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कोरोना के आर्थिक झटकों से अब उबरने लगी दुनिया

कोरोना के आर्थिक झटकों ने सही अर्थों में आर्थिक तौर पर भी पूरी दुनिया को बीमार कर

दिया है। अब तक इसमें उल्लेखनीय सुधार तो नहीं हो पाया है। फिर भी अब कोरोना के

अज्ञात भय से उबरते हुए दुनिया की अर्थव्यवस्था धीरे धीरे पटरी पर लौटती नजर आने

लगी है। कमसे कम आंकड़ों में इसके बेहतर संकेत दिखाई देने लगे हैं। इस सुधार के संकेत

के साथ साथ यह भी स्पष्ट है कि पिछले साल के मुकाबले पूरी दुनिया की अर्थनीति इस

बार डांवाडोल अवस्था में ही रहेगी। खासकर भारत के लिए यह सुखद संकेत हैं कि सभी

स्थानों से इस बार खेती की स्थिति में तुलनात्मक सुधार होने की उम्मीद के संकेत मिल

रहे हैं। लिहाजा कृषि आधारित हमारी अर्थव्यवस्था की वजह से इस फसल के बाजार में

पहुंचने के बाद धीरे धीरे नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और फिर से कोरोना के आर्थिक झटकों से

हमारा उबरना प्रारंभ होगा। फिर भी यह स्पष्ट है कि इस घाटे को पूरा करने में अभी काफी

वक्त लगना तय है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने अब अनुमान लगाया है कि

2020 में वैश्विक वाणिज्कि कारोबार में 9.2 प्रतिशत की कमी आएगी। साथ ही संगठन ने

2021 में कारोबार में 7.2 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। हालांकि संगठन ने कहा

है कि ये अनुमान बहुत अनिश्चित हैं क्योंकि आंकड़ों में बदलाव महामारी की स्थिति व

सरकार की प्रतिक्रिया पर निर्भर हैं। यह अनुमान ज्यादा आशावादी है। डब्ल्यूटीओ ने

अप्रैल महीने के अनुमान में कारोबार में 12.9 प्रतिशत गिरावट का अनुमान लगाया था।

विश्व बैंक ने कहा है कि जून और जुलाई में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के कारण 2020 में

कारोबार की वृद्धि दर के हिसाब से आशा की कुछ किरणें नजर आई हैं।

कोरोना के आर्थिक झटकों के बाद अब पटरी पर लौट रहा है कारोबार

कोविड-19 से जुड़े उत्पादों के कारोबार में वृद्धि खासकर इन महीनों के दौरान बहुत ज्यादा

रही है। इससे सरकारों की जरूरत के मुताबिक आपूर्ति करने में सक्षमता का भी पता

चलता है। इसके विपरीत अगले साल के लिए वृद्धि का अनुमान ज्यादा निराशावादी है,

क्योंकि पहले 21.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। डब्ल्यूटीओ ने कहा कि इस

साल कारोबार को लेकर प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर हुआ है, क्योंकि लॉकडाउन में ढील

मिलने और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से जून और जुलाई में कारोबार बढ़ा है।

संगठन ने कहा है कि अगर चौथी तिमाही में कोविड-19 के मामले बढ़ते हैं तो नकारात्मक

स्थिति पैदा हो सकती है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के हालिया

पूर्वानुमान बताते हैं कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में 4.5 फीसदी का संकुचन होगा।

भले ही वर्ष 2021 में आर्थिक गतिविधि में सुधार आने की संभावना है लेकिन महामारी की

वजह से पैदा हुई अनिश्चितता चिरस्थायी होगी। दुनिया भर में नीति-निर्माता आर्थिक

क्षति को सीमित रखने के लिए आक्रामक तरीके से हस्तक्षेप कर रहे हैं। जहां यह उम्मीद

करना तर्कसंगत है कि सरकारें एवं केंद्रीय बैंक आर्थिक दुर्घटना से बचने और एक टिकाऊ

बहाली लाने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहेंगे, वहीं बड़े केंद्रीय बैंकों के कुछ हस्तक्षेपों

से भारत जैसे उदीयमान बाजारों में नीतिगत जटिलता बढऩे की आशंका है। अमेरिकी

फेडरल रिजर्व के आर्थिक पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दुनिया की सबसे बड़ी

अर्थव्यवस्था में नीतिगत दरें कम-से-कम वर्ष 2023 तक शून्य के आसपास ही बनी रहेंगी।

फेड रिजर्व ने एक औसत मुद्रास्फीति निर्धारण प्रारूप की तरफ भी कदम बढ़ाए हैं।

फलस्वरूप अमेरिकी केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति के 2 फीसदी के निर्धारित लक्ष्य से नीचे रहने

के बाद कुछ समय तक लक्ष्य से थोड़ा ऊपर भी जाने देगा।

अभी स्थिति में सुधार की वैश्विक उम्मीद नहीं है

इसका मतलब है कि नीतिगत दरें एक विस्तारित अवधि तक निम्न स्तर पर ही बनी

रहेंगी। मसलन, फेड रिजर्व इस नीतिगत प्रारूप के तहत वर्ष 2015 से ही ब्याज दरों को

बढ़ा नहीं पाया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नया प्रारूप वास्तव में मुद्रास्फीति

अपेक्षाओं को प्रभावित करता है? इसके अलावा मुद्रास्फीति के निर्धारित लक्ष्य के करीब

पहुंचने पर नया प्रारूप एक हद तक भ्रम भी पैदा करेगा। वित्तीय बाजारों को यह स्पष्ट

नहीं हो सकता है कि केंद्रीय बैंक किस बिंदु पर ब्याज दरों में वृद्धि करना शुरू करेगा।

सैद्धांतिक तौर पर मुद्रास्फीति के निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक हो जाने पर फेड रिजर्व

को एक समयावधि में इसे औसत स्तर पर लाने के लिए 2 फीसदी के नीचे लाने रखना पड़

सकता है जो नीतिगत निर्णय को भी प्रभावित करेगा। हालांकि निकट भविष्य में मौद्रिक

नीति के उदार ही बने रहने की संभावना है। इसलिए कोरोना के आर्थिक झटकों से बाहर

निकलने के बाद भी अंततः भारत सहित सभी देशों को अपना घाटा पूरा करने के लिए

अगले कई वर्षों तक लगातार प्रयास करना होगा।


 

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