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झारखंड में तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है कोरोना संकट

  • एक दिन में 22 मरीज पाये गये पूरे राज्य में

  • आंकड़ों में हजारीबाग में 8 और पलामू में 7

  • रांची मे फिर पांच संक्रमित मरीज पाये गये

संवाददाता

रांचीः झारखंड में तेजी से कोरोना के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से यह संकट और

गहराता नजर आ रहा है। आज की रिपोर्ट में पूरे राज्य में कुल 22 मरीज कोरोना पॉजिटिव

पाये गये हैं। इनमें से सबसे ज्यादा हजारीबाग के आठ, पलामू के सात, रांची के पांच,

कोडरमा और जमशेदपुर के एक एक मरीज के बारे में आधिकारिक तौर पर जानकारी दी

गयी है। इस स्थिति को देखकर ऐसा माना जा सकता है कि रेड जोन में चल रही रांची की

स्थिति में अभी कोई खास सुधार नहीं हुआ है। पिछले दो दिनों में स्थानीय संक्रमण ऩहीं

पाये जाने की वजह से रांची की स्थिति सुधरती नजर आ रही थी। वैसे राजधानी में जो

मरीज आज संक्रमण के दायरे में पाये गये हैं, उनके बारे में अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि

यहस्थानीय संक्रमण हैं अथवा बाहर से आये लोग हैं। इससे पहले कुछ अन्य इलाकों में जो

कोरोना पॉजिटिव पाये गये थे, वे दूसरे राज्यों से आये थे। आज के आंकड़ों को मिलाने के

बाद झारखंड में कोरोना संक्रमण के 197 मामले हो गये हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक रांची

में संक्रमण के कुल 102 केस हो गये हैं जिनमें एक्टिव केसेस की संख्या 39 रह गयी है।

गुरुवार को 11 मरीज रिकवर भी हुए हैं। मरीजों के ठीक होने के बाद भी लगातार संक्रमण

पाये जाने की वजह से ऐसा माना जा रहा है कि लॉक डाउन 4 में भी संक्रमण वाले इलाकों

को कोई छूट नहीं दी जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी संक्रमण से बचाव के लिए यही

तरीका अपनाने का सुझाव दिया है।

झारखंड में तेजी से फैलने का कारण मजदूरों का लौटना भी

वैसे झारखंड में तेजी से कोरोना के पैर पसारने की खास वजह अन्य राज्यों से मरीजों का

यहां पहुंचना भी है। वैसे इनमें से कुछ के बारे में यह स्पष्ट शिकायत मिली है कि ऐसे लोग

निर्धारित अनुशासन का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें जांच के बाद घर जाने की इजाजत

दिये जाते वक्त ही दूसरों से अलग थलग रहने की हिदायत बार बार दी जा रही है। इस

स्पष्ट हिदायत के बाद भी कई मामलों में ऐसे लोग नियम तोड़कर आस पड़ोस के लोगों से

मिल रहे हैं। इसका नतीजा हो रहा है कि झारखंड में कोरोना पॉजिटिव संबंधी रिपोर्ट आने

के बाद जब संबंधित व्यक्ति की तलाश हो रही है तब तक वह अनेक लोगों के संपर्क में आ

चुका होता है। मजबूरी में उसके संपर्क में आने वालों को भी क्वारेंटीन में भेजा जा रहा है।


 

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