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लगातार आ रहे भूकंपों ने लोगों का जीना कर दिया है दुश्वार

  • एक महीने में भूकंप के 25 झटके

  • कोविड प्रोटोकॉल बनाये रखना कठिन

  • घरों को छोड़कर तंबू में रहने लगे लोग

  • मिजोरम की स्थिति सबसे अधिक खराब

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: लगातार आ रहे भूकंपों की वजह से समूचे पूर्वोत्तर का जनजीवन प्रभावित होने

लगा है। खास तौर पर अब मणिपुर और मिजोरम के रहने वाले ग्रामीण लोगों ने घर

छोड़कर तंबू में रहना प्रारंभ कर दिया है। कभी भी भूकंप आने की स्थिति में घरों के धंस

जाने का भय उनके मन में समा गया है। इस दौरान, नेशनल सेंटर ऑफ़ सिस्मोलॉजी की

रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्वी भारत के शहरों और कस्बों जैसे असम,

मेघालय, अरुणाचल मिज़ुरम, सिक्किम, मोनीपुर आदि भूकंप के लिए खतरा होने के

कारण हाई अलर्ट जारी किया था। सरकार के एलर्ट जारी होने के बाद ही लोग अपने अपने

घरों को छोड़कर अस्थायी तंबुओं में रहने चले आये हैं। मिजोरम में 1 महीने में भूकंप के

25 बड़े झटके महसूस किए गए थे।भूकंप आने के बाद कई क्षेत्रों में हलचल मच गई और

लोग अपने-अपने घरों से बाहर सुरक्षित स्थानों पर आ गए थे। इस भूकंप के कारण कई

राजमार्ग टूट गए थे और लोगों के कई घर और भवन प्रभावित हुए थे। मिजोरम का पड़ोसी

राज्य मणिपुर के उखरुल और नोपा के ग्रामीण क्षेत्र के साथ साथ मिजोरम के म्यांमार की

सीमा से लगे चंफाई जिले में लोग सहम गए हैं। भूकंप ग्रामीणों ने अपने सुरक्षा के लिए घर

छोड़ दिया है। भारत में बीते कुछ दिनों से कई इलाकों में बार-बार भूंकप आ रहा है।

मिजोरम राज्य में बीते एक महीने के अंदर 25 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

बार-बार आ रहे भूकंप से डरे लोगों ने अपने घरों में सोना बंद कर दिया है।लोगों में भूकंप

का डर इतना ज्यादा है कि उन्होंने अपने घरों से बाहर अस्थायी तंबू लगाकर रहना शुरू

कर दिया है।

लगातार आ रहे भूकंप का असर कुछ इलाकों में सबसे अधिक

एक अधिकारी ने बताया कि मिजोरम के चार जिलों चंफाई, सईतुआल, सईहा और

सेरछिप में 18 जून से लेकर अब तक कुल 25 बार भूकंप आ चुके हैं जिनकी तीव्रता 4.2 से

5.8 के बीच दर्ज की गई थी। मिजोरम के चंफाई जिलों में चंफाई ऐसा इलाका है, जो भूकंप

से सबसे अधिक प्रभावित हुआ था। चंफाई जिला उपायुक्त मारिया सी टी जुआली ने

बताया कि कई गांवों में लोगों ने अस्थायी तंबू बनाए हैं और वहीं रह रहे हैं। कई लोगों को

जिला प्रशासन ने तिरपाल, पानी के बैरल, सोलर लैंप और प्राथमिक चिकित्सा किट मुहैया

कराई है। अधिकारियों ने बताया कि बुजुर्ग लोगों को बिस्कुट और सोराजो (फुड सप्लिमेंट)

भी दी जा रही है। उपायुक्त के अनुसार, एक महीने में लगभग 25 भूकंपों से चंफाई जिला

प्रभावित हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप में 16 से अधिक गांव प्रभावित हुए हैं

जिनमें गिरजाघर और सामुदायिक हॉल सहित 170 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

लोग अपने घरों में जाने से डर रहे हैं और इसीलिए तंबू में रह रहे हैं। यद्यपि मिज़ोरम

भूकंप क्षेत्र 5 है, लेकिन प्रभावित क्षेत्र अब एक ही समय में भूकंप, मध्यवर्ती भूकंप और

आफ्टरशॉक का सामना करते हैं। इसने कोरोनो वायरस के प्रबंधन में कठिनाइयों के साथ-

साथ यहां तक भूकंप समस्याओं स्थानीय लोगों के लिए जीवन को कठिन बना दिया है।

लोगों का मन में भूकंप का डर पैदा हो रहा है। इन स्थितियों में कोरोनावायरस (कोविद

-19) प्रोटोकॉल को बनाए रखना मुश्किल हो रही है। फिर भी, ग्रामीणों ने वायरल महामारी

के खिलाफ कड़ी निगरानी बनाए रखी है।


 

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