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कई राज्यों में सरकार बनाने के खेल में फिसल गयी थी कांग्रेस

  • हार से सबक लेते हुए कांग्रेस ने पहले ही किलेबंदी कर ली

  • सिर्फ जयपुर नहीं अनेक प्रत्याशी दुबई भेज दिये गये हैं

  • परिणामों से पहले ही हॉर्स ट्रेडिंग से बचने की कवायद

  • अब 31 और को दुबई भेज दिया गया

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : कई राज्यों में सरकार बनाने के खेल में हार से सबक लेते हुए कांग्रेस ने असम

के लिए दो मई को विधानसभा चुनाव नतीजे आने से पहले ही अपने लोगों को सहेजना

शुरू कर दिया है। कांग्रेस के सहयोगी ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के 19

प्रत्याशियों को दुबई और जयपुर भेजे गए हैं।स्रोत ने कहा कि विपक्षी पार्टी की कुल संख्या

20 विधायक और 30 उम्मीदवार दुबई और जयपुर भेजे गए हैं। विधानसभा चुनाव जीतने

वाले विधायकों और उम्मीदवारों की संख्या 50 से ऊपर है जिन्हें राजस्थान और दुबई भेजा

गया है। उनके साथ पांच अन्य लोग भी आए हैं। सूत्र बताते हैं कि ये सभी मतगणना तक

यहीं दुबई और जयपुर में रहेंगे। ‘असम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में भले ही

अभी कई सप्ताह का वक्त है, लेकिन कांग्रेस और उसके गठबंधन वाले दलों को अपने खेमे

में भाजपा के सेंध लगाने का खतरा पैदा हो गया है। करीबी नतीजे आने की स्थिति में

अपने संभावित विधायकों की ‘हार्स ट्रेडिंग’ रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने और गठबंधन

के अन्य दलों के प्रत्याशियों को एहतियातन राजस्थान भेज दिया है।हालांकि कांग्रेस ने

अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य से बाहर ले जाने को लेकर भी भाजपा

पर ही हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस सवाल का

जवाब अमित शाह, सर्वानंद सोनोवाल और हिमांता बिस्वा सरमा से पूछना चाहिए। सवाल

अच्छा है, सही है लेकिन आप जिससे पूछ रहे हैं, वह आदमी गलत है। सुरजेवाला ने कहा

कि जब प्रजातंत्र का द्रोपदी की तरह चीरहरण हो तो उसकी रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण

की तरह खड़े तो होना पड़ेगा। दरअसल कांग्रेस को परिणाम आने के बाद अपने जीतने

वाले विधायकों के पाला बदलकर भाजपा में जाने की भनक लगी थी।

कई राज्यों के घटनाक्रमों की वजह से पहले की गयी तैयारी

इसके बाद असम के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने केंद्रीय नेतृत्व की सलाह पर उन्हें राजस्थान में

रखने की योजना बनाई। जितेंद्र भी राजस्थान से ही हैं। उन्होंने राजस्थान के कांग्रेस

नेताओं से बातचीत करने के बाद अपने प्रत्याशियों के साथ ही गठबंधन के साथी

एआईयूडीएफ के भी कुछ उम्मीदवारों को राजस्थान भेजने की योजना तैयार की। इसके

बाद 22 उम्मीदवारों को जयपुर के फेयरमॉन्ट होटल में भेज दिया गया है। अगले एक-दो

दिन कुछ और कांग्रेस उम्मीदवार भी भेजे जाने की योजना है। असम में तीन चरणों में 6

अप्रैल को मतदान खत्म हो चुका है।जयपुर पहुंचे एआइयूडीएफ के प्रत्याशियों ने

अनौपचारिक बातचीत में कहा कि असम में कांग्रेस गठबंधन और भाजपा के बीच कड़ा

मुकाबला है। चुनाव परिणाम में बहुत कम अंतर से सरकार बनने की संभावना बन रही है।

कई राज्यों में में ऐसी तैयारी नहीं होने की वजह से कांग्रेस खेमा में पड़ा था डाका। ऐसे में

