fbpx Press "Enter" to skip to content

कोरोना से प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर पर भी वित्तीय संकट, निजी अस्पतालों का राजस्व बुरी तरह प्रभावित

  • मरीजों की संख्या में 70 से 80 फीसदी की हुई गिरावट
  • निजी स्वास्थ्य सेवा इकाइयां बंद होने के कागर पर

रांची : कोरोना से जहाँ देश विदेश में जान माल उद्योगों की क्षति हुई है वहीं मेडिका

अस्पताल समूह एवं फिक्की हेल्थ सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन डॉ. आलोक रॉय ने कहा

कि कोरोना (कोविड-19) ने प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

लॉकडाउन की वजह से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में 70 से 80 फीसदी की

गिरावट देखी जा रही है, तो लैब और रेडियोलॉजिकल जांच में भी उसी अनुपात में कमी

हुई है। नतीजा यह है कि निजी अस्पतालों का राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अगर

यही स्थिति रही तो तमाम निजी स्वास्थ्य सेवा इकाइयां बंद हो सकती हैं। डॉ. रॉय ने एक

बयान जारी कर कहा कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में तमाम छोटे अस्पताल और

नर्सिंग होम अपना परिचालन बंद करने को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि उनके समक्ष नकदी

का संकट उत्पन्न हो गया है। कर्मचारियों के वेतन भुगतान तक में दिक्कत आ रही है।

कोरोना के प्रभाव पर लॉकडाउन का डंडा

डॉ. रॉय ने कहा कि इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए फिक्की ने ईवाई इंडिया के साथ

मिलकर, कोरोना के चलते निजी स्वास्थ्य सेवा सेक्टर पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का

अध्ययन करवाया। अध्ययन की रिपोर्ट कहती है कि निजी अस्पताल और लैब, पहले से

ही कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। लॉकडॉउन ने उनका संकट और बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि सरकार होस्पीटैलिटी, पर्यटन और निर्माण जैसे क्षेत्रों

पर पड़ने वाले प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव का तो संज्ञान ले रही है, लेकिन निजी स्वास्थ्य

सेवा सेक्टर के समक्ष आई कई वित्तीय चुनौती पर ना के बराबर चर्चा हो रही है।

स्थिति सामान्य होने में कम से कम तीन तिमाही लगेगा

डॉ. रॉय ने कहा कि इस संकट से धीरे-धीरे ही उबरा जा सकता है। अनुमान है कि स्थिति

सामान्य होने में कम से कम तीन तिमाही का वक्त लगेगा। उन्होंने आग्रह किया कि

निजी हेल्थकेयर सेक्टर के परिचालन घाटे की प्रतिपूर्ति के लिए सरकार को ब्याज मुक्त

या रियायती ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराना चाहिए। हालांकि सरकार ने निजी

अस्पतालों को सीजीएचएस और ईसीएचएस योजनाओं के तहत सरकारी बकाया राशि

जारी करने के लिए एक अधिसूचना जारी की है, 1700-2000 करोड़ रुपये की, जिसका

भुगतान अभी बाकी है। इस तरह की बकाया राशि को तत्काल जारी करना बहुत जरूरी है।

प्राइवेट हेल्थ केयर सेक्टर सरकार के साथ

फिक्की की प्रेसिडेंट और अपोलो अस्पताल समूह की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.

संगीता रेड्डी ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस को रोकने में प्राइवेट हेल्थ केयर सेक्टर

सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है और कोविड 19 के खिलाफ युद्ध में पूरी तरह प्रतिबद्ध

है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर सेक्टर पर पड़ने वाले बोझ पर तत्काल विचार करने की

आवश्यकता है। अस्पतालों में मरीज कम आ रहे हैं, लैब और डायग्नोस्टिक जांच में कमी

आई है। अगर मजबूरी न हो, तो मरीज सर्जरी कराने से बच रहे हैं, इसके अलावा विदेशी

मरीजों की संख्या भी लगभग नगण्य है। यही नहीं कोविड 19 के मद्देनजर अस्पतालों को

अतिरिक्त वित्तीय निवेश भी करना पड़ रहा है। हेल्थकेयर पार्टनर-ईवाई इंडिया के कैवान

मोवडावल्ला ने कहा कि संकट की इस घड़ी में निजी क्षेत्र अपना राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर

सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े और महामारी के खिलाफ तैयार है। सरकार को

भी चाहिए कि वह उनके समक्ष आने वाले वित्तीय संकट पर सहानुभूति पूर्वक विचार करे।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कोरोनाMore posts in कोरोना »
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from रक्षाMore posts in रक्षा »
More from रांचीMore posts in रांची »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from विधि व्यवस्थाMore posts in विधि व्यवस्था »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

2 Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!