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कांग्रेस प्रवक्ताओं ने फिर से पूर्व मुख्यमंत्री की बातों का खंडन कियास कहा

  • जिनलोगों का पक्ष ले रहे हैं उनका सच लोग जानते हैं

  • बालू माफिया के लिए सुरक्षाकर्मी मांगना समझ से परे

  •  जमशेदपुर के व्यापारी पर देह व्यापार का है आरोप

  • केंद्र सरकार से झारखंड के लिए अतिरिक्त सुविधा मांगे

संवाददाता

रांचीः कांग्रेस प्रवक्ताओं ने फिर से पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को ही निशाने पर लेते

हुए उनके बयानों की आलोचना की है। आलोक कुमार दूबे एवं डा राजेश गुप्ता छोटू ने कहा

है कि यह आश्चर्य की बात है कि जब वैश्विक कोरोना वायरस संक्रमण काल में देशव्यापी

लाकडउन के कारण एक सामान्य सी बात को बाबूलाल मरांडी जिस प्रकार हौवा बना रहे हैं

उसकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। ईश्वर ना करे योग शिक्षक के साथ अगर कोई घटना

घटती है तो सीधे तौर पर बाबूलाल मरांडी जिम्मेदार होंगे। झारखंड सरकार की चिंता हर

नागरिक को लेकर है सिर्फ एक व्यक्ति को लेकर नहीं है। सच तो ये है कि इनका एजेंडा

कुछ और है जो बाबूलाल जी कहने में शरमा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक दूबे,राजेश गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2019 में जब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित समारोह में भाग लेने के

लिए रांची आए थे उस वक्त इसी योग शिक्षिका को सुरक्षाकर्मियों ने मुख्य द्वार पर रोक

दिया था। उस वक्त योग शिक्षिका द्वारा रो-रो कर योग की दुहाई दे रही थी लेकिन उसे

अंदर नहीं प्रवेश करने दिया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य के पुलिस महानिदेशक तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी पूरी

तरह से संवेदनशील होकर काम कर रहे हैं और निजी स्वार्थ को लेकर उन पर कोई आरोप

लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह भी आश्चर्य की बात है कि बाबूलाल मरांडी

एक ऐसे बालू माफिया के घर बैठकर कानून व्यवस्था की दुहाई और सुरक्षा की मांग करते

हैं जिसके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज हैं।इतना ही नहीं कोयला तस्कर, शराब माफिया,

बालू माफिया के खिलाफ उनकी आवाज़ नहीं निकलती है।

कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा जिनके पक्ष में बोल रहे हैं उनका कारनामा जगजाहिर है

उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी जमशेदपुर के एक ऐसे होटल व्यवसाई का भी पक्ष लेते हैं

जिसके खिलाफ अदालत में वेश्यावृत्ति का संचालन समेत कई अन्य मामले विचाराधीन

है। बाबूलाल चाहते हैं कि केस भी वही,अदालत भी वही ,फैसला भी उनका,सजा भी वही

तय करेंगे जो संभव नहीं है,सरकार और पुलिस कायदे कानून से चलती है। अभी सभी

शिक्षण संस्थान,कोचिंग संस्थान, जिम,योग संस्थान सब कुछ बन्द पड़े हुए हैं,सनसनी

फैलाने की इजाजत बाबूलाल जी को नहीं दी जा सकती है।उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी

को आम नागरिकों की कोई चिंता नहीं है ,वे सिर्फ कुछ गिने-चुने अपने करीबियों की

सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली

सरकार विधायक राज्य के हर नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है और इस दिशा में

सभी कार्य कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आलोक दूबे,राजेश गुप्ता ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और

भाजपा नेताओं को संकट की इस घड़ी में आम लोगों के रोजगार और उनकी जीविका के

बारे में सोचना चाहिए। लेकिन ये नेता जब दिल्ली जाते हैं तो केंद्रीय मंत्रियों से राज्य को

सहायता उपलब्ध कराने की जगह प्रश्न व्यक्तिगत हित और राजनीतिक महत्वाकांक्षा

की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी जब से भारतीय जनता पार्टी में शामिल

हुए हैं वे सांप्रदायिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि

झारखंड की राजनीति के लिए अप्रासंगिक हो गए बाबूलाल मरांडी सिर्फ मीडिया में बने

रहने के लिए इस तरह की अनर्गल बातें कर रहे हैं।


 

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