अडानी का बचाव कर रही है केंद्र की मोदी सरकार : कांग्रेस

अडानी का बचाव कर रही है केंद्र की मोदी सरकार : कांग्रेस

नयी दिल्लीः अडानी का बचाव करने में पूरी केंद्र सरकार जुटी हुई है।

कांग्रेस ने फिर से यह आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले तीन-चार साल के दौरान प्राय: देखा गया है कि

इस उद्योगपति के खिलाफ जहां भी जांच शुरू होती है सरकार हस्तक्षेप कर मामले को जल्द बंद करा देती है।

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राजस्व सतर्कता निदेशालय

(डीआरआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह पर ऊर्जा उपकरणों की खरीद में 6600 करोड़ रुपए की

हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया।

डीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपकरणों को उनकी लागत मूल्य से 6600 करोड़ रुपए ज्यादा के दाम पर खरीदा गया है।

उन्होंने कहा कि डीआरआई की रिपोर्ट के आधार पर अडानी समूह के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी

लेकिन दबाव में सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने कह दिया कि जांच रिपोर्ट में कुछ भी नहीं है

और इसमें लगाए गए कोई भी आरोप सही नहीं है।

इन आरोपों के आधार पर मामला बनता नहीं है इसलिए इस पूरे प्रकरण को ही बंद कर दिया गया।

डीआरआई द्वारा इसकी जांच 2014 से की जा रही थी। प्रवक्ता ने कहा कि इसी तरह से गुजरात में भी अडानी को बचाने का प्रयास हुआ है।

वहां अडानी समूह ने 2007 में राज्य सरकार के साथ समझौता किया था कि वह 2 रुपए 40 पैसे प्रति यूनिट

की दर से बिजली उपलब्ध कराएगा।

बाद में कंपनी करार से मुकर गयी और मदद मांगने लगी।

उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा तो न्यायालय ने कह दिया कि

जो करार हुआ है उसी के आधार पर बिजली देनी होगी लेकिन राज्य सरकार न्यायालय के फैसले के विरुद्ध

कंपनी को राहत देने पर सहमत हो गयी है।

अडानी ने बिजली के अलावा कोयला आयात में भी 29 हजार करोड़ का घोटाला किया

श्री रमेश ने कहा कि गुजरात सरकार के इस फैसले से अगले 30 साल तक ऊर्जा क्षेत्र की

तीन कंपनियों को एक लाख 30 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा

जबकि बैंकों को हर साल इसके कारण 18000 करोड़ रुपए का नुकसान भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने गुजरात सरकार के फैसले को ‘मुनाफे का निजीकरण और घाटे का राष्ट्रीयकरण’ करार दिया और आरोप लगाया कि

मोदी सरकार चहेते उद्योगपतियों को बचा रही है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह से डीआरआई ने एक और खुलासा किया है जिसमें अडानी समूह ने

कोयला आयात में 29000 करोड़ रुपए का घोटाला किया है।

उनका कहना है कि देश का 80 प्रतिशत कोयला इसी समूह द्वारा आयात किया जाता है।

डीआरआई ने घोटाले के मद्देनजर जब कोयला आयात को लेकर हुए करार की जानकारी भारतीय स्टेट बैंक से मांगी तो

बैंक ने करारनामा की प्रति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सिंगापुर के कानून के अनुसार इसकी प्रति नहीं दी जा सकती है।

प्रवक्ता ने कहा कि इस करार को लेकर कोई दस्तावेज डीआरआई या अन्य को नहीं देने की मांग करते हुए अडानी समूह ने सिंगापुर न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने ठुकरा दिया।

इसी मामले को अडानी समूह अब बॉम्बे उच्च न्यायालय में लेकर आया है और इस पर 19 सितम्बर को सुनवाई होनी है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अब परीक्षा मोदी सरकार की नीयत की है।

उसकी नियत ठीक होगी तो डीआरआई की मांग के अनुसार इस मामले में विशेष वकील नियुक्त करेगी।

उन्होंने कहा कि अब तक उनके पास जो सूचना है उसके अनुसार कोई विशेष वकील नियुक्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

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