भेंडर मार्केट में जालसाजी को जायज ठहराने का खेल शुरु

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  • नेताओं से मिलकर बना रहे हैं पहचान पत्र

  • नेताओं की सांठ गांठ से वोटर आइ डी

  • छह फीट की दुकान तीन भाइयों के नाम

  • कर्मचारी और सप्लायर तक फायदे में

संवाददाता

रांचीः भेंडर मार्केट की जालसाजी पकड़ में आते ही जालसाजों ने नई चाल चली है।

अजीब बात है कि इसमें कुछ पार्षद भी शामिल हो गये हैं।

इनलोगों की सांठगांठ से वैसे लोगों का मतदाता पहचान पत्र बनाने का काम चल रहा है,

जो पिछले दरवाजे से यहां दुकान लेने में कामयाब हो गये हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भेंडर मार्केट में बाहरी लोगों को दुकान देने की खबर छपने के बाद ही कई स्तरों पर लोगों के कान खड़े हुए हैं।

जिनलोगों को दुकानें मिली हैं, उनमें से करीब चार दर्जन लोग झारखंड के निवासी भी नहीं हैं।

कई लोगों ने बिहार के अपने स्थायी पता पर बैंक से लोन एवं इंदिरा आवास जैसी सुविधाएं पहले ही ले रखी हैं।

जिनकी चर्चा इस भेंडर मार्केट के दुकान आवंटन घोटाला में हो रही है, उनमें से कोई भी यहां का वोटर तक नहीं है।

यहां तक कि रांची नगर निगम में जमा दस्तावेजों में भी उनके स्थानीय नहीं होने की पुष्टि होती है।

अब पता चल रहा है कि इस स्थानीय नहीं होने के सवाल पर गाड़ी फंसने की आशंका होते ही

इनमें से कई लोगों ने नेताओं के साथ सांठ गांठ की है।

सूत्रों की मानें तो इस काम में कुछ पार्षदों को भी मिलाया गया है।

इनकी मिलीभगत से चुनाव के मौसम में मतदाता पहचान पत्र बनाकर जालसाजी को जायज ठहराने की साजिश हो रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक कुछ ऐसे लोगों को भी भेंडर मार्केट में दुकान आवंटित कर दिये गये हैं, जो गलत तरीके से इस सूची में अपना नाम दाखिल कराने में कामयाब हो गये थे।

इनके दुकान होने की पुष्टि में सिर्फ यह पता चलता है कि वे पिछले दो वर्षों से दुकान लगा रहे थे।

मामले की छान-बीन में यह राज भी सामने आया है कि छह फीट के फुटपाथी दुकान को

तीन भाइयों ने अलग अलग दुकान बताकर भेंडर मार्केट में तीन अलग अलग दुकानें हासिल कर ली थी।

इतना ही नहीं फुटपाट दुकान में काम करने वाले कर्मचारी और इन फुटपाथी दुकानों में

माल सप्लाई करने वाले भी भेंडर मार्केट की दुकान लूट के धंधे में शामिल रहे हैं।

इनमें कुछ कपड़ा कारोबारी के भी नाम आये हैं।

दूसरी तरफ कचहरी रोड पर कुछ लोगों ने नाम पर जारी राशन कार्ड का इस्तेमाल भी दरअसल

किसी अन्य के द्वारा लगातार किये जाने की पुष्टि हो चुकी है।

जाहिर है कि भेंडर मार्केट में दुकान आवंटन के नाम पर कोई दूसरा ही खेल चल रहा है,

जिसमें असली हकदारों का हक मारा जा रहा है।

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