती

जा रही है। मिली जानकारी के मुताबिक थाईलैंड में चार लोगों में इस बीमारी

के लक्षण पाये गये थे। यह जानकारी थाईलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ डिसीज

कंट्रोल के महानिदेशक सुवाहनचाई वाट्टानायायिंग चारोइचेन चाई ने दी है।

इनमें से 70 साल का एक ड्राइवर भी था, जिसे पहले से ही टीवी भी थी।

उसकी हालत सबसे अधिक खराब थी। थाईलैंड में कोरोना वायरस से पीड़ित

होने की आशंका से 25 मामलों की जांच की गयी थी। उनमें से 19 लोग चीनी

मूल के थे। इनमें से 17 लोग अभी अस्पताल में हैं जबकि शेष को अस्पताल

से रिहा कर दिया गया है। जिस चीनी मूल की महिला को दवाइयों का मिश्रण

दिया गया था, उसकी 48 घंटे के बाद जब दोबारा जांच की गयी तो उसमें

वायरस नहीं पाये गये। लेकिन डाक्टरों ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इंकार

किया है। उनलोगों का दावा है कि दवा से एक मरीज को अवश्यक फायदा

हुआ है लेकिन इसके आगे की जांच की प्रक्रिया अभी बाकी है। 10 दिनों से

पीड़ित रोगी अगर 48 घंटे में ठीक हो जाए तो उसके परीक्षण की आवश्यकता

तो बनती है।

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