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कोरोना काल में जोगी विलीन, तीन दिन का राजकीय शोक घोषित

  • 27 मई को की रात दिल का दौरा पड़ा
  • उनके विरोधी भी उन्हे मास लीडर मानते थे

रायपुर : कोरोना काल में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं जनता कांग्रेस के प्रमुख अजीत

जोगी का शुक्रवार को उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। श्री जोगी को गत

09 मई को इमली खाते समय उसका बीज सांस की नली में फंसने के कारण हुए हृदयाघात

के बाद राजधानी के नारायणा अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। तभी से वह कोमा में

थे। उनके निष्क्रिय मस्तिष्क को सक्रिय करने का तभी से चिकित्सकों द्वारा लगातार

प्रयास जारी था, लेकिन 27 मई को की रात में उन्हे फिर दिल का दौरा पड़ा।

कोरोना के प्रकोप से ज्यादा घातक निकला हृदयाघात

डाक्टरों ने अथक प्रयास कर और उन्हे कार्डियो पल्मोनरी रेससीटेशन दिया जिससे उनकी

हृदयगति वापस आई। लेकिन बाद में उनकी हालत काफी नाजुक हो गई। लगभग 48 घंटे

के भीतर श्री जोगी को आज फिर हृदयाघात हुआ। श्री जोगी को बचाने की चिकित्सकों ने

पूरी कोशिश की, लेकिन वह विफल रहे और कई बार मौत को मार दे चुके जोगी का निधन

हो गया। श्री जोगी मरवाही सीट से छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य थे। उनके परिवार में

उनकी पत्नी डा. रेणु जोगी एवं पुत्र अमित जोगी एवं पुत्र वधू ऐश्वर्या जोगी है। उनकी

पत्नी डा. जोगी भी कोटा सीट से विधायक है। उनके पुत्र अमित जोगी ने ट्वीट कर उनके

निधन की जानकारी दिया कि अन्तिम संस्कार उनकी जन्मभूमि गौरेला में कल होगा।

1986 में राजनीति में आए थे जोगी

भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर 1986 में राजनीति में आए श्री जोगी

मध्यप्रदेश को विभाजित कर एक नवम्बर 2000 में बने छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री

बने थे। वह लगभग तीन वर्ष इस पर पद रहे। 2003 दिसम्बर में विधानसभा चुनावों में

कांग्रेस की पराजय होने पर उन्हे पद से हटना पड़ा। राज्य गठन के समय देश के अति

पिछड़े क्षेत्रों में शुमार छत्तीसगढ़ को आगे ले जाने के लिए उन्होने अपने प्रशासनिक सेवा

के अनुभवों के आधार पर काफी मजबूत नींव रखी। उन्होने राज्य गठन के बाद जहां एक

अहम नारा..अमीर धरती के गरीब लोग..दिया। वह प्रयोगवादी थे और नई सोच को आगे

बढ़ाने में विश्वास रखते थे। उनके ही कार्यकाल में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना

हुई,और उनके ही समय में तीन वर्षीय मेडिकल पाठ्यक्रम शुरू हुआ। जिसको लेकर उस

समय उनकी काफी आलोचना भी हुई। वर्षों बाद उनके इन दो कदमों की सराहना भी हुई।

बहुत अच्छी थी उनकी मेमोरी

उन्होने महज तीन वर्ष मुख्यमंत्री रहते नई राजधानी का स्थान चिन्हित किया, इसी

दौरान राज्य में दूसरा मेडिकल कालेज बिलासपुर में, पहला शासकीय डेन्टल कालेज

रायपुर में खुला। एम्स की भूमि भी उन्होने आवंटित की। उनकी छवि एक दबंग नेता और

अच्छे प्रशासक की थी। उनकी मेमोरी बहुत अच्छी थी, जिसे एक दो बार मिल लेते थे, उसे

नाम से जानना उनकी आदत थी। उनकी यह कला लोगो को उनसे सीधे जोड़ देती थी।

14 वर्ष तक कलेक्टर भी रहे

श्री जोगी का जन्म 29 अप्रैल 1946 को बिलासपुर जिले के पेन्ड्रा में हुआ था। भोपाल में

मैकेनिकल इंजीनियंरिग करने के बाद उन्होने रायपुर साइंस कालेज में कुछ समय

अध्यापन किया, फिर 1968 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा मे वह भारतीय पुलिस

सेवा में चुने गए। दो वर्ष उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में हो गया। वह 14 वर्ष

तक कलेक्टर रहे, जोकि अभी तक किसी आईएएस का सर्वाधिक दिन तक कलेक्टर पद

पर रहने का रिकार्ड है। श्री जोगी 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वं राजीव गांधी के कहने

पर राजनीति में आए और कलेक्टर पद से इस्तीफा स्वीकृत होते ही उसी दिन राज्यसभा

के लिए नामांकन किया। वह दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। वह 1998 में रायगढ़ सीट

से लोकसभा के लिए चुने गए लेकिन अगले ही वर्ष 1999 में हुए आम चुनाव में शहडोल से

चुनाव हार गए। 2004 में वह फिर महासमुन्द सीट से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन

चुनाव प्रचार के दौरान ही हुई एक भयंकर सड़क दुर्घटना में उनके कमर के नीचे के हिस्से

ने काम करना बन्द कर दिया। इसके बाद वह जीवन पर्यन्त व्हील चेयर पर ही चलते रहे।

जोगी के भाषणकला के लोग कायल थे

कांग्रेस से राजनीति शुरू करने वाले श्री जोगी ने 2016 में नई पार्टी जनता कांग्रेस जोगी

बनाई और लगभग 18 माह पूर्व राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में अकेले ताबडतोड़ प्रचार

हेलीकाप्टर से लेकर सड़क मार्ग से किया। और अपनी पार्टी के पांच विधायक जितवाकर

कर ले आए। कई सीटो पर उनके उम्मीदवार बहुत कम मतो से हार गए। श्री जोगी की

जीवटता की डाक्टर हो या फिर उनके राजनीतिक विरोधी सभी कायल थे। उन्होने शरीर

का आधा हिस्सा काम नही करने के बावजूद अपनी इतनी सक्रियता बनाए रखी कि लोग

हैरान रहते थे। श्री जोगी जमीन से जुड़े नेता थे, और उनके विरोधी भी उन्हे मास लीडर

मानते थे। उनकी भाषणकला के लोग कायल थे। वह खासकर चुनावों के दौरान

छत्तीसगढ़ी में धाराप्रवाह भाषण कर लोगो को अपनी ओर मोड़ने में माहिर माने जाते थे।

छत्तीसगढ़ में वह इकलौते नेता थे जिनकी जनसभाओं में लोग स्वत: लोग पहुंचते थे।

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