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असम में विधानसभा चुनाव में अब बीजेपी के सामने बड़ा चुनौती

  • कांग्रेस का पांच दलों से गठबंधन

  • 60 युवा और छात्र संगठनों की नई पार्टी

  • कभी एक दूसरे के विरोधी थे अब एकसाथ हैं

  • बदरूद्दीन अजमल का जनाधार भी बहुत बढ़ा है

  • युवाओं का संगठन असम की अस्मिता के साथ जुड़ा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम में विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। बीजेपी

अध्यक्ष जेपी नड्डा के चुनावी अभियान शुरू करने के बाद अब विपक्षी दलों ने मिल कर

चुनाव लड़ने का फैसला किया है । असम की सत्ता से बीजेपी को हटाने के लिए कांग्रेस ने

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), भाकपा, माकपा, माकपा, भाकपा

(माले) और आंचलिक गण मोर्चा के साथ गठबंधन किया। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के

अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा कि कई दलों के साथ बातचीत के बाद यह फैसला किया गया है

कि कांग्रेस इस चुनाव में विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि

बीजेपी विरोधी दलों के लिए हमारे दरवाजे खुले हुए हैं और हम क्षेत्रीय दलों को आमंत्रित

करते हैं कि वे सत्ताधारी बीजेपी को सत्ता से हटाने की लड़ाई में हमारा साथ दें। बता दें कि

पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य असम की सत्ता पर कांग्रेस लंबे समय तक काबिज रही है,

लेकिन पांच साल पहले बीजेपी के हाथों उसे सियासी मात खानी ही नहीं बल्कि सत्ता भी

गवांनी पड़ी थी। इसके बाद से कांग्रेस लगातार असम में कमजोर होती जा रही है जबकि

बीजेपी का राजनीतिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है।

असम में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कमजोर हुई है

असम ही नहीं बल्कि पूर्वोत्तर में बीजेपी का एकछत्र राज पूरी तरह से कायम है। असम में

कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा रहे तरुण गोगोई अब नहीं रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के सामने

राज्य में एक मजबूत नेतृत्व का भी सवाल खड़ा है. वहीं, असम में बीजेपी की बढ़ती

राजनीतिक ताकत को देखते हुए कांग्रेस ने गठबंधन की राह पर राज्य में चलने का फैसला

किया है। आईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से परहेज करने वाली कांग्रेस अब उन्हीं

के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतर रही है। बदरुद्दीन अजमल की पार्टी का असम के

बंगाली मुस्लिमों को अपनी पार्टी की ओर खींचा है और अब उसका आधार भी बढ़ गया है।

असम के मुस्लिम मतदाताओं के बीच एआईयूडीएफ का अच्छा खासा जनाधार है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम ,किसान कानूनों के खिलाफ आवाज देते हुए ऑल असम

स्टूडेंट यूनियन और असम के युवा और छात्र ने असम जातीय परिषद (एजेपी) नाम के

नई क्षेत्रीय पार्टी बना लिया है । भाजपा के खिलाफ आवाज दे रहे नए राजनीतिक दो ने

मिलकर 60 युवाओं और छात्र संगठनों के साथ मिलकर भाजपा को बड़ी चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और असम गण परिषद जनता की समस्या को समझ नहीं पा रही

है। यही वजह है कि लोगों ने दोनों पक्ष को अलग रखा है। आगामी चुनावों में असम

जातीय परिषद सरकार बनाएगी, जिसमें दावा किया गया है कि अगली सरकार असम

जातीय परिषद की होगी। इसके साथ साथ किसानों के अधिकारों के लिए काम करने वाली

असम संस्था, कृषक मुक्ति संग्राम समिति ने विभिन्न युवा संगठनों के साथ मिलकर

नया पार्टी बना लिया है। अभी असम जातीय परिषद (एजेपी) के साथ एक होकर

सत्ताधारी बीजेपी और सहयोगी दलों को दलों को खुली चुनौती दिया है ।

असम जातीय परिषद की मोर्चाबंदी भी भाजपा के ही खिलाफ

असम जातीय परिषद (एजेपी) के गठन को असम की अस्मिता के साथ जोड़ा जा रहा है।

क्योंकि सीएए विरोधी प्रदर्शनों में असम की अस्मिता को बनाए रखने की छटपटाहट साफ

तौर पर देखी जा सकती है और वहां के लोगों को यह लगता है कि सीएए उनके लोगों के

हितों के खिलाफ है। ऐसे में वह प्रदेश सरकार से जो की भाजपा के साथ गठबंधन में है,

उससे काफी नाराज चल रहे हैं।

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