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कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नहीं मिला दावेदार हो सकते हैं चुनाव







नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद

से पार्टी संकट का सामना कर रही है।

एक तरफ कर्नाटक में सरकार गिरने के हालात पैदा हो रहे हैं तो दूसरी तरफ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष पद से  पार्टी में उभरे संकट के बीच  अभी तक कांग्रेस वर्किंग कमेटी को नया अध्यक्ष नहीं मिल पाया है।

बताया जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिए पार्टी के पास 7 चेहरे हैं। जिनमें से 5 दलित और 2 अन्य बताए जा रहे हैं।

एक नाम पर आपसी सहमति नहीं बनने की दशा में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हो सकता है।

आपको याद हो तो जब राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष बने थे तो उनके सामने

कांग्रेस अध्यक्ष पद अध्यक्ष पद के लिए शहजाद पूनावाला ने अपनी दावेदारी पेश की थी

लेकिन वह नाकाम हुए और बाद में उन्हें पार्टी भी छोड़नी पड़ी थी।

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए 4 पन्नों का इस्तीफा साझा किया था।

बता दें कि चुनाव नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में

राहुल गांधी ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि न ही वह और न ही

कोई गांधी पार्टी अध्यक्ष पद की कमान संभालेगा।

हालांकि उनके इस फैसले के बाद सभी आलानेताओं ने उन्हें मनाने का प्रयास किया

लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे।

जिन राज्यों में कांग्रेस के बीच अंदरूनी कलह चल रही है उन राज्यों में दिल्ली का नाम भी शुमार हो गया है।

दिल्ली दरबार के दंगल में छह महीने से भी कम का वक्त शेष है।

जहां एक तरफ भाजपा और आम आदमी पार्टी अपनी तैयारी में जुटी है वहीं कांग्रेस में अभी वर्चस्व की लड़ाई जारी है।

कांग्रेस की वैसे ही दिल्ली में कई सालों से हालत खस्ता है,

लेकिन आने वाले समय में भी कांग्रेस मैदान मार लेगी इसके आसार भी पार्टी नेताओं के बीच बढ़ते रार से धूमिल होते नजर आ रहे हैं।

दिल्ली में कांग्रेस के दो बड़े नेता पीसी चाको और शीला दीक्षित के बीच टकराहट एक बार फिर सामने आ रही है।

दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने शीला दीक्षित को चिट्ठी लिखी है कि वो उनका फोन नहीं उठा रही हैं और न ही उनके पत्र का जवाब दे रही हैं।

पीसी चाको ने पत्र लिखकर शीला दीक्षित की खराब सेहत की बात करते हुए

आगे की कार्रवाई करते हुए तीनों कार्यकारी अध्यक्षों को यह अधिकार दे दिया कि वो

शीला के बगैर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की मीटिंग कर सकते हैं और इस मीटिंग की जो

रिपोर्टिंग होगी वो प्रदेश अध्यक्ष को की जाएगी।

फौरी तौर पर देखा जाए तो पीसी चाको साफ तौर पर यह कह रहे हैं कि शीला दीक्षित

नाम की प्रदेश अध्यक्ष रहें और सारे निर्णय तीनों कार्यकारी अध्यक्ष खुद कर लेंगे।

जिसके बाद शीला दीक्षित को डमी प्रेजीडेंट कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

इसके बाद खबर यह भी है कि शीला दीक्षित कांग्रेस महासचिव

केसी वेणुगोपाल से बात कर रही हैं और सारे मामले से उन्हें अवगत करा कर शिकायत कर रही हैं।



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