भाजपा अपने विरोधी दलों के जीतने वाले विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सकती है। इसे

देखते हुए विजयी प्रत्याशियों को खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए जयपुर लाया गया है।

परिणाम आने तक भाजपा के डाका से बचाकर रखा जाएगा

वहां इन सभी को परिणाम आने के बाद सरकार गठन तक जयपुर में सुरक्षा घेरे में रखा

जाएगा। विधानसभा चुनावों के नतीजे 2 मई को आएंगे।यहां बता दें कि एआईयूडीएफ

असम में 10 दलों और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन का घटक है । राज्य में

भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के मकसद से हाल ही में दो महीने पहले इसका गठन

किया गया था। एआईयूडीएफ के सूत्रों ने बताया कि इस अवधि में उम्मीदवार अजमेर

शरीफ भी जाएंगे और उन्हें अलग से मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि अन्य

लोग उनसे संपर्क न करें । उम्मीदवारों के साथ हैं एआईयूडीएफ के आयोजन सचिव एमडी

अमीनुल इस्लाम ने कहा, भाजपा की गंदी राजनीतिक चालों और हमारे उम्मीदवारों को

प्रभावित करने की कोशिशों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

सोच समझकर ही यह फैसला लिया गया है

चुनाव प्रचार में व्यस्त होने के बाद हमारे प्रत्याशी अजमेर शरीफ दरगाह जाना चाहते थे।

इसलिए यह भी यात्रा का एक कारण था। इस्लाम के अलावा एआईयूडीएफ के दो अन्य

वरिष्ठ नेता उम्मीदवारों के साथ राजस्थान चले गए हैं । हालांकि टीम असम से बाहर

कितना समय बिताएगी, इस पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है। इस्लाम ने कहा, बीजेपी इस

चुनाव को हारने वाली है और उनके पास सिर्फ एक ही विकल्प बचा है यानी हमने पिछले

दिनों कई राज्यों में  और खासकर गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के दौरान यह

सब देखा है। उन्होंने कहा, हम यह दिखाना चाहते हैं कि हमारे सभी उम्मीदवार एकजुट हैं।

एआईयूडीएफ ने 2016 में कुल 126 सीटों में से 13 पर जीत हासिल की थी। बांग्लादेश मूल

के बंगाली मुसलमानों के बीच खासा प्रभाव वाली इस पार्टी ने इस चुनाव में 20 सीटों पर

चुनाव लड़ा था, जिसमें दूसरे और तीसरे चरण का मतदान 1 अप्रैल और 6 अप्रैल को हुआ

था।

बोड़ोलैंड पीपुल्स फ्रंट भी अपने प्रत्याशियों को हटा लेगी

हालांकि ऐसी खबरें हैं कि 95 सीटों से चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस और 12 सीटों से चुनाव

लड़ने वाली अन्य सभी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) भी असम से अपने उम्मीदवारों

को बाहरी जगहों पर ले जाएगी, इसकी दोनों तरफ से कोई पुष्टि नहीं हुई है।दरअसल

कांग्रेस असम में पुराने इतिहास के कारण बेचैन है। भाजपा विपक्षी दलों के नाराज नेताओं

की मदद से ही सत्ता में पहुंची है। पहले राज्य में भाजपा के पांच विधायक थे, लेकिन

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी हिमांता बिस्वा सरमा ने पार्टी छोड़कर

भाजपा का दामन थाम लिया था। नतीजतन पांच साल बाद हुए साल 2016 के विधानसभा

चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस को बड़े अंतर से हरा दिया था। हिमांता के अब भी राज्य कांग्रेस के

कई नेताओं से अच्छे संबंध हैं। यही कारण है कि कांग्रेस नतीजे घोषित होने से पहले अपने

कील कांटे मजबूत कर रही है।

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