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कोरोना संकट ने भारत के लिए खोल दिये नये अवसरों के द्वार

  • अमेरिकी उच्च शिक्षा का नया विकल्प बनेगा भारत

नईदिल्लीः कोरोना संकट ने जहां हमारे लिए ढेर सारी परेशानियां खड़ी की हैं, वहां शिक्षा

जगत के ऑनलाइन होने की वजह से अचानक ही भारत अब अमेरिकी उच्च शिक्षा का

नया विकल्प बनकर उभरने लगा है। भारत की नई शिक्षा नीति को घोषणा होने तथा

कोरोना काल की वजह से पढ़ाई का अधिकांश हिस्सा ऑनलाइन होने की वजह से

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का नया अवसर भारत को मिलता दिखने लगा है। भारत ने अपनी

नई शिक्षा नीति के तहत यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पढ़ाई संबंधी योजनाओं के

माध्यम से देश के श्रेष्ठ एक सौ विश्वविद्यालयों को अपने यहां आकर्षित करना चाहती

है। अचानक से बदली परिस्थितियों की वजह से यह काम और आसान हो गया है। देश

विदेश के विशेषज्ञ भी अब ऑनलाइन पढ़ाई के तौर और भारत की शिक्षा संबंधी

आधारभूत संरचना को देखते हुए इस बात से इंकार नहीं करते कि आने वाले दिनों में

भारत में बी हावर्ड, ऑक्सफोर्ड या प्रिंसेटन विश्वविद्यालय की शाखाएं स्थापित हो सकती

है। दूसरी तरफ आर्थिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि भारतीय आधारभूत स्थापना खर्च अब

भी विकसित देशों के मुकाबले बहुत कम होने की वजह से यहां पढ़ाई करना किसी भी छात्र

के लिए बहुत कम खर्चीला होगा। ऐसे में देश विदेश के छात्रों का भारत में आकर पढ़ाई

करना ही भारत के लिए उच्च शिक्षा के माध्यम से नये अवसर पैदा करने जा रहा है।

इस संभावना के बारे में अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय

अपने मुख्य केंद्र के महत्व को बनाये रखने के लिए अन्य शाखाओं को कमजोर ही रखते

हैं। लेकिन अब कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में सब कुछ बराबर हो गया है।

अब मुख्य केंद्र और शाखाएं एक ही कतार में हैं 

वहां ऑनलाइन पढ़ाई का जोर है। ऐसे में पढ़ने वाले छात्रों के लिए पढ़ाई पर होने वाले खर्च

पर ध्यान देना जरूरी है। अमेरिका के किसी प्रमुख शहर में रहकर दुनिया के किसी श्रेष्ठ

विश्वविद्यालय में पढ़ने का जो वार्षिक खर्च आता है, उसके मुकाबले भारत में उससे कम

खर्च में वही छात्र अपनी पूरी पढ़ाई समाप्त कर सकता है। ऐसे में सभी के लिए कम पैसे में

उच्च शिक्षा निश्चित तौर पर एक प्राथमिकता बन चुकी है। कोरोना संकट ने अप्रत्याशित

तौर पर भारत के लिए इस नये अवसर के दरवाजे खोल दिये हैं।

कोरोना संकट के कारण शिक्षा में भारत सुधार कर लें तो बेहतर

दूसरी तरफ भारतीय विशेषज्ञ यह मानते हैं कि भारतीय शिक्षा नीति में हुए बदलाव के बाद

अगर भारतीय शैक्षणिक प्रतिष्ठान अपनी गुणवत्ता में और सुधार कर लें तब भी विदेशी

और नामी विश्वविद्यालयों की शाखा यहां खोलने की आवश्यकता नहीं होगी। भारत में

पहले से ही शिक्षा के आधार के प्रमाण के तौर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त

कंपनियों के शीर्ष पदों पर बैठे भारतीय है। भारत के कई इंजीनियरिंग संस्थान

विश्वस्तरीय हैं। साथ ही ऑन लाइन पढ़ाई और कोरोना संकट के दौरान ज्यादा लोकप्रिय

हुए वेबीनार की वजह से चिकित्सा शास्त्र का आधुनिक ज्ञान भी पलक झपकते पूरी

दुनिया तक फैल रहा है।

कुल मिलाकर कोरोना संकट की वजह से देश और घर की आर्थिक स्थिति के अचानक से

बिगड़ जाने की वजह से ही भारत के लिए यह अवसर आया है। अब हर कोई पैसे की बचत

पर गंभीरता से ध्यान दे रहा है। ऐसे में अगर भारत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में और

सुधार हुआ तो कम पैसे में पढ़ाई पूरी करने की चाहत में ही देश विदेश के छात्र अब भारत

में रहकर पढ़ाई करना चाहेंगे।


 

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