Press "Enter" to skip to content

सरकार के लिए कोरोना मौतों के आंकड़े जुटाना सिरदर्द बना

  • कई जिलों से नहीं मिल पा रहे हैं मुकम्मल आंकड़े

  • स्वास्थ्य महकमे ने आंकड़ों को दुरुस्त करने की टीम

  • हाईकोर्ट ने भी दे रखा है आंकड़े सार्वजनिक करने का आदेश

पटना : सरकार के लिए कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा जुटाना खासा मुश्किल हो गया है।

कई जिलों से आधी अधूरी जानकारी ही मिल पा रही है। इससे सरकार का सिरदर्द भी बढ़

गया है। कारण कि हाईकोर्ट ने पहले से ही इस मामले में अपनी मॉनिटरिंग जारी रखी है।

अब कुल मौतों के आंकड़े को सार्वजनिक करने का आदेश भी दे दिया है। हाई कोर्ट के

आदेश के मद्देनजर राज्य सरकार और विभिन्न जिला प्रशासन कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले में कि टीमें बना रखी हैं। फिर भी कई जिलों से

मुकम्मल सूचना नहीं आ पा रही है । इससे राज सरकार के कार्यकलाप के प्रति लोगों में

संशय बढ़ रहा है। लोगों का मानना है कि कोरोना मौतों की संख्या काफी अधिक है ।उसे

छुपाने में सरकार लगी हुई है, क्योंकि इन्हीं मौतों के आधार पर मुआवजा भी देना है।

मुआवजे की राशि लंबी चौड़ी ना हो जाए इसलिए हर स्तर पर पहले उसको चेकिंग कर कम

किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद पुनः सभी फाइलों को खोल कर आंकडे का मिलान

भी हो रहा है। बिहार में कोरोना महामारी अब नियंत्रण में है। पिछले 10 दिनों से बिहार में

जहां प्रतिदिन 500 से कम नये मरीज मिल रहे हैं, वहीं मौतों के सिलसिले में भी काफी

गिरावट आई है। हालांकि मौत के सही आंकड़े सार्वजनिक किए जाने को लेकर राज्य

सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने कोरोना काल के दौरान

हुई मृत्यु के आंकड़े आम जनता को उपलब्ध नहीं कराने पर राज्य सरकार को फटकार भी

लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि जन्म-मृत्यु से संबंधित आंकड़ों के बारे में जानना नागरिकों

का मौलिक अधिकार है।

सरकार के लिए कोर्ट का आदेश भी महत्वपूर्ण

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जन्म-

मृत्यु से जुड़े सभी आंकड़े डिजिटल पोर्टल के जरिए नागरिकों को उपलब्ध हो सकें। कोर्ट ने

स्पष्ट किया कि जन्म और मृत्यु के निबंधन एक्ट, 1969 के तहत हर नागरिक को

डिजिटल पोर्टल का सूचना पाने का अधिकार है। इन डिजिटल पोर्टल को नियमित और

समय समय अपडेट किया जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान की मौलिक

अधिकार के धारा 21 अन्तर्गत नागरिकों को सूचना पाने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट

आदेश दिया कि कोविड 19 के दौरान हुए सभी प्रकार मृत्यु का विवरण रखना राज्य

सरकार की जिम्मेदारी है। हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन आंकड़ों को आम

लोगों को उपलब्ध कराना इसलिए भी जरूरी है ताकि मृतक के परिजनों को सरकार की

योजनाओं का लाभ मिल सके। अदालतत ने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि

वार्षिक रिपोर्ट भी 2018 के बाद अपलोड नहीं किया गया है। कोर्ट ने इसे दो महीने के अंदर

अपलोड करने का निर्देश दिया।अदालत द्वारा जनप्रतिनिधियों को भी कहा गया कि

उनको भी अपने क्षेत्र में हुई मृत्यु के बारे में 24 घंटे के भीतर जानकारी देने का दायित्व है।

उसके बाद से स्वास्थ्य महकमा तथा सभी जिलों के स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, नगर

पालिकाओं को ताकीद किया गया है कि वह विभिन्न अस्पतालों से लेकर श्मशान घाट

तक जाकर एक, एक मौतों का पूरा ब्यौरा इकट्ठा करें । सभी जिलों में यह काम युद्ध स्तर

पर चलाया भी जा रहा है लेकिन अंतिम डाटा अब तक तैयार नहीं हो सका है।

Spread the love
More from HomeMore posts in Home »
More from अदालतMore posts in अदालत »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from बिहारMore posts in बिहार »

Be First to Comment

... ... ...
Exit mobile version