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विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम के खिलाफ पूर्वोत्तर में विरोध




पूर्वोत्तर के भाजपा सांसदों ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई मुद्दों पर की चर्चा
नगालैंड में हुई घटना के बाद अफस्पा के खिलाफ आवाज बुलंद

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम के खिलाफ पूर्वोत्तर में विरोध के बीच विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मणिपुर में वादा किया कि अगर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में अगर वह सत्ता में आती है, तो कैबिनेट की पहली बैठक में ही पूरे राज्य से इस कानून के तत्काल और पूर्ण वापसी का फैसला करेगी।




आज पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और विधायक मेघचंद्र द्वारा बुलाई गई मणिपुर कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी मणिपुर के मुख्यमंत्री और सरकार से मांग करती है कि वो संसद के इस शीतकालीन सत्र में अफ्सपा को निरस्त करने के लिए पीएम मोदी और भारत सरकार पर दबाव बनाने के साथ ही पूरे राज्य से अधिनियम को तत्काल हटाने के लिए मणिपुर कैबिनेट की बैठक बुलाई जाए।

दूसरी ओर, पूर्वोत्तर के भाजपा सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पूर्वोत्तर के भगवा दल के सांसदों ने “क्षेत्र से संबंधित” मुद्दों पर चर्चा की। सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने किया।

बैठक में पूर्वोत्तर से संबंधित कई प्रमुख और ज्वलंत विषयों पर चर्चा की गई। सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में अरुणाचल प्रदेश के सांसद- किरेन रिजिजू और तपीर गाओ, असम के सांसद सर्बानंद सोनोवाल रामेश्वर तेली, डॉ राजदीप रॉय, भुवनेश्वर कलिता, क्वीन ओझा, दिलीप सैकिया और पल्लब लोचन दास, त्रिपुरा की सांसद प्रतिमा भौमिक शामिल थे।




विवादास्पद कानून पर पहले से होता रहा है विरोध

विशेष रूप से, पूर्वोत्तर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम को निरस्त करने की मांग नए सिरे से की गई है। 4 दिसंबर को नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा 13 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद से पूर्वोत्तर में अफस्पा को खत्म करने की मांग जोर पकड़ रही है।

पूर्वोत्तर में क्षेत्रीय दल जो इस क्षेत्र में भाजपा के सहयोगी हैं, जिनमें नागालैंड में सत्तारूढ़ एनडीपीपी और मेघालय में सत्तारूढ़ एनपीपी शामिल हैं, ने भी अफस्पा को निरस्त करने की मांग उठाई है।पिछले शनिवार को नगालैंड के मोन जिले के ओटिंग गांव में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कोयला खदान में काम करने वाले 16 मजदूरों की मौत हो गई।

घटना के बाद में झड़पों में सेना के एक जवान और सात अन्य लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद से ही नगालैंड सहित अन्य हिस्सों से अफस्पा हटाने की मांग तेज हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी सोमवार को लोगों के अंतिम संस्कार के दौरान इस कानून को वापस लेने की मांग की थी।



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