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कोरोना के सौ साल बाद की दुनिया, एक काल्पनिक फिल्म

  • हम जहां पहुंचे हैं उसके लिए जिम्मेदार कौन

  • धरती को मौका मिला तो उसने खुद को सुधारा

  • जिसे घमंड था अपनी ताकत का मिट्टी में मिल गये

रजत कुमार गुप्ता

रांचीः कोरोना के सौ बाद बाद दुनिया कैसी होगी, इस बार में कई किस्म की सोच उभर

सकती है। लेकिन पर्यावरण के सुधरने और प्रदूषण का स्तर उल्लेखनीय तरीके से कम

होने के बाद यह बात दिमाग में आती है कि अगर वाकई यह लंबा चला तो दुनिया कितनी

बदलेगी। जरा सोचते हैं कि अगर रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर ही बाघ या हाथी टहलते

देखें तो कैसा लगेगा। जी नहीं यहां तब कोई इमारतें या गाड़ियां या सबसे बुद्धिमान प्राणी

इंसान नहीं होगा। सारा कुछ जंगल ही जंगल होगा।

कोरोना के सौ साल बाद की इस काल्पनिक फिल्म को देखें

वैसे भी झारखंड की राजधानी रांची के प्रमुख पर्यटन स्थल मोरहाबादी के जिस टैगोर हिल

को हम जानते हैं, उसके बारे में किंवदंती है कि दरअसल इसका नाम टाईगर हिल था

क्योंकि घने जंगलों के बीच बाघों का यह पसंदीदा इलाका था। शायद कुछ गया के पास की

शेरघाटी के जैसा। जहां कभी शेर हुआ करते थे लेकिन अब वीरान है।

इस स्थान को पहचानते हैं, शायद अभी वर्ष 3020 में यह आपकी पहचान का इलाका नहीं

है। रुकिये इसे पुराने समय में वापस लिये चलते हैं। जी हां यह विश्वविख्यात ह्वाईट

हाउस का इलाका है। कभी यह दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान का आवास सह कार्यालय

हुआ करता था। अब सारे कुछ जंगल की भेंट चढ़ चुका है। अजीब स्थिति यह है कि

अमेजन के वर्षा वन के जंगल तेजी से फैलते हुए यहां तक आ पहुंचे हैं।

कोरोना के सौ साल बाद के इन जगहों को पहचान नहीं पाये

अब जरा इसे ध्यान से देखिये और पहचानने की कोशिश कीजिए। मैं जानता हूं आप

शायद इसे इस स्वरुप में कतई नहीं पहचान पायेंगे। बता दूं यह दरअसल राजस्थान के

रेगिस्तान का इलाका है। अब यहां पिछले कई वर्षों से लगातार बर्फवारी हो रही है। आपको

पता है इन एक सौ वर्षों में पूरी दुनिया का औसत तापमान भी दस डिग्री नीचे गिर चुका है।

जो नदिया सूख चुकी थीं, वे अपने आप में अपने मूल स्वरुप में लौट चुकी हैं। पहाड़, झरना

और जंगल के बीच अनेक वैसी प्रजातियां फिर से आबाद नजर आने लगी हैं, जो वर्ष 2020

तक विलुप्त होने वाले प्राणियों की सूची में शामिल थे।

इस जगह को देख लीजिए। यह कभी देश का अन्यतम व्यस्त और भीड़ भाड़ वाला इलाका

हुआ करता था। इसे पुराने स्वरुप में देखिये तो याद आ जाएगा। जी हां यह कोलकाता का

बड़ा बाजार का इलाका है। पता है सुंदर बन के जंगल अब आगे बढ़ते हुए यहां तक आ पहुंचे

हैं। जंगल आगे बढ़ा है तो वहां का रॉयल बंगाल टाईगर भी अब कोलकाता के उन इलाकों

में आराम से घूमता हुआ और शिकार करता हुआ नजर आता है।

दुनिया पर राज करने करने वाले अब नहीं हैं यहां

कोरोना का हमला होने के पहले जिन हथियारों की बदौलत दुनिया के दूसरे देशों पर शासन

करने का दंभ भरा जाता था, वे अब अतीत के पन्नों में ही नहीं बल्कि मिट्टी के नीच भी

दफ्न हो चुके हैं। दुनिया वाकई बहुत खुशहाल है लेकिन उदास है। दरअसल शायद इस

दुनिया को भी अपने सबसे निकृष्ट प्राणी के नहीं होने की कमी खल रही है, जिसने अपनी

हरकतों से इस दुनिया को एक सौ साल पहले बर्बादी के इस कगार पर पहुंचा दिया था।

शायद इस धरती को भी यह शेर याद आ रहा होगा कि

दोस्त बेशक सारे कमीने थे लेकिन यार रौनक तो उन्हीं के होने की थी।


 

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