कांग्रेस और आप में फिर से बन सकती है चुनावी बात

दिल्ली की सत्ता से बेदखल कांग्रेस का आप से गठबंधन पर सवाल
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  • दिल्ली के मुख्यमंत्री के बयान के बाद बदली परिस्थितियां
  • अंदरखाने में हो रही गुपचुप तैयारी
  • दिल्ली के कांग्रेसी अब भी विरोध में
  • चौटाला परिवार को भी इसमें जोड़ने की मुहिम

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में फिर से चुनावी तालमेल हो सकता है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने की मजबूरी में एक दूसरे के कट्टर विरोधी दल

फिर से एकसाथ आने की तैयारियों में जुटे नजर आने लगे हैं।

इससे पहले आम आदमी पार्टी के समझौता के प्रस्ताव को कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के

विरोध की वजह से नामंजूर कर दिया गया था।

याद रहे के केंद्र और दिल्ली में कांग्रेस की सरकार के होने के वक्त ही आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था।

उस दौरान की राजनीतिक परिस्थिति में दोनों एक दूसरे के सबसे प्रवल विरोधी के तौर पर स्थापित हुए थे।

मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस प्रस्ताव को

कांग्रेस नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है, जिसमें उन्होंने हरियाणा में भी मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही है।

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्र कैप्टन अमरिंदर सिंह आम आदमी पार्टी से

अपने राज्य यानी पंजाब में किसी किस्म के चुनावी तालमेल से साफ इंकार कर चुके हैं।

केजरीवाल ने अपने इस प्रस्ताव को अपने ट्विट के माध्यम से जारी किया था।

जिसमें यह कहा गया था कि अगर ऐसा कोई तालमेल होता है तो हरियाणा की

सभी दस सीटों पर भाजपा को पराजित करना संभव होगा।

उनकी दलील थी कि देश की जनता भाजपा के नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जोड़ी को परास्त करना चाहती है।

इसलिए कांग्रेस और जेजेपी को आम आदमी पार्टी के साथ हाथ मिलाकर जनता के

इस इच्छा का सम्मान करना चाहिए।

दूसरी तरफ इसी मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सम्मिलित विपक्ष का बात

कहकर इस मुहिम को गति दे दी है।

अंदरखाने से इसके समीकरणों को तौलने का काम प्रारंभ हो चुका है।

अनुमान है कि अगर ऐसी कोई बात बनती है तो शायद दिल्ली में भी अंततः कोई सीटों का समझौता हो जाएगा।

वर्तमान में दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर भाजपा के सांसद हैं।

राहुल ने चेन्नई में भी पत्रकारों के साथ बात करते हुए भाजपा की वर्तमान सरकार को परास्त करने के लिए किसी भी त्याग की बात कहकर समझौते की संभावना को तेज कर दिया था।

दिल्ली में इससे पूर्व राहुल गांधी को दिल्ली के नेताओं ने साफ कर दिया था कि

आम आदमी पार्टी से हाथ मिलाने से कांग्रेस को यहां कोई फायदा नहीं होने वाला है।

इसलिए दिल्ली में ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए।

इस पर केजरीवाल ने अपनी निराशा व्यक्त करने में संकोच भी नहीं किया था।

उन्होंने कहा था कि कांग्रेस का यह फैसला अंततः भाजपा के फायदे में होगा।

अब हरियाणा में पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला के पुत्र दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व वाली

जेजेपी को भी इस खेमे में शामिल करने का प्रस्ताव केजरीवाल की तरफ से दिया गया है।

हरियाणा के पिछले चुनाव में भाजपा ने दस में से सात सीटें जीती थी।

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