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कांग्रेस और माकपा गठबंधन के लिए लिटमस टेस्ट होगा उपचुनाव




  • वैकल्पिक राजनीति का नया प्रयोग फिर से आजमाने की तैयारी
विशेष प्रतिनिधि

कोलकाताः कांग्रेस और माकपा एक दूसरे के साथ मिलकर चुनाव लड़

सकते हैं अथवा नहीं इसका दोबारा परीक्षण होने जा रहा है। इसस पूर्व

लोकसभा के चुनाव में यह प्रयोग बुरी तरह असफल रहा था। आगामी

25 नवंबर को पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव

होने हैं। राज्य के कालियागंज, खड़गपुर और करीमपुर विधानसभा सीट

पर मतदान होगा। दोनों दलों ने लोकसभा चुनाव के बाद से ही राज्य

भर में साझा गठबंधन करने का निर्णय पहले से ही ले रखा है।

उसी के मुताबिक इस उपचुनाव में भी माकपा और कांग्रेस का संयुक्त

गठबंधन चुनाव लड़ेगा। यानी जिन सीटों पर माकपा उम्मीदवार खड़े होंगे

वहां कांग्रेस उम्मीदवार नहीं देगी और जहां कांग्रेस उम्मीदवार देगी

वहां वाममोर्चा घटक दल का कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं होगा। इन

तीनों विधानसभा पर भी इसी तरह से सहमति बनी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा स्पष्ट कर चुके हैं कि कालियागंज

और खड़गपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार खड़ा करेगी

जबकि करीमपुर से माकपा अपना उम्मीदवार देगी। इधर वामपंथी

पार्टी के राज्य महासचिव सूर्यकांत मिश्रा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि

करीमपुर से किसे उम्मीदवार बनाया जाएगा यह निर्णय वाममोर्चा के

घटक दलों के नेताओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद ही

लिया जाएगा। उन्होंने भी स्पष्ट कर दिया है कि दोनों दलों के इस

गठबंधन मिलकर इस बार उप चुनाव लड़ेंगे। दरअसल दोनों ही पार्टियां

2019 के लोकसभा चुनाव में ही गठबंधन करने वाली थीं लेकिन दोनों

अपने निजी स्वार्थों को नहीं छोड़ पाए थे जिसके कारण सहमति

नहीं बनी थी और लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार हुई।

कांग्रेस और माकपा जिद नहीं छोड़ मात खा चुके हैं

माकपा राज्य में 42 में से 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारी थी और 39 पर

जमानत जब्त हो चुका था जबकि कांग्रेस महज दो सीटें जीतने में सक्षम रही।

इससे सबक लेते हुए 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले से ही पार्टी ने

राज्य भर में गठबंधन करने का निर्णय लिया था। दीपावली बाद

दोनों ही पार्टियां संजुक्त रूप से सड़कों पर उतरकर सत्तारूढ़ तृणमूल

और भाजपा के खिलाफ आंदोलन भी करने वाली हैं। इस बीच 2021

में इनका गठबंधन कितना कारगर साबित होगा इसके लिए इस बार

होने वाला विधानसभा उपचुनाव बेहद खास है। कालीगंज सीट पर

कांग्रेस का कब्जा था, पर यहां से विधायक प्रमथ नाथ के निधन के

बाद यह सीट खाली है। इसके अलावा खड़गपुर सीट पर बीजेपी के

दिलीप घोष और करीमपुर सीट से तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा

ने जीत दर्ज की थी, लेकिन इन दोनों राजनेताओं के सांसद बन

जाने के बाद यह सीट खाली हो गई है।



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