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कोरोना वायरस का असर दे सकता है आर्थिक फायदा




नई दिल्ली : कोरोना वायरस का असर न सिर्फ देश बल्कि विदेशों की अर्थव्यवस्था भी हिला कर रख दिया है.

इस महामारी का ऐसा प्रकोप है कि आर्थिक व शारीरिक सभी तरह के कष्ट लोगों को दे रहा है.

पर इसी दौरान आरबीआई के तरफ से ग्राहकों को खुशखबरी सुनने की उम्मीद देखी जा रही है.

जहां आरबीआई EMI को कम करने से संबंधित बड़ा ऐलान कर सकती है.

बता दे कि फिच सॉल्यूशंस ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि

ऐसा माना जा सकता है या हम उम्मीद भी कर सकते हैं कि

नए वित्त वर्ष, 2020-21 के दौरान आरबीआई की प्रमुख नीतिगत दरों में 1.75 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है.

हालांकि फिच ने यह भी बताया कि पहले उनका अनुमान सिर्फ 0.40 प्रतिशत की कटौती का था.

आगे फिच ने बताया अचानक हुए इस अनुमानित ब्याज दर में बदलाव का कारण कोरोना वायरस को बताया.

कहा कि इस फैलती महामारी ने आर्थिक रूप से देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है

जिसके मद्देनजर फिच ने अपने अनुमानों में बदलाव किया है.

साथ ही उसने महंगाई में कमी आने का भी अनुमान जताया है.

फिच का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि (GDP Growth) दर 4.9 प्रतिशत रहेगी,

जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा 5.4 प्रतिशत तक रह सकता है.

वहीं एसएंडपी ने इस मामले में तीन देशों के आर्थिक विकास दर का अनुमान जताते हुए पहले कि अपेक्षा कम कर दिया है.

कोरोना के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर की ओर हो रही अग्रसर

एसएंडपी ने बताया कि चीन, भारत और जापान में 2020 में होने वाले विकास के अनुमान को 2.9 प्रतिशत, 5.2 प्रतिशत और -1.2 प्रतिशत किया जा रहा है.

जो पहले 4.8 प्रतिशत, 5.7 प्रतिशत और -0.4 प्रतिशत अनुमानित था.

साथ ही कहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे के प्रकोप में वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी के दौर की ओर बढ़ रही है.

एशिया प्रशांत के प्रमुख अर्थशास्त्री शॉन रोशे, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि चीन में पहली तिमाही में बड़ा झटका देखने को मिलेगा.

तो वहीं अमेरिका और यूरोप में शटडाउन और स्थानीय विषाणु संक्रमण के कारण एशिया-प्रशांत में बड़ी मंदी पैदा होगी.

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ​शक्तिकांत दास ने कोरोना को लेकर सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते हुए बताया था

कि कानूनी तौर पर ब्याज दरों में कटौती का फैसला केवल मौद्रिक समीक्षा नीति बैठक में ही लिया जा सकता है.

जिसके लिए अगली बैठक बुलायी जायेगी जहां कटौती संबंधित मुद्दों पर विचार किया जाएगा.

साथ ही अनुमान भी जताया है कि एमपीसी की अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है.

दास ने कोरोना को बड़ी वजह बताते हुए कहा कि टूरिज्म, हॉस्पिटेलिटी और एयरलाइंस आदि कई सेक्टर्स कोरोना के कारण ग्रसित हुए है.

जिसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है.

अगर कोई कदम ना उठाया गया तो आगे इससे भी ज्यादा बुरी होने की संभावना है.



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