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कोरोना संबंधित बायो-मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल के निष्पादन का मामला

  • अदालत का नियमानुसार डिस्पोज करने का आदेश
  • ईलाज के दौरान निकलते हैं ऐसे कचड़े
  • सिर्फ संक्रमण फैलने की वजह से खतरा
  • अंतिम संस्कार में नियम का पालन हो
संवाददाता

रांची : कोरोना संबंधित बॉयो मेडिकल वेस्ट को निष्पादित करने के मामला अब उच्च

न्यायालय पहुंचा है। झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायाधीश

सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में कोरोना संक्रमित मरीज के उपयोग में लाए जाने

वाले बायो-मेडिकल वेस्ट और संक्रमित मरीज के पार्थिव शरीर को उचित ढंग से

डिस्पोजल करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत में सुनवाई के

दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने जानकारी दी कि राज्य में संक्रमित मरीज के

इलाज में उपयोग किए जाने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट का निष्पादन उचित नियम के

हिसाब से किया जा रहा है।

दरअसल भारत के अलावा अन्य देशों में भी कोरोना से मरे मरीजों की अंतिम क्रिया को

लेकर संक्रमण का भय व्याप्त होने की वजह से इन लाशों के निष्पादन के गाइड लाइन

जारी किये गये हैं। यह बताया गया है कि काफी गहराई में लाशों को दफन करने से कोरोना

संक्रमण के बाहर फैलने का खतरा समाप्त हो जाता है। लेकिन यह भी हिदायत दी गयी है

कि मौत के बाद लाश को पूरी तरह संक्रमण मुक्त करने वाले घोल में डूबोकर ही बैग में

पैक किया जाए। साथ ही अंतिम क्रिया में भाग लेने वाले भी संक्रमण रोधी पोशाक

पहनकर ही ही इसमें शामिल हों। वरना लाश की अंतिम क्रिया के दौरान वहां मौजूद लोगों

को भी कोरोना संक्रमण का खतरा बना रहता है।

कोरोना संबंधित संक्रमण से सावधानी जरूरी

उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ के दिए गए गाइडलाइंस और केंद्र सरकार के जारी किए

गए गाइडलाइंस के अनुसार सभी का निष्पादन किया जा रहा है। उन्होंने अदालत को

बताया कि संक्रमित मरीजों की अंतिम संस्कार को लेकर जगह चिन्हित कर लिया गया

है। उसे भी उचित नियम के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इसलिए इस

याचिका को निष्पादित कर दी जाए। अदालत ने उनकी आग्रह को स्वीकार करते हुए

याचिका को निष्पादित करने का आदेश दिया है।

बता दें कि राजधानी रांची में संक्रमित मरीज की अंत्येष्टि के बाद मरीज को लेकर इधर-

उधर भटकने की स्थानीय मीडिया में खबर आने पर अधिवक्ता शौर्य ने जनहित याचिका

दायर की थी। उसी याचिका पर सुनवाई के उपरांत अदालत ने उसे निष्पादित करने का

आदेश दिया है। दरअसल कोरोना से पीड़ित मरीज की मौत के बाद उसे अपने इलाके में

दफनाने को लेकर कई बार विरोध की स्थिति उपजी है। दूसरी तरफ घाट पर ऐसे शवों को

जलाने का मौका नहीं आने के बाद भी वहां के लोग मरीज की मौत के कारणों की पुष्टि कर

लेने के बाद ही लाश को जलाने में आगे आते हैं। इससे समझा जा सकता है कि कोरोना

संक्रमण के लेकर लोगों में अनेक किस्म की भ्रांतियां हैं। इसी वजह से तमाम संदेहों का

निराकरण करने के लिए ही यह याचिका दायर की गयी थी।


 

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